आर्थिकी रेपोदर में कमी के साथ ही भारत में ब्याज दरों के नीचे जाने का चक्र प्रारम्भ

रेपोदर में कमी के साथ ही भारत में ब्याज दरों के नीचे जाने का चक्र प्रारम्भ

भारतीय रिजर्व बैंक के नवनियुक्त अध्यक्ष श्री संजय मल्होत्रा ने अपने कार्यकाल की प्रथम मुद्रानीति दिनांक 7 फरवरी 2025 को घोषित की। अभी तक प्रत्येक दो माह के अंतराल पर भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा घोषित की गई मुद्रा नीति के माध्यम से लिए गए निर्णयों का देश में मुद्रा स्फीति को नियंत्रण में रखने में विशेष योगदान रहा है। हालांकि पिछले लगभग 5 वर्षों में रेपो दर में किसी भी प्रकार का परिवर्तन नहीं किया गया है। मई 2020 में अंतिम बार रेपो दर में वृद्धि की घोषणा की गई थी। इसके बाद घोषित की गई 29 मुद्रा नीतियों में रेपो दर को स्थिर रखा गया है और यह अभी भी 6.5 प्रतिशत के स्तर पर कायम है। परंतु,अब फरवरी 2025 माह में घोषित की गई मुद्रा नीति में रेपो दर में 25 आधार बिंदुओं की कमी करते हुए इसे 6.50 प्रतिशत से 6.25 प्रतिशत पर लाया गया है। केंद्र सरकार द्वारा भारतीय रिजर्व बैंक को देश में मुद्रा स्फीति की दर को नियंत्रण में रखने हेतु मेंडेट दिया गया है और इस मेंडेट पर ध्यान रखते हुए भारतीय रिजर्व बैंक ने देश में मुद्रा स्फीति को नियंत्रण में रखने में सफलता भी पाई है। परंतु, वित्तीय वर्ष 2024-25 के प्रथम एवं द्वितीय तिमाही में देश के सकल घरेलू उत्पाद में वृद्धि दर घटकर 5.2 प्रतिशत एवं 5.4 प्रतिशत के निचले स्तर पर आ गई थी, जबकि वित्तीय वर्ष 2023-24 में सकल घरेलू उत्पाद में वृद्धि दर 8.2 प्रतिशत की रही थी। अतः देश में आर्थिक विकास की दर पर भी अब विशेष ध्यान देने की आवश्यकता प्रतिपादित हो रही थी, इसीलिए भारतीय रिजर्व बैंक ने रेपो दर में 25 आधार बिंदुओं में कमी की घोषणा की है। रेपो दर में कमी करने का उक्त निर्णय मुद्रानीति समिति के समस्त सदस्यों ने एकमत से लिया है।   भारतीय रिजर्व बैंक के आंकलन के अनुसार वित्तीय वर्ष 2024-45 में भारत के सकल घरेलू उत्पाद में वृद्धि दर 6.4% की रहेगी और वित्तीय वर्ष 2025-26 में यह बढ़कर 6.7 प्रतिशत के स्तर पर पहुंच जाएगी। इस वर्ष खरीफ की फसल बहुत अच्छे स्तर पर आई है एवं आगे आने वाली रबी की फसल भी ठीक रहेगी क्योंकि मानसून की बारिश अच्छी रही थी और देश के जलाशयों में, क्षमता के अनुसार, पर्याप्त पानी इन जलाशयों में उपलब्ध है, जिसे कृषि सिंचाई के लिए उपयोग में लाया जा रहा है और जो अंततः कृषि की पैदावार को बढ़ाने में सहायक होगा। इससे ग्रामीण इलाकों में उत्पादों की मांग में वृद्धि देखी गई है। हालांकि शहरी इलाकों में उत्पादों की मांग में अभी भी सुधार दिखाई नहीं दिया है। परंतु हाल ही में केंद्र सरकार द्वारा मध्यमवर्गीय करदाताओं को आय कर में दी गई जबरदस्त छूट के चलते आगे आने वाले समय में शहरी क्षेत्रों में भी उत्पादों की मांग में वृद्धि दर्ज होगी और विनिर्माण क्षेत्र में कार्यरत औद्योगिक इकाईयों की उत्पादन वृद्धि दर तेज होगी। सेवा क्षेत्र तो लगातार अच्छा प्रदर्शन कर ही रहा है। प्रयागराज में आयोजित महाकुम्भ मेले में धार्मिक पर्यटन के चलते देश की अर्थव्यवस्था में लगभग 2 लाख करोड़ रुपए का अतिरिक्त योगदान होने की सम्भावना व्यक्त की जा रही है। इस प्रकार, भारत की आर्थिक विकास दर के वित्तीय वर्ष 2023-24 में लगभग 7 प्रतिशत एवं वित्तीय वर्ष 2024-25 में लगभग 8 प्रतिशत रहने के प्रबल सम्भावना बनती है। भारतीय रिजर्व बैंक का आंकलन उक्त संदर्भ में कम ही कहा जाना चाहिए।    इसी प्रकार मुद्रा स्फीति के संबंध में भारतीय रिजर्व बैंक के अनुमान के अनुसार उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित महंगाई की दर वित्तीय वर्ष 2024-25 में 4.8 प्रतिशत एवं वित्तीय वर्ष 2025-26 में घटकर 4.2 प्रतिशत रह सकती है। भारत में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित महंगाई की दर मुख्य रूप से खाद्य पदार्थों के महंगे होने के चलते ही बढ़ती है, जिसे ब्याज दरों को बढ़ाकर नियंत्रण में नहीं लाया जा सकता है। हेडलाइन मुद्रा स्फीति की दर अक्टूबर 2024 में अपने उच्चत्तम स्तर पर पहुंच गई थी परंतु उसके बाद से लगातार नीचे ही आती रही है। इसी प्रकार, कोर मुद्रा स्फीति की दर भी लगातार नियंत्रण में बनी रही है। केवल खाद्य पदार्थों में के महंगे होने के चलते उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित महंगाई