कला-संस्कृति शोकाकुल अर्जुन को गीता वाणी से मिली मुक्ति

शोकाकुल अर्जुन को गीता वाणी से मिली मुक्ति

            आत्माराम यादव पीव वरिष्ठ पत्रकार युद्ध क्षेत्र कुरुक्षेत्र में एकत्रित सेना के मध्य सभी सगे सम्बंधियो को महाभारत युद्ध में शामिल देख अर्जुन शोक…

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धर्म-अध्यात्म अक्षय तृतीया: जीवन को समृद्ध और सार्थक बनाने का पर्व

अक्षय तृतीया: जीवन को समृद्ध और सार्थक बनाने का पर्व

–संदीप सृजन वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि जिसे अक्षय तृतीया या आखा तीज कहा जाता है, भारतीय संस्कृति और हिन्दू धर्म में एक अत्यंत महत्वपूर्ण और पवित्र पर्व है। यह अक्षय तृतीया का नाम ‘अक्षय’ शब्द से लिया गया है, जिसका अर्थ है ‘जो कभी नष्ट न हो’ या ‘शाश्वत’। इस दिन किए गए शुभ कार्य, दान, पूजा-पाठ और अन्य धार्मिक कृत्यों को अक्षय फलदायी माना जाता है। यह पर्व न केवल धार्मिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक परम्पराओं में भी इसका विशेष स्थान है। भारत की विभिन्न धार्मिक और सामाजिक परम्पराओं में अक्षय तृतीया का बहुत महत्व है। हिंदू धर्म में अक्षय तृतीया हिन्दू धर्म में अक्षय तृतीया का दिन कई पौराणिक और धार्मिक घटनाओं से जुड़ा हुआ है। इस दिन को सतयुग और त्रेतायुग के प्रारंभ का दिन भी माना जाता है। इसके अतिरिक्त, इस तिथि से जुड़े कई कथानक और मान्यताएँ इसे और भी पवित्र बनाती हैं। अक्षय तृतीया को भगवान विष्णु के छठे अवतार, परशुराम जी के जन्मदिवस के रूप में भी मनाया जाता है। परशुराम, जो अपने पराक्रम और धर्म की रक्षा के लिए जाने जाते हैं। पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान विष्णु के नर-नारायण अवतार की तपस्या भी अक्षय तृतीया के दिन से जुड़ी है। इस दिन बद्रीनाथ मंदिर के कपाट खुलते हैं, जो हिन्दुओं के चार धामों में से एक है। यह घटना इस पर्व को और भी महत्वपूर्ण बनाती है। ऐसा माना जाता है कि महर्षि वेदव्यास ने महाभारत की रचना अक्षय तृतीया के दिन से शुरू की थी। इसके साथ ही, इस दिन गंगा नदी का पृथ्वी पर अवतरण भी हुआ था। इसलिए, इस दिन गंगा स्नान और दान का विशेष महत्व है। एक अन्य कथा के अनुसार, इस दिन भगवान श्रीकृष्ण ने अपने मित्र सुदामा का आतिथ्य स्वीकार किया था। सुदामा ने श्रीकृष्ण को साधारण चावल (अक्षत) भेंट किए, जिसे भगवान ने बड़े प्रेम से ग्रहण किया और सुदामा को अपार धन-समृद्धि प्रदान की। इस कथा के कारण, अक्षय तृतीया को दान और आतिथ्य का विशेष महत्व दिया जाता है। जैन धर्म में अक्षय तृतीया जैन धर्म में अक्षय तृतीया का दिन प्रथम तीर्थंकर भगवान ऋषभदेव से जुड़ा हुआ है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान ऋषभदेव ने एक वर्ष तक कठोर तपस्या की और इस दिन हस्तिनापुर में राजा श्रेयांस ने उन्हें इक्षु रस (गन्ने का रस) पिलाकर उनका पारणा (उपवास खोलना) कराया। यह घटना जैन समुदाय में ‘वर्षी तप’ के रूप में जानी जाती है। इस दिन जैन तीर्थ पालिताणा (गुजरात) और हस्तिनापुर (मेरठ) में विशेष आयोजन होते है। जैन धर्म के अनुयायी उपवास, दान, और पूजा करते हैं। कई जैन मंदिरों में विशेष आयोजन किए जाते हैं, और भक्त इक्षु रस का दान करते हैं। सामाजिक और सांस्कृतिक महत्व अक्षय तृतीया का  दिन शुभ कार्यों के लिए अत्यंत मंगलकारी माना जाता है। इस दिन बिना किसी मुहूर्त के विवाह, सगाई, गृह प्रवेश, नए व्यवसाय की शुरुआत, और अन्य महत्वपूर्ण कार्य किए जाते हैं। ऐसा माना जाता है कि इस दिन शुरू किए गए कार्यों का फल स्थायी और शुभ होता है। भारत के कई हिस्सों में, विशेषकर राजस्थान, गुजरात, और उत्तर प्रदेश में, अक्षय तृतीया को विवाह के लिए सबसे शुभ दिन माना जाता है। इस दिन हजारों जोड़े