साहित्‍य संस्कृत व इतर भाषाओं का अध्ययन और महर्षि दयानन्द

संस्कृत व इतर भाषाओं का अध्ययन और महर्षि दयानन्द

महर्षि दयानन्द ने अपने जीवन काल (1825-1883) वा मुख्यतः 10 अप्रैल, 1875 को आर्यसमाज की स्थापना के बाद देश के अनेक लोगों से पत्रव्यवहार किया…

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राजनीति प्रदेश में अब कोई भी परीक्षा सुरक्षित नहीं

प्रदेश में अब कोई भी परीक्षा सुरक्षित नहीं

उत्तर प्रदेश में परीक्षा प्रणाली अब पूरी  तरह से भ्रष्टाचार के दलदल में डूब चुकी है। कोई भी परीक्षा ऐसी नहीं बची है जोकि पूरी…

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व्यंग्य कबीरा आप ठगाइये, और न ठगिए कोय !

कबीरा आप ठगाइये, और न ठगिए कोय !

आज तथाकथित ‘मूर्ख दिवस’ है ! इस अंतर्राष्ट्रीय [अ]पावन [?] पर्व पर कुछ लोग एक दूसरे मंदमति  जड़मति[मूर्ख] बनाकर आल्हादित होंगे !जिस तरह पूँजीवादी -लोकतंत्रात्मक राष्ट्रों में आर्थिक सामाजिक ,…

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कविता विवशता

विवशता

माफ कर देना मुझे  गर हो सके तो क्योंकि मेरी लाडो ये दुनिया नहीं है  तेरे लिए यहां पग-पग  तेरी राहों पर  बिछे होंगे कांटे…

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धर्म-अध्यात्म अहिंसक धर्म के उद्घोषक भगवान महावीर

अहिंसक धर्म के उद्घोषक भगवान महावीर

भगवान महावीर का प्रादुर्भाव छठी शताब्दी ईसा पूर्व में हुआ था । जैन धर्मग्रन्थों के अनुसार भगवान महावीर 24 वें तीर्थंकर हैं, किन्तु जैन धर्म…

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धर्म-अध्यात्म भगवान महावीर जैन धर्म के संस्थापक नहीं

भगवान महावीर जैन धर्म के संस्थापक नहीं

  बहुत से इतिहासकारों एवं विद्वानों ने भगवान महावीर को जैन धर्म का संस्थापक माना है। भगवान महावीर जैन धर्म के प्रवर्तक नहीं हैं। वे…

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जरूर पढ़ें भाजपा के सदस्यों की संख्या 9 करोड़ के पार पहुँच चुकी है- डॉ. दिनेश शर्मा

भाजपा के सदस्यों की संख्या 9 करोड़ के पार पहुँच चुकी है- डॉ. दिनेश शर्मा

भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह का सपना है कि भाजपा को विश्व की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी बनाया जाय. अपने अध्यक्ष के इसी सपने…

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चिंतन क्या वेद अपौरूषेय हो सकते हैं

क्या वेद अपौरूषेय हो सकते हैं

 क्या वेद अपौरूषेय है? यदि हैं तो वेदों में ईश्वर ने स्वयं ही दिये ज्ञान में आदि ऋषियों व भावी मानव पीढि़यों से अपनी प्रशंसा…

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आर्थिकी गैस सब्सिडी: सोच बदलने की ज़रूरत

गैस सब्सिडी: सोच बदलने की ज़रूरत

हमारे देश में तमाम राजनीतिक दल ऐसे हैं जो सत्ता हासिल करने के लिए जनता को तमाम चीजें मुफ्त में देने की घोषणा करते रहते…

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महिला-जगत पवित्रता और अपवित्रता का फलसफा

पवित्रता और अपवित्रता का फलसफा

सोनाली मिश्रा होली अभी बीती है. होली के आते ही मेरे ज़ेहन में कई बरस पहले की एक घटना एकदम से जैसे सामने से आ…

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व्यंग्य खास की तो बात क्या, आम ही बौरा गये!

खास की तो बात क्या, आम ही बौरा गये!

संवत 71 के पूर्वार्द्ध के माधव मास में देश के ‘आम’ ने बौरेपन से उबर कर परिपक्वता का परिचय देते हुए खास को घूल चटाकर…

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कविता आख़िर खुदकुशी करते हैं क्यों ?

आख़िर खुदकुशी करते हैं क्यों ?

आख़िर खुदकुशी करते हैं क्यों ? जिंदगी जीने से डरते हैं क्यों ? फंदे पर लटककर झूले जीवन है अनमोल ये भूले। अपनों को देकर…

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