कविता केकरा संग खेलहूं फाग

केकरा संग खेलहूं फाग

बुरा न मानें होली है — एक ठे स्पेसल फगुआ केकरा संग खेलहूं फाग इटली दूर बसत है इटली दूर बसत है केकरा संग खेलहूं…

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विविधा बसंती चोला के दीवाने : भगत-सुखदेव-राजगुरु

बसंती चोला के दीवाने : भगत-सुखदेव-राजगुरु

(23 मार्च, बलिदान दिवस पर विशेष) ‘एक जीवन और एक ध्येय’ वाले तीन मित्र भगतसिंह, सुखदेव और राजगुरु, इन तीनों की मित्रता क्रांति के इतिहास का स्वर्णिम अध्याय…

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लेख सरकारी पानी

सरकारी पानी

बिजली और पानी को बरबाद होते देख मुझे बहुत गुस्सा आता है। मैं इस मामले में कुछ सनकी स्वभाव का हूं। यदि कहीं ऐसा होता…

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व्यंग्य रंगहीन दुनिया में राहु – केतु …!!

रंगहीन दुनिया में राहु – केतु …!!

तारकेश कुमार ओझा जब पहली बार खबर सुनी कि पाकिस्तान में एक खेल प्रेमी को इसलिए गिरफ्तार कर लिया गया क्योंकि वह विराट कोहली का…

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लेख हम होलिका की जय क्यों बोलते हैं ?

हम होलिका की जय क्यों बोलते हैं ?

होलिका दहन के समय पता नहीं क्यों हमारे यहाँ होलिका माता की जय बोली जाती है | लोग जलती हुई होली में जौ डालते जाते…

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कला-संस्कृति होली और उसके पूर्व महाभारतकालीन स्वरुप पर विचार

होली और उसके पूर्व महाभारतकालीन स्वरुप पर विचार

मनमोहन कुमार आर्य भारत और भारत से इतर देशों में जहां भारतीय मूल के लोग रहते हैं, प्रत्येक वर्ष फाल्गुन माह की पूर्णिमा के दिन…

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व्यंग्य तीसरे दर्जे के शुभचिंतक

तीसरे दर्जे के शुभचिंतक

मेरी किसी भी बात से आप भले ही सहमत हों या न, पर मेरी इस बात से तो आप भी हंडरड परसेंट सहमत होंगे कि…

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राजनीति उत्तराखंड में बगावत की सुनामी

उत्तराखंड में बगावत की सुनामी

अरविंद जयतिलक पांच राज्यों के चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस शासित राज्य उत्तराखंड में हरीश रावत की सरकार पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं।…

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विविधा अपने रक्त से लिख दी थी जिन्होंने परिभाषा देशभक्ति की

अपने रक्त से लिख दी थी जिन्होंने परिभाषा देशभक्ति की

नरेश भारतीय आज गर्व और श्रद्धा के साथ भारत माता के उन तीन वीरों भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव के स्मरण का दिन है, जिन्होंने…

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विविधा होली ने भरा विधवाओं के जीवन में रंग

होली ने भरा विधवाओं के जीवन में रंग

वृंदावन का गोपीनाथ मंदिर इक्कीस मार्च को नई परंपरा का गवाह बना…सदियों से जिंदगी के रंगों से दूर रही विधवाओं की जिंदगी तब रंगीन हो…

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लेख दुनिया मेरे आगे लोहिया के कॉलेज में

दुनिया मेरे आगे लोहिया के कॉलेज में

उमेश चतुर्वेदी बचपन में मानस में कुछ कोलॉज चस्पा हो जाते हैं..वे कोलॉज ताउम्र आपका पीछा नहीं छोड़ते..कोलकाता को लेकर बचपन से ही मेरे मन…

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राजनीति हम और हमारा राष्ट्रवाद

हम और हमारा राष्ट्रवाद

फकीरी यहां आदर पाती है और सत्ताएं लांछन पाती हैं -संजय द्विवेदी देश में इन दिनों राष्ट्रवाद चर्चा और बहस के केंद्र में है। ऐसे…

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