यशोदानंदन-२
Updated: February 11, 2015
सेवकों ने दोनों पर्यंकों को पास ला दिया। यशोदा जी की दृष्टि जैसे ही पति पर पड़ी, वे बोल पड़ीं – “कहाँ छोड़ आए मेरे…
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भारत भवन : याद रह गयी तेरी कहानी
Updated: February 11, 2015
मनोज कुमार 13 फरवरी 1982 का दिन और आज तैंतीस बरस बाद 13 फरवरी 2015 का दिन। यह तारीख बार बार और हर बार आयेगी…
Read more1 साल में केजरीवाल ने ऐसे पलटा पासा
Updated: February 11, 2015
14 फ़रवरी जी हां, दुनिया में इस दिन भले ही वैलेंटाइन डे मनाया जाता हो, लेकिन इस तीराख का अरविंद केजरीवाल की जिंदगी में…
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बढ़ती धार्मिक असहिष्णुता और वैश्विक चिंतायें
Updated: February 11, 2015
जावेद अनीस भारत में धार्मिक असहिष्णुता वैश्विक चिंता का सबब बनती जा रही है, अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने एक ही पखवाड़े के दौरान सावर्जनिक…
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भाजपा सबक ले और आगे बढ़े….
Updated: February 11, 2015
नरेश भारतीय दिल्ली में हुए चुनावों में अपनी घोर पराजय की सम्यक समीक्षा करते समय भाजपा को यह ध्यान में लेने की महती आवश्यकता है…
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एके49 से एके67 तक
Updated: February 10, 2015
जैसे किसी ने बहते हुए दरिया को बोतल में बंद कर दिया हो और उसका जल उछलने को छटपटा रहा है, कुछ ऐसा हम…
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ये ‘जुमलों’ पर ‘जुनून’ की जीत है!
Updated: February 10, 2015
राजेश कश्यप दिल्ली विधानसभा के चुनावी परिणाम…अद्भूत और अप्रत्याशित। देश के चुनावी इतिहास का उल्लेखनीय अध्याय के रूप में दर्ज हो गया है। बड़े-बड़े दिग्गज,…
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बड़े दिनों पर
Updated: February 10, 2015
उम्मीदों के फूल खिले, मन की कलियाँ मुस्काईं। बड़े दिनों पर लोकतंत्र ने ली ऐसी अंगड़ाई। बड़े दिनों पर जन-जीवन में लौटी…
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जनादेश बड़ा होता है तो जनाकांक्षाएँ भी बड़ी होती हैं
Updated: February 10, 2015
दिल्ली में आम आदमी पार्टी की इस ‘सुपर लैंड-स्लाईड विक्ट्री’ से ये स्पष्ट है कि जनता के मिजाज और नब्ज को केजरीवाल और उनकी टीम ने…
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पांच साल केजरीवाल
Updated: February 10, 2015
जो कहते थे मोफलर, खांसी साथ नही दिया, कोई साथी जोर आजमाइस की थी कितनी, तड़पे पानी बिन, मछली जितनी, सोच में पड़ गए, आज…
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नीतीश अड़े और मांझी भी डटे
Updated: February 10, 2015
सुरेश हिन्दुस्थानी बिहार में चल रहे राजनीतिक उठापटक के खेल में यूं तो दिग्गज राजनेता माने जाने वालों के लिए एक चुनौती बनकर सामने आए…
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ये तो होना ही था … शाह जी !
Updated: February 10, 2015
1946 में लिखी बाबा नागार्जुन की ये कविता ईश्वर के प्रति आस्था की मांग के बजाय अनास्था मांगती है जो वैचारिक साहस था उनका। उस…
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