केकरा संग खेलहूं फाग
Updated: March 24, 2016
बुरा न मानें होली है — एक ठे स्पेसल फगुआ केकरा संग खेलहूं फाग इटली दूर बसत है इटली दूर बसत है केकरा संग खेलहूं…
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बसंती चोला के दीवाने : भगत-सुखदेव-राजगुरु
Updated: March 24, 2016
(23 मार्च, बलिदान दिवस पर विशेष) ‘एक जीवन और एक ध्येय’ वाले तीन मित्र भगतसिंह, सुखदेव और राजगुरु, इन तीनों की मित्रता क्रांति के इतिहास का स्वर्णिम अध्याय…
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सरकारी पानी
Updated: March 24, 2016
बिजली और पानी को बरबाद होते देख मुझे बहुत गुस्सा आता है। मैं इस मामले में कुछ सनकी स्वभाव का हूं। यदि कहीं ऐसा होता…
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रंगहीन दुनिया में राहु – केतु …!!
Updated: March 24, 2016
तारकेश कुमार ओझा जब पहली बार खबर सुनी कि पाकिस्तान में एक खेल प्रेमी को इसलिए गिरफ्तार कर लिया गया क्योंकि वह विराट कोहली का…
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हम होलिका की जय क्यों बोलते हैं ?
Updated: March 24, 2016
होलिका दहन के समय पता नहीं क्यों हमारे यहाँ होलिका माता की जय बोली जाती है | लोग जलती हुई होली में जौ डालते जाते…
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होली और उसके पूर्व महाभारतकालीन स्वरुप पर विचार
Updated: March 24, 2016
मनमोहन कुमार आर्य भारत और भारत से इतर देशों में जहां भारतीय मूल के लोग रहते हैं, प्रत्येक वर्ष फाल्गुन माह की पूर्णिमा के दिन…
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तीसरे दर्जे के शुभचिंतक
Updated: March 24, 2016
मेरी किसी भी बात से आप भले ही सहमत हों या न, पर मेरी इस बात से तो आप भी हंडरड परसेंट सहमत होंगे कि…
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उत्तराखंड में बगावत की सुनामी
Updated: March 23, 2016
अरविंद जयतिलक पांच राज्यों के चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस शासित राज्य उत्तराखंड में हरीश रावत की सरकार पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं।…
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अपने रक्त से लिख दी थी जिन्होंने परिभाषा देशभक्ति की
Updated: March 24, 2016
नरेश भारतीय आज गर्व और श्रद्धा के साथ भारत माता के उन तीन वीरों भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव के स्मरण का दिन है, जिन्होंने…
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होली ने भरा विधवाओं के जीवन में रंग
Updated: March 23, 2016
वृंदावन का गोपीनाथ मंदिर इक्कीस मार्च को नई परंपरा का गवाह बना…सदियों से जिंदगी के रंगों से दूर रही विधवाओं की जिंदगी तब रंगीन हो…
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दुनिया मेरे आगे लोहिया के कॉलेज में
Updated: March 22, 2016
उमेश चतुर्वेदी बचपन में मानस में कुछ कोलॉज चस्पा हो जाते हैं..वे कोलॉज ताउम्र आपका पीछा नहीं छोड़ते..कोलकाता को लेकर बचपन से ही मेरे मन…
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हम और हमारा राष्ट्रवाद
Updated: March 22, 2016
फकीरी यहां आदर पाती है और सत्ताएं लांछन पाती हैं -संजय द्विवेदी देश में इन दिनों राष्ट्रवाद चर्चा और बहस के केंद्र में है। ऐसे…
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