विवाह बंधन में बंधते हैं। सामाजिक स्तर पर, यह दिन परिवारों और समुदायों को एकजुट करने का अवसर प्रदान करता है। व्यापारी वर्ग के लिए अक्षय तृतीया का विशेष महत्व है। इस दिन नए व्यवसाय की शुरुआत, दुकान का उद्घाटन, और निवेश जैसे कार्य किए जाते हैं। सोने और चाँदी की खरीदारी भी इस दिन बहुत लोकप्रिय है, क्योंकि यह धन-समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। अक्षय तृतीया को दान-पुण्य का विशेष महत्व है। इस दिन जल, अन्न, वस्त्र, और धन का दान करने की परम्परा है। सामाजिक दृष्टिकोण से, यह दिन समाज में समानता और सहायता की भावना को बढ़ावा देता है। गरीबों और जरूरतमंदों को भोजन और अन्य आवश्यक वस्तुएँ दान की जाती हैं। कृषि और ग्रामीण परम्पराएँ भारत के ग्रामीण क्षेत्रों में, अक्षय तृतीया का संबंध कृषि और प्रकृति से है। इस दिन किसान अपने खेतों में पूजा करते हैं और अच्छी फसल के लिए प्रार्थना करते हैं। उत्तर भारत में, विशेषकर राजस्थान और मध्य प्रदेश में, इस दिन ‘आखा तीज’ के रूप में खेतों में सामूहिक उत्सव मनाए जाते हैं। किसान अपने बैलों और कृषि उपकरणों की पूजा करते हैं, और सामुदायिक भोज का आयोजन करते हैं। अक्षय तृतीया सामाजिक एकता और उत्सव का प्रतीक भी है। इस दिन लोग अपने परिवार और मित्रों के साथ मिलकर उत्सव मनाते हैं। विभिन्न क्षेत्रों में मेले और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। उदाहरण के लिए, राजस्थान के कुछ हिस्सों में लोक नृत्य और गीतों के साथ उत्सव मनाया जाता है। भारत की विविध सांस्कृतिक और धार्मिक परम्पराओं के कारण, अक्षय तृतीया को अलग-अलग क्षेत्रों में विभिन्न रूपों में मनाया जाता है। अक्षय तृतीया भारतीय संस्कृति का एक ऐसा पर्व है, जो धार्मिक, सामाजिक, और सांस्कृतिक दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह दिन न केवल भक्ति और पूजा का अवसर प्रदान करता है, बल्कि सामाजिक एकता, परोपकार, और शुभ कार्यों की शुरुआत का प्रतीक भी है। हिन्दू, जैन, और अन्य समुदायों में इस पर्व का अलग-अलग रूपों में उत्सव मनाया जाता है, जो भारत की सांस्कृतिक विविधता को दर्शाता है। चाहे वह भगवान परशुराम की पूजा हो, सुदामा-कृष्ण की मित्रता का स्मरण हो, या जैन धर्म में वर्षी तप का आयोजन, अक्षय तृतीया हर रूप में अक्षय फलदायी है। यह पर्व हमें यह सिखाता है कि सच्चे मन से किए गए कार्य और दान कभी नष्ट नहीं होते बल्कि वे हमारे जीवन को समृद्ध और सार्थक बनाते हैं। संदीप सृजन

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राजनीति राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के “पंच परिवर्तन” के निहितार्थ

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के “पंच परिवर्तन” के निहितार्थ

डॉ.बालमुकुंद पांडेय  राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ( आरएसएस ) की यह पहल ,संघ के चतुर्दिक्  दृष्टिकोण, व्यक्ति निर्माण,सांगठनिक उद्देश्य ,समाज निर्माण और राष्ट्र- राज्य निर्माण के प्रति…

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राजनीति आतंकियों के ‘मजहब’ पर वामपंथियों की मुहर

आतंकियों के ‘मजहब’ पर वामपंथियों की मुहर

राकेश सैन हर आतंकी हमले के बाद रटा रटाया झूठ परोसा जाता रहा है कि ‘आतंकियों का कोई धर्म नहीं होता।’ झूठ की इस विषैली…

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कला-संस्कृति समरसतावादी समाज के निर्माता थे भगवान परशुराम

समरसतावादी समाज के निर्माता थे भगवान परशुराम

भगवान परशुराम जयंती  अक्षय तृतीया ३० अप्रैल के  अवसर पर:- प्रमोद भार्गव                            …

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राजनीति भारतीय नौसेना ने दिया परिचालन क्षमता का परिचय !