पर दबाव जरूर बना रहा है। इस प्रकार महंगाई दर के नियंत्रण में आने से अब भारत में ब्याज दरों में कमी का दौर प्रारम्भ हो गया है। आगे आने वाले समय में भी भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा रेपो दर में कमी की घोषणा की जाती रहेगी ऐसी सम्भावना व्यक्त की जा रही है और दिसम्बर 2025 तक रेपो दर में लगभग 100 आधार बिंदुओं की कमी की जा सकती है और रेपो दर घटकर 5.25 प्रतिशत तक नीचे आ सकती है। हालांकि भारतीय रिजर्व बैंक का कहना है कि देश में आर्थिक परिस्थितियों को ध्यान में रखकर रेपो दर में परिवर्तन के बारे में समय समय पर विचार किया जाएगा। भारतीय रिजर्व बैंक ने नीति उद्देश्य को भी निष्पक्ष रखा है परंतु चूंकि ब्याज दरों में अब कमी करने का चक्र प्रारम्भ हो चुका है अतः इसे उदार रखा जा सकता था। इसका आश्य यह है कि आगे आने वाले समय में भी रेपो दर में कमी की सम्भावना बनी रहेगी।   भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा रेपो दर में की गई कमी की घोषणा के बाद अब विभिन्न बैकों को ऋणराशि पर ब्याज दरों को कम करते हुए ऋणदाताओं को लाभ पहुंचाने के बारे में शीघ्रता से विचार करना चाहिए जिससे आम नागरिकों द्वारा बैकों को अदा की जाने वाली किश्तों एवं ब्याज राशि में कुछ राहत महसूस हो सके। इससे अर्थव्यवस्था में भी कुछ गति आने की सम्भावना बढ़ेगी।  दिसम्बर 2024 माह में देश में तरलता में कुछ कमी महसूस की जा रही थी और बैकों के पास ऋण प्रदान करने योग्य फंड्ज की कमी महसूस की जा रही थी। भारतीय रिजर्व बैंक ने तुरंत निर्णय लेते हुए आरक्षित नकदी अनुपात (CRR) को 4.5 प्रतिशत से घटाकर 4 प्रतिशत कर दिया था, जिससे बैकों की तरलता की स्थिति में कुछ सुधार दृष्टिगोचर हुआ था। बैकों के लिए इसे अधिक सरल बनाने की दृष्टि से जनवरी 2025 में भी भारतीय रिजर्व बैंक ने लगभग 1.50 लाख करोड़ रुपए बांड्ज विभिन्न बैकों से खरीदे थे ताकि इन बैकों की तरलता की स्थिति में और अधिक सुधार किया जा सके और बैकिंग सिस्टम में तरलता की वृद्धि की जा सके। उक्त वर्णित उपायों का परिणाम यह है कि आज भारतीय बैकों का ऋण:जमा अनुपात 80.8 प्रतिशत के स्तर पर बना हुआ है और बैकों की लाभप्रदता में भी लगातार सुधार होता दिखाई दे रहा है। विभिन्न बैकों द्वारा अभी तक घोषित किए गए परिणामों के अनुसार, बैकों ने लगभग 1.50 लाख करोड़ रुपए का लाभ घोषित किया है।   अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जरूर परिस्थितियां अभी भी अस्थिर बनी हुई हैं और वैश्विक स्तर पर रुपए पर दबाव बना हुआ है। अभी हाल ही में डॉलर इंडेक्स 109 के स्तर तक पहुंच गया था और 10 वर्षीय यू एस बांड यील्ड भी 4.75 प्रतिशत तक पहुंच गई थी, इससे अन्य देशों की मुद्राओं पर दबाव बढ़ता जा रहा है और आज अमेरिकी डॉलर के मुकाबले में रुपए की कीमत अपने निचले स्तर 87.66 पर पहुंच गई थी। परंतु, आगे आने वाले समय में अमेरिका में भी यदि ब्याज दरों में कमी की घोषणा होती है तो भारत में भी ब्याज दरों में कमी का चक्र और भी तेज हो सकता है। ब्रिटेन एवं कुछ अन्य यूरोपीयन देशों ने भी हाल ही के समय में ब्याज दरों में कमी की घोषणा की है। चूंकि अब कई देशों में मुद्रा स्फीति नियंत्रण में आ चुकी है अतः अब लगभग समस्त देश ब्याज दरों में कमी की घोषणा करते हुए दिखाई दे रहे हैं। इससे अब आने वाले समय में इन देशों में आर्थिक विकास दर में कुछ तेजी आते हुए भी दिखाई देगी। अमेरिकी डॉलर के मजबूत होने के चलते अमेरिका के शेयर बाजार में केवल जनवरी 2025 माह में ही 15,000 करोड़ अमेरिकी डॉलर की राशि निवेशकों द्वारा डाली गई है, जबकि भारत के शेयर बाजार से 2.50 लाख करोड़ रुपए से अधिक की राशि विदेशी संस्थागत निवेशकों द्वारा निकाली गई है, इससे भी भारतीय रुपए पर दबाव बना हुआ है। परंतु भारतीय रिजर्व बैंक को शायद आभास है कि यह समस्या अस्थायी है एवं भारतीय कम्पनियों की लाभप्रदता में सुधार होते ही विदेशी संस्थागत निवेशक पुनः भारतीय शेयर बाजार में अपने निवेश को बढ़ाएंगे। अमेरिका एवं चीन के बीच छिड़े व्यापार युद्ध का प्रभाव भी भारत पर सकारात्मक रहने की सम्भावना है क्योंकि इससे यदि चीन से अमेरिका को निर्यात कम होते हैं तो सम्भव हैं कि भारत से अमेरिका को निर्यात बढ़ें। भारत से निर्यात बढ़ने पर भारतीय रुपए पर दबाव कम होने लगेगा, जिससे भारतीय रिजर्व बैंक को भारत में रेपो दर को कम करने में और अधिक आसानी होगी।       प्रहलाद सबनानी

