बच्चों का पन्ना बाल पत्रकारिता : संभावना एवं चुनौतियां

बाल पत्रकारिता : संभावना एवं चुनौतियां

14 नवम्बर बाल दिवस पर विशेष लेख मनोज कुमार बीते 5 सितम्बर 2014, शिक्षक दिवस के दिन जब देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी बच्चों से…

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व्यंग्य Be practical Mama

Be practical Mama

            मेरी भांजी हैदराबाद विश्वविद्यालय में हिन्दी की प्रोफ़ेसर है। कभी-कभी बनारस आती है, मुझसे मिलने। उसे लेने और छोड़ने कभी मैं बाबतपुर हवाई अड्डे…

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जन-जागरण गायों को ऑक्सीटोसीन इंजेक्शन क्यों ?

गायों को ऑक्सीटोसीन इंजेक्शन क्यों ?

  आधुनिक मनुष्य अपने स्वार्थ की पूर्ति के लिए पालतू पशुओं के साथ सहअस्तित्व की भावना का निर्वाह न करते हुए जो दुर्व्यवहार कर रहा है,…

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समाज मनुष्य को अछूत मानने वाला स्वयं ‘अछूत’ है

मनुष्य को अछूत मानने वाला स्वयं ‘अछूत’ है

अस्पृश्यता को लेकर पुन: एक बार चर्चा चली है। पुरी के शंकराचार्य निश्चलानंद सरस्वती ने इस विषय में पुन: आपत्तिजनक शब्दों का प्रयोग किया है…

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राजनीति जम्मू कश्मीर में इतिहास ले रहा है करवट

जम्मू कश्मीर में इतिहास ले रहा है करवट

डा० कुलदीप चन्द अग्निहोत्री                  जम्मू कश्मीर में चुनाव आयोग ने वहाँ की विधान सभा के लिये चुनाव प्रक्रिया प्रारम्भ कर दी है । विधान…

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जन-जागरण रक्तदानी चुस्त रक्त संग्रहणकर्ता सुस्त ?

रक्तदानी चुस्त रक्त संग्रहणकर्ता सुस्त ?

 निर्मल रानी पिछले दिनों भारत सहित पूरे विश्व में दसवीं मोहर्रम अर्थात् यौम-ए-आशूरा के अवसर पर शहीद-ए-करबला हज़रत इमाम हुसैन व उनके परिजनों की शहादत…

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कहानी चापलूसी

चापलूसी

अशोक अपनी मेहनत और हुनर के बल पर आज उस मुकाम पर है जिसकी दूसरे लोग कल्पना भी नही कर सकते है। सुबह के करीब…

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विविधा स्वतंत्रता के नाम पर नंगापन

स्वतंत्रता के नाम पर नंगापन

प्रवीण दुबे देश के अग्रगण्य विश्वविद्यालयों में से एक दिल्ली के जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय आजकल खासा चर्चा में है। यहां पढऩे वाले छात्र-छात्राओं द्वारा…

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चिंतन ‘ईश्वर व उसकी उपासना पद्धतियां – एक वा अनेक?’

‘ईश्वर व उसकी उपासना पद्धतियां – एक वा अनेक?’

हम संसार में देख रहे हैं कि अनेक मत-मतान्तर हैं। सभी के अपने-अपने इष्ट देव हैं। कोई उसे ईश्वर के रूप में मानता है, कोई…

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व्यंग्य ‘दिल्ली का चुनावी दंगल ‘फिल्मी’ स्टाइल मे’

‘दिल्ली का चुनावी दंगल ‘फिल्मी’ स्टाइल मे’

भारत की राजनीति मे जो गर्मजोशी और दिलचस्पी अब दिखाई पड़ती है वो संभवतः आज से 10 वर्ष पूर्व शायद बिलकुल नी’रस’ थी। कालांतर प्रति…

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जन-जागरण “महाभारतोत्तर काल के देशी-विदेशी वेद भाष्यकार और महर्षि दयानन्द”

“महाभारतोत्तर काल के देशी-विदेशी वेद भाष्यकार और महर्षि दयानन्द”

आईये, पौर्वीय एवं पाश्चात्य वेदों के भाष्यकारों पर दृष्टि डालते हैं। महाभारत काल के बाद से अब तक लगभग 5,115 वर्षों से कुछ अधिक समय…

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व्यंग्य गड़पने का अहिंसात्मक नुस्खा

गड़पने का अहिंसात्मक नुस्खा

शहर के बीचो- बीच भगवान का जर्जर मंदिर। भगवान का मंदिर जितना जर्जर हो रहा था उनके कारदार उतने ही अमीर। पर भगवान तब भी…

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