जन-जागरण मनुष्य शरीर ईश्वर व मोक्ष प्राप्ति का साधन भी

मनुष्य शरीर ईश्वर व मोक्ष प्राप्ति का साधन भी

मनुष्य शरीर मल-मूत्र बनाने की मशीन सहित  ईश्वर व मोक्ष प्राप्ति का साधन भी -मनमोहन कुमार आर्य वास्तविक दृष्टि से देखा जाय तो शरीर मल-मूत्र…

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विश्ववार्ता पाकिस्तान से बलूचिस्तान अलग होकर रहेगा

पाकिस्तान से बलूचिस्तान अलग होकर रहेगा

  डा. राधेश्याम द्विवेदी पाकिस्तान का पश्चिमी प्रांत बलूचिस्तान नाम का क्षेत्र बड़ा है और यह ईरान (सिस्तान व बलूचिस्तान प्रांत) तथा अफ़ग़ानिस्तान के सटे…

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विविधा तिरंगें का ये कैसा सम्मान ?

तिरंगें का ये कैसा सम्मान ?

हम देश की आजादी का 70वां स्वतंत्रता दिवस मना रहे है। हर तरफ देशभक्ति के गाने सुनाई दे रहे हैं। स्कूल हो या सरकारी दफ्तर…

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कला-संस्कृति विश्वास की रक्षा ही रक्षाबंधन

विश्वास की रक्षा ही रक्षाबंधन

बरुण कुमार सिंह भारतीय परम्परा में विश्वास का बंधन ही मूल है। रक्षाबंधन इसी विश्वास का बंधन है। यह पर्व मात्र रक्षा-सूत्र के रूप में…

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विविधा हिंदी का अलख कैसे जगाएं ?

हिंदी का अलख कैसे जगाएं ?

हम अपनी मातृभाषा बोलने में ठीक वैसे ही शर्माते हैं जैसे कि एक मजदूर औरत के खून पसीने कि कमाई से पढ़ लिखकर बाबू बना…

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महत्वपूर्ण लेख वर्तमान शिक्षा पद्धति या गुलामी की पाठशाला

वर्तमान शिक्षा पद्धति या गुलामी की पाठशाला

कल मेरे घर पर एक विवाह समारोह का आमंत्रण आया ।आमंत्रण पत्र में मुझे जो सबसे ज्यादा लुभाता है वो है बाल मनुहार “मेली बुआ…

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समाज यथार्थ वर्णव्यवस्था और दलितोद्धार में महर्षि दयानन्द का योगदान

यथार्थ वर्णव्यवस्था और दलितोद्धार में महर्षि दयानन्द का योगदान

-मनमोहन कुमार आर्य इतिहास में महर्षि दयानन्द पहले व्यक्ति हुए हैं जिन्होंने उन्नीसवीं शताब्दी के उत्तरार्ध में जन्मना वर्ण-जाति व्यवस्था से ग्रस्त भारतीयों को वैदिक…

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प्रवक्ता न्यूज़ शाहरुख: नाम ने फंसाया

शाहरुख: नाम ने फंसाया

प्रसिद्ध फिल्मी सितारे शाहरुख खान को अमेरिकी हवाई अड्डे पर रोक लिया गया। उनके साथ यह तीसरी बार हुआ है। शिवसेना की पत्रिका ‘सामना’ ने…

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मीडिया सोशल -मीडिया और सामाजिकता के बदलते आयाम

सोशल -मीडिया और सामाजिकता के बदलते आयाम

अनादिकाल से ही मनुष्य सामाजिक प्राणी माना जाता रहा हैं। क्योंकि ज़िंदा रहने के लिए भले ही रोटी -कपडा -मकान की ज़रूरत होती हो लेकिन…

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विविधा आज़ादी कितनी अधूरी, कितनी पूरी

आज़ादी कितनी अधूरी, कितनी पूरी

हासिल स्वतंत्रता, किसी के लिए भी निस्संदेह एक गर्व करने लायक उपलब्धि होती है और स्वतंत्रता दिवस, स्वतंत्रता दिलाने वालों की कुर्बानी को याद करने…

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कविता अधूरी है आज़ादी

अधूरी है आज़ादी

नरेश भारतीय अधूरी क्यों है अभी भी यह आज़ादी? विभाजन को स्वीकार करने की मजबूरी क्या थी? जो कट कर अलग हुए क्या ख़ुश रहे?…

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कविता आजादी पर गर्व हमें है

आजादी पर गर्व हमें है

आजादी पर गर्व हमें है और सदा तक बना रहेगा, जिन लोगों ने कुर्वानी दी उनका नाम अमर रहेगा, पर अन्तिम जन को आजादी कब…

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