व्यंग्य घोड़े की टांग पे, जो मारा हथौड़ा : व्यंग्य

घोड़े की टांग पे, जो मारा हथौड़ा : व्यंग्य

आरिफा एविस बचपन में गाय पर निबन्ध लिखा था. दो बिल्ली के झगड़े में बन्दर का न्याय देखा था. गुलजार का लिखा गीत ‘काठी का…

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समाज गाली मत देना  

गाली मत देना  

संजय चाणक्य ‘‘राजनीति घर-घर घुसी,कर डाला विखराव। टुकड़ों में आगंन बटा, किए दिलों में घांव।।’’ आप सबसे माफी का तलबगार हू।  सोचता हू अपने कटु…

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समाज डा. नारंग :  इतने गुस्से में क्यों हैं लोग?

डा. नारंग : इतने गुस्से में क्यों हैं लोग?

संजय द्विवेदी यह कितना निर्मम समय है कि लोग इतने गुस्से से भरे हुए हैं। दिल्ली में डा. पंकज नारंग की जिस तरह पीट-पीट कर…

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साक्षात्‍कार जाओ, मगर सानंद नहीं, जी डी बनकर – अविमुक्तेश्वरानंद

जाओ, मगर सानंद नहीं, जी डी बनकर – अविमुक्तेश्वरानंद

प्रस्तुति: अरुण तिवारी प्रो जी डी अग्रवाल जी से स्वामी ज्ञानस्वरूप सानंद जी का नामकरण हासिल गंगापुत्र की एक पहचान आई आई टी, कानपुर के…

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शख्सियत शहीदों की शहादत को शर्मशार किया

शहीदों की शहादत को शर्मशार किया

अजीत कुमार सिंह भारतीय क्रांतिकारी आंदोलन का ऐसा नाम जिससे पूरा देश परिचित है। जी हाँ! आज हमारे देश के ऐसी महान विभूति का शहादत…

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पर्यावरण चिपको आंदोलन के 46 साल

चिपको आंदोलन के 46 साल

26 मार्च 1974 की सर्द सुबह…सूरज पहाड़ पर चढ़ रहा था…चमोली जिले के रैणी गांव में भले ही सूरज की तपिश कम थी लेकिन यहा…

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विविधा राष्ट्र के भीतर एक देश उगने के मायनें

राष्ट्र के भीतर एक देश उगने के मायनें

संदर्भ: श्री श्री के आयोजन में सेना का सहयोग अमेरिकी स्वतंत्रता संग्राम के अगुआ, अमेरिका के प्रथम उप राष्ट्रपति और दि्वतीय राष्ट्रपति एडम स्मिथ ने कहा…

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चिंतन क्या हमारा पहले एक व अनेक बार मोक्ष हुआ है?

क्या हमारा पहले एक व अनेक बार मोक्ष हुआ है?

मनमोहन कुमार आर्य मनुष्य योनि मोक्ष का द्वार है। मोक्ष दुःखों से सर्वथा निवृत्ति और जन्म-मरण के बन्धन से मुक्ति को कहते हैं। मनुष्य व…

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लेख नर सेवा नारायण सेवा

नर सेवा नारायण सेवा

आज शेरगढ़ में न कोई दुकान खुली थी और न स्कूल। चूंकि आज ‘निरंजन बाबा’ के अस्थिकलश को भूसमाधि दी जाने वाली थी। पूरा गांव…

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राजनीति मैं भी हूँ, तुम भी हो, यह राष्ट्रवाद है।

मैं भी हूँ, तुम भी हो, यह राष्ट्रवाद है।

भारत का आम आदमी आज जिस दौर से गुजर रहा है, वह अचम्भित है  कि इतनी विविध प्रकार की जो घटनाएँ घटित हो रही हैं…

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कविता उलझन

उलझन

उलझी हुई सी ज़िन्दगी, बेचैन सी रातें, उलझे हुए तागों मे, पड़ती गईं गाँठे, ये गाँठे अब, खुलती नहीं मुझसे उलझी हुई गाँठों को बक्से बन्द करदूँ, या गाँठों से जुडी बातों को, जहन से अलग कर दूँ। अब कोई मक़सद, नया मै कहीं ढूँढू, ज़िन्दगी की यही चाल है तो, ऐसे ही न क्यो जी लूँ  

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जरूर पढ़ें विलियम जोन्स का  षड्यंत्र

विलियम जोन्स का  षड्यंत्र

डॉ. मधुसूदन सारांश: (१) छद्म संस्कृत धर्म ग्रंथ रचा जाए। (२) इसाइया की वाणी (Gospel) का संस्कृत अनुवाद किया जाए। (३) पर उसकी  निराशा:==> रोम…

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