धर्म-अध्यात्म यशोदानंदन-२

यशोदानंदन-२

सेवकों ने दोनों पर्यंकों को पास ला दिया। यशोदा जी की दृष्टि जैसे ही पति पर पड़ी, वे बोल पड़ीं – “कहाँ छोड़ आए मेरे…

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कला-संस्कृति भारत भवन : याद रह गयी तेरी कहानी

भारत भवन : याद रह गयी तेरी कहानी

मनोज कुमार 13 फरवरी 1982 का दिन और आज तैंतीस बरस बाद 13 फरवरी 2015 का दिन। यह तारीख बार बार और हर बार आयेगी…

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चुनाव विश्‍लेषण Default Post Thumbnail

1 साल में केजरीवाल ने ऐसे पलटा पासा

  14 फ़रवरी जी हां, दुनिया में इस दिन भले ही वैलेंटाइन डे मनाया जाता हो, लेकिन इस तीराख का अरविंद केजरीवाल की जिंदगी में…

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जन-जागरण बढ़ती धार्मिक असहिष्णुता और वैश्विक चिंतायें

बढ़ती धार्मिक असहिष्णुता और वैश्विक चिंतायें

जावेद अनीस भारत में धार्मिक असहिष्णुता वैश्विक चिंता का सबब बनती जा रही है, अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने एक ही पखवाड़े के दौरान सावर्जनिक…

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राजनीति भाजपा सबक ले और आगे बढ़े….

भाजपा सबक ले और आगे बढ़े….

नरेश भारतीय दिल्ली में हुए चुनावों में अपनी घोर पराजय की सम्यक समीक्षा करते समय भाजपा को यह ध्यान में लेने की महती आवश्यकता है…

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प्रवक्ता न्यूज़ एके49 से एके67 तक

एके49 से एके67 तक

  जैसे किसी ने बहते हुए दरिया को बोतल में बंद कर दिया हो और उसका जल उछलने को छटपटा रहा है, कुछ ऐसा हम…

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राजनीति ये ‘जुमलों’ पर ‘जुनून’ की जीत है!

ये ‘जुमलों’ पर ‘जुनून’ की जीत है!

राजेश कश्यप दिल्ली विधानसभा के चुनावी परिणाम…अद्भूत और अप्रत्याशित। देश के चुनावी इतिहास का उल्लेखनीय अध्याय के रूप में दर्ज हो गया है। बड़े-बड़े दिग्गज,…

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कविता बड़े दिनों पर

बड़े दिनों पर

    उम्मीदों के फूल खिले, मन की कलियाँ मुस्काईं। बड़े दिनों पर लोकतंत्र ने ली ऐसी अंगड़ाई।   बड़े दिनों पर जन-जीवन में लौटी…

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राजनीति जनादेश बड़ा होता है तो जनाकांक्षाएँ भी बड़ी होती हैं

जनादेश बड़ा होता है तो जनाकांक्षाएँ भी बड़ी होती हैं

  दिल्ली में आम आदमी पार्टी की इस ‘सुपर लैंड-स्लाईड विक्ट्री’ से ये स्पष्ट है कि जनता के मिजाज और नब्ज को केजरीवाल और उनकी टीम ने…

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कविता पांच साल केजरीवाल

पांच साल केजरीवाल

जो कहते थे मोफलर, खांसी साथ नही दिया, कोई साथी जोर आजमाइस की थी कितनी, तड़पे पानी बिन, मछली जितनी, सोच में पड़ गए, आज…

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राजनीति नीतीश अड़े और मांझी भी डटे

नीतीश अड़े और मांझी भी डटे

सुरेश हिन्दुस्थानी बिहार में चल रहे राजनीतिक उठापटक के खेल में यूं तो दिग्गज राजनेता माने जाने वालों के लिए एक चुनौती बनकर सामने आए…

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राजनीति ये तो होना ही था … शाह जी !

ये तो होना ही था … शाह जी !

1946 में लिखी बाबा नागार्जुन की ये कविता ईश्वर के प्रति आस्था की मांग के बजाय अनास्था मांगती है जो वैचारिक साहस था उनका। उस…

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