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राजनीति दिल्ली विधानसभा चुनाव – ’’आप’’ की झाड़ू ने ’’आप’’ को ही साफ कर दिया

दिल्ली विधानसभा चुनाव – ’’आप’’ की झाड़ू ने ’’आप’’ को ही साफ कर दिया

                       रामस्वरूप रावतसरे दिल्ली विधानसभा चुनाव में भाजपा की आंधी में आम आदमी पार्टी हवा हो गई। वो आम आदमी पार्टी जो लगातार दो चुनावों में…

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राजनीति दिल्ली में भाजपा की जीत और आप की हार के सियासी मायने

दिल्ली में भाजपा की जीत और आप की हार के सियासी मायने

कमलेश पांडेय दिल्ली विधानसभा चुनाव 2025 में विगत 12 वर्षों से सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी यानी ‘आप’ की हार और  प्रमुख विपक्षी पार्टी भाजपा की अप्रत्याशित जीत के सियासी मायने दिलचस्प हैं। इसके राजनीतिक असर भी दूरगामी होंगे क्योंकि एक तरफ जहां भाजपा की जीत से केंद्र में सत्तारूढ़ ‘एनडीए’ की एकजुटता मजबूत होगी, वहीं देश की प्रमुख विपक्षी पार्टी कांग्रेस के नेतृत्व वाले इंडिया गठबंधन में बिखराव को बढ़ावा मिलेगा।  ऐसा इसलिए कि इंडिया गठबंधन की अगुवा पार्टी कांग्रेस ने दिल्ली में अपने पूर्व गठबंधन सहयोगी ‘आप’, जो दिल्ली में लंबे समय से सत्तारूढ़ थी, को हराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इससे कांग्रेस ने आप से जहां अपना पुराना सियासी हिसाब-किताब बराबर कर लिया है, वहीं अपनी खोई राजनीतिक जमीन हासिल करने का शिलान्यास भी कर चुकी है। वहीं, अब उसमें इस बात की भी नई उम्मीद जगी है कि 2030 के दिल्ली विधानसभा चुनाव में जब भाजपा से उसका सीधा मुकाबला होगा तो उसकी स्थिति और मजबूत होगी और उसका खोया जनाधार पुनः वापस लौट जाएगा। बता दें कि 2010 के दशक के शुरुआती सालों में पूर्व नौकरशाह अरविंद केजरीवाल समेत ‘आप’ के कतिपय प्रमुख नेताओं के द्वारा लोकप्रिय समाजसेवी अन्ना हजारे को आगे करके ‘इंडिया अगेंस्ट करप्शन’ नामक एनजीओ के तत्वावधान में कांग्रेस की तत्कालीन डबल इंजन सरकार यानी मनमोहन सिंह सरकार और शीला दीक्षित सरकार के खिलाफ जो भ्रष्टाचार विरोधी मुहिम चलाई गई, उससे 2013 में दिल्ली में 15 वर्षों से सत्तारूढ़ शीला दीक्षित सरकार और 2014 में केंद्र में 10 वर्षों से सत्तारूढ़ मनमोहन सिंह सरकार का सफाया हो गया था। राजनीतिक मामलों के जानकार बताते हैं कि चूंकि इस भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और भाजपा का भी गुप्त समर्थन हासिल था, इसलिए यह आंदोलन काफी सफल रहा। हालांकि एनजीओ के बैनर तले शुरू हुए इस आंदोलन की देशव्यापी लोकप्रियता से उत्साहित समाजसेवियों ने जब आम आदमी पार्टी यानी ‘आप’ का गठन करके दिल्ली विधानसभा चुनाव में अपनी भागीदारी जताई तो आरएसएस और भाजपा ने इससे दूरी बना ली। लेकिन तब तक अन्ना हजारे की आड़ में अरविंद केजरीवाल ने अपनी सामाजिक आभा इतनी चमका ली थी कि उनकी नवगठित पार्टी ‘आप’ ने कांग्रेस की पूरी और बीजेपी की कुछ कुछ राजनीतिक जमीन हड़प ली। यदि गौर किया जाए तो 2013 में