घोड़े की टांग पे, जो मारा हथौड़ा : व्यंग्य
Updated: March 26, 2016
आरिफा एविस बचपन में गाय पर निबन्ध लिखा था. दो बिल्ली के झगड़े में बन्दर का न्याय देखा था. गुलजार का लिखा गीत ‘काठी का…
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गाली मत देना
Updated: March 26, 2016
संजय चाणक्य ‘‘राजनीति घर-घर घुसी,कर डाला विखराव। टुकड़ों में आगंन बटा, किए दिलों में घांव।।’’ आप सबसे माफी का तलबगार हू। सोचता हू अपने कटु…
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डा. नारंग : इतने गुस्से में क्यों हैं लोग?
Updated: March 26, 2016
संजय द्विवेदी यह कितना निर्मम समय है कि लोग इतने गुस्से से भरे हुए हैं। दिल्ली में डा. पंकज नारंग की जिस तरह पीट-पीट कर…
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जाओ, मगर सानंद नहीं, जी डी बनकर – अविमुक्तेश्वरानंद
Updated: March 26, 2016
प्रस्तुति: अरुण तिवारी प्रो जी डी अग्रवाल जी से स्वामी ज्ञानस्वरूप सानंद जी का नामकरण हासिल गंगापुत्र की एक पहचान आई आई टी, कानपुर के…
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शहीदों की शहादत को शर्मशार किया
Updated: March 26, 2016
अजीत कुमार सिंह भारतीय क्रांतिकारी आंदोलन का ऐसा नाम जिससे पूरा देश परिचित है। जी हाँ! आज हमारे देश के ऐसी महान विभूति का शहादत…
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चिपको आंदोलन के 46 साल
Updated: March 25, 2016
26 मार्च 1974 की सर्द सुबह…सूरज पहाड़ पर चढ़ रहा था…चमोली जिले के रैणी गांव में भले ही सूरज की तपिश कम थी लेकिन यहा…
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राष्ट्र के भीतर एक देश उगने के मायनें
Updated: March 25, 2016
संदर्भ: श्री श्री के आयोजन में सेना का सहयोग अमेरिकी स्वतंत्रता संग्राम के अगुआ, अमेरिका के प्रथम उप राष्ट्रपति और दि्वतीय राष्ट्रपति एडम स्मिथ ने कहा…
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क्या हमारा पहले एक व अनेक बार मोक्ष हुआ है?
Updated: March 25, 2016
मनमोहन कुमार आर्य मनुष्य योनि मोक्ष का द्वार है। मोक्ष दुःखों से सर्वथा निवृत्ति और जन्म-मरण के बन्धन से मुक्ति को कहते हैं। मनुष्य व…
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नर सेवा नारायण सेवा
Updated: March 25, 2016
आज शेरगढ़ में न कोई दुकान खुली थी और न स्कूल। चूंकि आज ‘निरंजन बाबा’ के अस्थिकलश को भूसमाधि दी जाने वाली थी। पूरा गांव…
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मैं भी हूँ, तुम भी हो, यह राष्ट्रवाद है।
Updated: March 25, 2016
भारत का आम आदमी आज जिस दौर से गुजर रहा है, वह अचम्भित है कि इतनी विविध प्रकार की जो घटनाएँ घटित हो रही हैं…
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उलझन
Updated: March 25, 2016
उलझी हुई सी ज़िन्दगी, बेचैन सी रातें, उलझे हुए तागों मे, पड़ती गईं गाँठे, ये गाँठे अब, खुलती नहीं मुझसे उलझी हुई गाँठों को बक्से बन्द करदूँ, या गाँठों से जुडी बातों को, जहन से अलग कर दूँ। अब कोई मक़सद, नया मै कहीं ढूँढू, ज़िन्दगी की यही चाल है तो, ऐसे ही न क्यो जी लूँ
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विलियम जोन्स का षड्यंत्र
Updated: March 25, 2016
डॉ. मधुसूदन सारांश: (१) छद्म संस्कृत धर्म ग्रंथ रचा जाए। (२) इसाइया की वाणी (Gospel) का संस्कृत अनुवाद किया जाए। (३) पर उसकी निराशा:==> रोम…
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