विविधा प्रतिस्पर्धा उग्रता दर्शाने की?

प्रतिस्पर्धा उग्रता दर्शाने की?

निर्मल रानी हमारे देश के संविधान निर्माताओं द्वारा यहां का संविधान तथा क़ानून हालांकि ऐसा बनाया गया है जिसमें सभी धर्मों,जातियों,वर्गों तथा सभी क्षेत्रों के…

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धर्म-अध्यात्म संसार के सभी मनुष्यों का धर्म क्या एक नहीं है?

संसार के सभी मनुष्यों का धर्म क्या एक नहीं है?

संसार में सम्प्रति अनेक मत-मतान्तर फैले हुए हैं जिनकी अनेक मान्यतायें समान, कुछ भिन्न व कुछ एक दूसरे के विपरीत भी हैं। यह सभी मत…

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राजनीति प्रधानमंत्री की खामोशी के अर्थ-अनर्थ

प्रधानमंत्री की खामोशी के अर्थ-अनर्थ

संजय द्विवेदी तय मानिए यह देश नरेंद्र मोदी को, मनमोहन सिंह की तरह व्यवहार करता हुआ सह नहीं सकता। पूर्व प्रधानमंत्री मजबूरी का मनोनयन थे,…

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राजनीति कांग्रेस के वरिष्ठों में भविष्य की चिंता

कांग्रेस के वरिष्ठों में भविष्य की चिंता

सुरेश हिन्दुस्थानी कांग्रेस पार्टी का वर्तमान और भविष्य उसके वरिष्ठ नेताओं के लिए कई प्रकार के प्रश्नचिन्ह उपस्थित कर रहा है। कांग्रेस में अपने जीवन…

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धर्म-अध्यात्म राम के आदर्श जीवन के अनुरूप स्वयं को बनाने का व्रत लें

राम के आदर्श जीवन के अनुरूप स्वयं को बनाने का व्रत लें

विजयादशमी पर्व पर मर्यादा पुरुषोत्तम राम के आदर्श जीवन के अनुरूप स्वयं को बनाने का व्रत लें विजयादशमी पर्व से हमारे पूर्वजों व देशवासियों ने…

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जन-जागरण बारुद के ढेर पर बैठा हुआ देश

बारुद के ढेर पर बैठा हुआ देश

डॉ. वेदप्रताप वैदिक क्या स्वतंत्र भारत में कभी ऐसा हुआ है कि किसी राष्ट्रपति को दो हफ्तों में तीन बार अपील करनी पड़े? राष्ट्रपति को…

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प्रवक्ता न्यूज़ “सम्मान वापसी : प्रतिरोध या पाखंड” विषय पर संगोष्ठी

“सम्मान वापसी : प्रतिरोध या पाखंड” विषय पर संगोष्ठी

प्रवक्ता.कॉम द्वारा आगामी 29 अक्टूबर 2015, गुरुवार को “सम्मान वापसी : प्रतिरोध या पाखंड” विषय पर सायं 5:00 बजे दिल्ली के दीनदयाल उपाध्याय मार्ग स्थित हिंदी…

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विविधा क्या आप वाकई साहित्कार है?

क्या आप वाकई साहित्कार है?

डा. अरविन्द कुमार सिंह क्षमा कीजिएगा मैं कोई साहित्यकार नही हूॅ। पेशे से एक अध्यापक हूॅ। चरित्र से राष्ट्रवादी हूॅ। विचारों में अपना देश बसता…

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जन-जागरण सवाल भी कम नहीं हैं सम्मान वापसी अभियान पर

सवाल भी कम नहीं हैं सम्मान वापसी अभियान पर

उमेश चतुर्वेदी वैचारिक असहमति और विरोध लोकतंत्र का आभूषण है। वैचारिक विविधता की बुनियाद पर ही लोकतंत्र अपना भविष्य गढ़ता है। कोई भी लोकतांत्रिक समाज…

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शख्सियत तस्लीमा नसरीन को १६ वीं सदी छोड़कर २१ वीं में आ जाना चाहिए !

तस्लीमा नसरीन को १६ वीं सदी छोड़कर २१ वीं में आ जाना चाहिए !

यद्द्पि तस्लीमा नसरीन अपने मादरे -वतन ‘बांग्ला देश ‘ में वहाँ के अल्पसंख्यक हिन्दुओं -ईसाइयों के सामूहिक कत्लेआम की गवाह रहीं हैं।उन्होंने नस्लीय और मजहबी…

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टेक्नोलॉजी डिजिटल इंडिया की डगर

डिजिटल इंडिया की डगर

शुभम श्रीवास्तव मानव सभ्यताओं के लाखों वर्षों से चले आ रहे क्रम में आज हम एक ऐसे मुहाने पर आ कर खड़े हो गए है…

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टेक्नोलॉजी जंगल मे मोर नाचा तो किसने देखा??

जंगल मे मोर नाचा तो किसने देखा??

पंकज कसरादे विदेश नीति के रंग डिजिटल इंडिया ,मेक इन इंडिया,स्किल इंडिया में हम इतने सराबोर हो चुके है कि हमारे आंतरिकता में स्थित देश…

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