जब आप ने धर्मनिरपेक्षता की आड़ में उसी कांग्रेस के सहयोग से भाजपा विरोधी गठबंधन सरकार का गठन किया, जिसका विरोध करके वह चुनाव जीती थी और त्रिशंकु विधानसभा की नौबत आई थी। कांग्रेस की इस एक मात्र भूल ने 2015 के मध्यावधि चुनाव में जहां उसका सफाया कर दिया, वहीं आप की ओर मुस्लिम मतदाताओं के बढ़े रुझान से उसे रिकॉर्ड जीत मिली। क्योंकि भ्रष्टाचार मुक्त राजनीति देने के नाम पर दलितों, पिछड़ों और सवर्णों के अलावा पूर्वांचलियों और पहाड़ियों के साथ-साथ दिल्ली के पंजाबियों-बनियों ने भी आप का साथ दिया। इससे भाजपा भी भौंचक्की रह गई  क्योंकि 2014 में ही उसने पीएम मोदी के नेतृत्व में देश फतह किया था। हालांकि, उसके बाद से ही तत्कालीन गृहमंत्री राजनाथ सिंह को संतुलित करने की जो भाजपा के गुजराती-मराठी लॉबी की अंदरूनी राजनीति शुरू हुई, उससे पूर्वांचलियों में भाजपा की साख गिरी और आप को मजबूती मिली। वहीं, 2020 के दिल्ली विधानसभा चुनाव में भी आप की लोकप्रियता थोड़ी कम हुई, लेकिन भाजपा और कांग्रेस के मुकाबले काफी ज्यादा रही। इसके बाद जब आप ने पंजाब में कांग्रेस को, दिल्ली नगर निगम चुनाव में भाजपा को जबरदस्त शिकस्त दी तो कांग्रेस किंकर्तव्यविमूढ़, लेकिन भाजपा चौकन्नी हो गई। क्योंकि अरविंद केजरीवाल ने यूपी, गोवा, गुजरात, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा समेत अन्य राज्यों में भी अपने पांव पसारने शुरू कर दिए। उन्होंने 2023 में आप को राष्ट्रीय पार्टी का तमगा भी दिलवा दिया। कांग्रेस, भाजपा और जनता पार्टी/जनता दल जैसी राष्ट्रीय पार्टियों के बाद आप एक ऐसी पहली क्षेत्रीय पार्टी बनी जिसने एक के बाद दूसरे राज्य यानी दिल्ली के बाद पंजाब में भी अपनी पूर्ण बहुमत वाली सरकार बना ली। इससे दूरदर्शी भाजपा नेतृत्व सजग हो गया और उसने दिल्ली के उपराज्यपाल के माध्यम से आप सरकार को घेरने की रणनीति बनाई, क्योंकि अरविंद केजरीवाल हर बात में उपराज्यपाल और प्रधानमंत्री को ही निशाना बनाते रहते थे। इस बीच लोकसभा चुनाव 2024 के पहले कांग्रेस के नेतृत्व में बने देशव्यापी इंडिया गठबंधन से जब आप की आंखमिचौली शुरू हुई, तो दिल्ली में कांग्रेस-आप में 4:3 का समझौता हो गया, जबकि पंजाब में दोनों में दोस्ताना मुकाबला हुआ। इसमें कांग्रेस ने आप को धो दिया और पंजाब में आप से दोगुनी सीट जीत ली। तभी यह तय हो  गया कि आप को यदि अपनी राजनीतिक जमीन बचानी है तो कांग्रेस से दूर जाना होगा। दिल्ली विधानसभा चुनाव में यह हुआ तो जरूर, लेकिन यहां भी आप का दांव उलटा पड़ गया। दरअसल, आप एक ऐसी पार्टी के रूप में उभर रही थी, जो भाजपा और कांग्रेस से इतर सभी व्यवहारिक मुद्दों में स्पष्ट नजरिया रख रही थी। लेकिन जब से वह भाजपा के निशाने पर आई, उसकी भी रीति-नीति बदल गई। उससे टक्कर लेने के लिए वह जिन थैलीशाहों की शरण में गई, वही आप को ले डूबे। शराब घोटाला इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। जब तक आप बिजली-पानी फ्री देने, स्कूल-अस्पताल को सुधारने आदि पर फोकस किया, तबतक लोकप्रिय बनी रही। लेकिन कोरोना काल की अवैध वसूली और अपनी कतिपय क्षेत्रवादी व अभद्र नीति से जहां वह जनता में अलोकप्रिय हुई, वहीं नीतिगत शराब घोटाले ने उसकी सरकार को ही जेल में डाल दिया। आप सरकार के मुख्यमंत्री की जेल यात्रा और पूर्व उपमुख्यमंत्री की जेल यात्रा तो महज एक बानगी रही, उसके अन्य मंत्री व सांसद भी भ्रष्टाचार के आरोप में जेल गए और बमुश्किल जमानत पर रिहा हुए।  