शराबबंदी और लोकायुक्त के लिए एक प्रतिबद्ध गांधीवादी ने त्यागे प्राण
Updated: November 8, 2015
शैलेन्द्र चौहान राजस्थान में सम्पूर्ण शराबबंदी और मजबूत लोकायुक्त कानून बनाए जाने की मांग को लेकर गुरुशरण छाबड़ा लम्बे समय से आंदोलनरत थे. 2 अक्टूबर…
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पुरस्कार वापसी – अंर्तराष्ट्रीय साजिश
Updated: November 8, 2015
डा. अरविन्द कुमार सिंह जरा सोचिए, यदि संपूर्ण प्रिंट एवं इलेक्ट्रानिक मीडिया का प्रकाशन एवं प्रसारण बंद कर दिया जाए तो हम राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य की…
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साहित्य,स्वहित के बीच पुरस्कार वापसी पर प्रश्न…
Updated: November 8, 2015
अक्षय दुबे ‘साथी’ कहा जाता है कि साहित्य समाज का दर्पण होता है,साहित्य कालचक्र का साक्षी होता है.समाज में अच्छाइयों की रचना और बुराइयों…
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अगले इम्तिहान के लिये सीएम अखिलेश की कवायद
Updated: November 8, 2015
आखिरकार युवा और नरमदिल मुख्यमंत्री सख्त हुये और पहले बर्खास्तगी के रूप मे सख्त संदेश और फिर कई बड़ों की छुट्टी करके उत्तर प्रदेश के…
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महर्षि दयानन्द सरस्वती जी की कुछ प्रमुख मान्यतायें
Updated: November 8, 2015
वेदों पर आधारित महर्षि दयानन्द जी की कुछ प्रमुख मान्यताओं को पाठकों के लाभार्थ प्रस्तुत कर रहे हैं: ईश्वर विषयक ईश्वर कि जिसके ब्रह्म, परमात्मादि…
Read moreकट्टरपंथी धर्मगुरु कर रहे समाज को भ्रमित
Updated: November 8, 2015
सरदार अहमद सांप्रदायिक सद्भाव का पहला दायित्व मुसलमानों का है। इस्लाम की महान परंपराएं हमें ऐसा करने का आदेश देती हैं। इस्लाम इस बात को…
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भक्ष्य व अभक्ष्य भोजन एवं गोरक्षा
Updated: November 7, 2015
भक्ष्य व अभक्ष्य भोजन एवं गोरक्षा पर महर्षि दयानन्द के वेदसम्मत, देशहितकारी एवं मनुष्योचित विचार मनुष्य मुख्यतः दो प्रकार के होते हैं, ज्ञानी व अज्ञानी।…
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अदालतों को मेरे सिर्फ दो सुझाव
Updated: November 7, 2015
डॉ.वेदप्रताप वैदिक सर्वोच्च न्यायालय और सरकार के बीच आजकल युद्ध छिड़ा हुआ है। सर्वोच्च न्यायालय न्यायाधीशों की नियुक्ति में पूर्ण स्वतंत्रता चाहता है। इसी संदर्भ…
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मालदीव पर भारत चुप क्यों?
Updated: November 7, 2015
डॉ. वेदप्रताप वैदिक पिछले तीन वर्षों से मालदीव में गजब की उथल−पुथल मची हुई है लेकिन भारत की भूमिका एक असहाय तमाशबीन की−सी हो गई…
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छोटा राजन को देश और दलितों का आदर्श मत बनाइये
Updated: November 7, 2015
“ अपराध का रंग हरा है तो वह आतंकवाद और अगर गैरुआ है तो वह राष्ट्रवाद ,एक मुल्क के रूप में आखिर कहां जा रहे…
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कह रही है ‘अजन्मी’
Updated: November 7, 2015
कह रही है ‘अजन्मी’ मां मैं भी इस दुनिया में आना चाहती हूँ नन्हे नन्हे पैरो से मैं भी गिरकर ठोकर खाना चाहती हूँ गिरते…
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चुटकी भर सिन्दूर
Updated: November 7, 2015
चुटकी भर सिन्दूर डला मांग में और बदल गया जीवन। चुटकी भर सिन्दूर के बदले में मिला उम्र भर का बंधन। सजी मैं संवरी मैं…
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