भारतीय नौसेना ने दिया परिचालन क्षमता का परिचय !

जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए भीषण आतंकी हमले(22 अप्रैल 2025) के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव अपने चरम पर पहुंच गया है। गौरतलब…

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पर्यावरण अन्तरिक्ष की उड़ान ले रही जलवायु की जान

अन्तरिक्ष की उड़ान ले रही जलवायु की जान

मयूरी सोचिए — एक तरफ़ दुनिया भयंकर गर्मी, बाढ़ और खाने के संकट से जूझ रही है, और दूसरी तरफ़ चंद अमीर लोग कुछ मिनटों के लिए…

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राजनीति सिंधु संधि पर भारत का नया रुख: कूटनीति से जलनीति तक

सिंधु संधि पर भारत का नया रुख: कूटनीति से जलनीति तक

·       डॉ ब्रजेश कुमार मिश्र 23 अप्रैल को पहलगांव में आतंकी हमले में 28 पर्यटकों की हत्या के बाद भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया। भारत ने…

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कला-संस्कृति भौतिकता एवं आध्यात्मिकता की अक्षय मुस्कान का पर्व

भौतिकता एवं आध्यात्मिकता की अक्षय मुस्कान का पर्व

अक्षय तृतीया 30 अप्रैल, 2025 पर विशेष– ललित गर्ग-अक्षय तृतीया महापर्व का न केवल सनातन परम्परा में बल्कि जैन परम्परा में विशेष महत्व है। इसका…

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राजनीति पाक के खिलाफ कूटनीतिक एवं रणनीतिक दबाव जरूरी

पाक के खिलाफ कूटनीतिक एवं रणनीतिक दबाव जरूरी

-ललित गर्ग- पाकिस्तान की पहचान एक ऐसे देश के रूप में है जो कमजोर है, असफल है, कर्ज में डूबा है, अपने नागरिकों के हितों…

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राजनीति बौखलाहट में खुद का नुकसान कर रहा पाकिस्तान