उधर भाजपा ने अरविंद केजरीवाल के शीशमहल, वायु प्रदूषण, यमुना जल प्रदूषण, दिल्ली के कुछ इलाकों के नारकीय हालात आदि पर इतना फोकस किया कि लोगों को यह महसूस हुआ कि दिल्ली में आप की सरकार के रहते दिल्ली का अब और विकास नहीं हो सकता। इससे पहले भी दिल्ली के विकास का सारा श्रेय शीला दीक्षित सरकार को जाता है। वहीं, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आप को दिल्ली के लिए ‘आपदा’ (आप-दा) करार दे दिया, क्योंकि यह सरकार विभिन्न महत्वपूर्ण केंद्रीय योजनाओं को दिल्ली में लागू ही नहीं होने देती थी। वहीं, कानून-व्यवस्था पर केंद्र सरकार को घेरती रहती थी, क्योंकि दिल्ली पुलिस गृह मंत्रालय के अंतर्गत होता है। हालांकि, जब भाजपा ने आरएसएस के सहयोग से आप को दिल्ली की गली-कूची में घेरना शुरू किया, तब स्थिति बदलती। छठ पूजा के खिलाफ अरविंद केजरीवाल की सोच भी उनपर भारी पड़ी। कांग्रेस के खिलाफ सपा, तृणमूल कांग्रेस, शिवसेना यूटीबी आदि का समर्थन भी आप को भारी पड़ा, क्योंकि इनकी पहचान मुस्लिम परस्त और देशद्रोही पार्टी की बनती जा रही है। वहीं, दिल्ली के दंगों को, शाहीन बाग जैसे धरनों और किसान आंदोलन जैसे महानगर विरोधी आंदोलनों को प्रत्यक्ष-परोक्ष समर्थन देना भी अरविंद केजरीवाल की राजनीति को भारी पड़ी। सच कहूं तो सियासी शिल्पकार भाजपा ने दिल्ली के राजनीतिक दंश को दूर करने के लिए एक सुनियोजित रणनीति अपनाई, जिसमें हरियाणा से लेकर महाराष्ट्र तक के अनुभवों को पिरोया। किसी भी व्यक्ति को मुख्यमंत्री का चेहरा बनाने की जगह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम पर चुनाव लड़ना, वोट करना लोगों को अपील कर गया। वहीं, आप और कांग्रेस की तरह ही फ्रीबीज की बौछार करना भाजपा के लिए शुभ कारक रहा। क्योंकि लोगों ने मोदी की गारंटी को अहमियत दी। वहीं, बजट 2025-26 में मध्यम वर्ग को जो भारी कर राहत मिली, उससे बीजेपी के पक्ष में एक नई लहर पैदा हो गई। हालांकि, इस चुनाव में मध्यम वर्ग के मुद्दों पर प्रारम्भिक फोकस अरविंद केजरीवाल ने ही किया, लेकिन मतदान के ऐन मौके पर केंद्रीय बजट बाजीगरी दिखलाकर मोदी मैदान मार ले गए और आप हाथ मलती रह गई। दिल्ली की इस अप्रत्याशित जीत का फायदा एनडीए गठबंधन को बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में भी मिलेगा। वहीं, कांग्रेस यदि समझदारी दिखाकर इंडिया गठबंधन को पुनः मजबूत बनाती है तो वहां भी कांटे की टक्कर होगी, अन्यथा नहीं। क्योंकि वहां पर भी नवगठित जनसुराज पार्टी के मुखिया प्रशांत किशोर के रुख पर यह निर्भर करेगा कि एनडीए या इंडिया गठबंधन में किसका पलड़ा भारी होगा। 