बौखलाहट में खुद का नुकसान कर रहा पाकिस्तान

राजेश जैन  पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत सरकार ने सख्त प्रतिक्रिया देते हुए सिंधु जल समझौता स्थगित करने सहित पांच बड़े कदम उठाए। इसके जवाब में पाकिस्तान ने भी बौखलाहट में कई तात्कालिक फैसले कर डाले। इनमें शिमला समझौते को रद्द करना, भारतीय उड़ानों के लिए अपने एयरस्पेस को बंद करना और वाघा सीमा चौकी को बंद करने जैसे कदम शामिल हैं लेकिन विशेषज्ञों की राय में पाकिस्तान के ये कदम उसे खुद ही अधिक नुकसान पहुंचाएंगे, जबकि भारत को इससे रणनीतिक और कूटनीतिक फायदे मिल सकते हैं। शिमला समझौते को स्थगित करना पाकिस्तान का एक बड़ा निर्णय रहा। 1972 में भारत और पाकिस्तान के बीच हुए इस समझौते ने कश्मीर विवाद को द्विपक्षीय दायरे में सीमित रखा था लेकिन पाकिस्तान ने ऐतिहासिक रूप से इस समझौते का कई बार उल्लंघन किया है। अब जब पाकिस्तान खुद इसे रद्द कर रहा है तो भारत पर किसी समझौता-उल्लंघन का आरोप लगने की संभावना खत्म हो जाती है। भारत अब एलओसी पर अपनी रणनीति के तहत बदलाव कर सकता है और आतंकवाद से निपटने के लिए जरूरत पड़ने पर सैन्य कार्रवाई भी कर सकता है। सबसे बड़ी बात यह है कि अब वैश्विक शक्तियां, जो पहले ‘द्विपक्षीयता’ के कारण सीमित थीं, भारत के कदमों का खुलकर समर्थन कर सकती हैं।वहीं, पाकिस्तान द्वारा भारतीय विमानों के लिए एयरस्पेस बंद करना एक और भावनात्मक प्रतिक्रिया रही। यह सही है कि इससे भारतीय एयरलाइनों को अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ेगा, रूट लंबा होगा और टिकटें महंगी हो सकती हैं लेकिन दीर्घकालिक नजरिए से देखें तो भारत अपनी एविएशन रणनीति को और मजबूत कर सकता है और वैकल्पिक मार्ग विकसित करने की दिशा में कदम बढ़ा सकता है। पाकिस्तान को भी इस निर्णय का नुकसान झेलना होगा। पहले भी 2019 में एयरस्पेस बंदी के दौरान पाकिस्तान की एविएशन इंडस्ट्री को करोड़ों डॉलर का नुकसान हुआ था। पाकिस्तान द्वारा वाघा-अटारी बॉर्डर को बंद करने का फैसला और दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संघ (सार्क) वीजा छूट रद्द करना भी उसी आत्मघाती प्रतिक्रिया का हिस्सा है। वाघा बॉर्डर से भारत और पाकिस्तान के बीच व्यापारिक गतिविधियां  संचालित होती थीं, जिससे पाकिस्तान को भी फायदा होता था। इस मार्ग के बंद होने से पाकिस्तान की पहले से जर्जर अर्थव्यवस्था पर और भार पड़ेगा। खासकर अफगानिस्तान के लिए ट्रांजिट ट्रेड प्रभावित होगा, जिससे पाकिस्तान की भूराजनैतिक स्थिति और भी कमजोर हो सकती है। भारत और पाकिस्तान के उच्चायोगों से सैन्य सलाहकारों को हटाना तथा कर्मचारियों की संख्या घटाना भी दोनों देशों के बीच संवाद के न्यूनतम चैनल को खत्म करने जैसा है। इससे गलतफहमियां बढ़ने का खतरा है। हालांकि, भारत के लिए यह भी एक अवसर है कि वह पाकिस्तान के आतंकी नेटवर्क और गतिविधियों के खिलाफ कड़े कदम उठाए, बिना यह चिंता किए कि इसका कोई राजनयिक संवाद बाधित होगा। भारत द्वारा सिंधु जल समझौते को स्थगित करने का असर पाकिस्तान पर सबसे गहरा होगा। पाकिस्तान का कृषि क्षेत्र काफी हद तक सिंधु नदी प्रणाली पर निर्भर है। इस पानी की आपूर्ति में कमी आने से कृषि उत्पादन घटेगा, बिजली संकट बढ़ेगा और आर्थिक संकट गहरा सकता है। सिंधु जल समझौता पाकिस्तान के लिए जीवनरेखा की तरह था, और इसका स्थगन पाकिस्तान की जनता पर प्रत्यक्ष प्रभाव डालेगा। भारत ने यह कदम उठाकर एक स्पष्ट संदेश दिया है कि आतंकवाद को प्रश्रय देने की कीमत चुकानी पड़ेगी। स्पष्ट है कि पाकिस्तान ने बौखलाहट में ऐसे फैसले लिए हैं जो तात्कालिक रूप से उसके लोगों के आक्रोश को संतुष्ट कर सकते हैं, लेकिन दीर्घकाल में उसके खुद के लिए विनाशकारी साबित होंगे। भारत ने अपने फैसलों से पाकिस्तान पर कूटनीतिक, आर्थिक और रणनीतिक दबाव बढ़ा दिया है। पाकिस्तान का हर कदम उसे अंतरराष्ट्रीय मंच पर और अलग-थलग करेगा, जबकि भारत वैश्विक समर्थन के साथ अपने हितों की रक्षा करने की मजबूत स्थिति में आ जाएगा। इसलिए अब भारत को संयमित तरीके से आगे बढ़ते हुए इस परिस्थिति का लाभ उठाना चाहिए, ताकि क्षेत्रीय स्थिरता के लिए एक मजबूत संदेश जाए कि आतंकवाद और हिंसा को बढ़ावा देने वालों के लिए कोई जगह नहीं है।   राजेश जैन

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राजनीति भारत के लिये स्थाई सिरदर्द बन चुका आतंक पोषक पाकिस्तान

भारत के लिये स्थाई सिरदर्द बन चुका आतंक पोषक पाकिस्तान

  तनवीर जाफ़री  जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में गत 22 अप्रैल को हुए बर्बरतापूर्ण व अमानवीय आतंकी हमले को देश जल्दी भुला नहीं पायेगा। इसमें 27 बेगुनाहों…

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