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कला-संस्कृति राष्ट्रीय नदी प्राधिकरण का गठन हो।

राष्ट्रीय नदी प्राधिकरण का गठन हो।

रामाशीष   प्रकृति के पंचभूतों में से एक जल, जीवन की मूलभूत आवश्यकताओं में से एक परम आवश्यक अवयव है।  विज्ञान,प्रौद्योगिकी और औद्योगिक क्षेत्र के विकास और उन्नयन  हेतु जल एक अत्यावश्यक संसाधन है। समकालीन मानवीय प्रवृत्ति में जल की हर बूंद से धन बनाने का लोभ बढ़ता जा रहा है।  आज हमारी नदियों के सामने दो सबसे बड़ी चुनौतियां हैं: १. एक निर्मलता की, और २. अविरलता की।                                   ये दोनों एक दूसरे से संबद्ध हैं। अविरलता के अभाव में नदियों की निर्मलता संभव नहीं है । नदियां हमें पानी ही  नहीं देतीं अपितु वे हमारी समग्र जीवन प्रणाली की रीढ़  हैं।  जैव विविधता, मिट्टी-रेत , जल और अविरल प्रवाह ये सब मिल कर ही किसी नदी की गुणवत्ता निर्धारित करते हैं। नदी को स्वयं को साफ कर लेने का सामर्थ्य भी यही देते हैं। जितना महत्व प्राणियों के शरीर में ऑक्सीजन  का है, उतना ही नदी के लिए इन सूक्ष्म से लेकर विशाल धाराओं के जाल का है। जैव- विविधता नदियों के लिए प्राणवायु के समान है,जो इनके जल को शुद्ध करके ऑक्सीजन से भरते हैं इसलिए नदी में कम से कम इतना पानी हो कि हम कह सकें नदी में जीवटता  है, परंतु बिजली, सिंचाई, पेयजल और आबादियों को बाढ़ से बचाने के नाम पर नदियों के रास्तों और किनारों पर अनेक अवरोध खड़े कर दिए गए हैं जिससे  नदी में उचित न्यूनतम प्रवाह, जिसे पर्यावरणीय प्रवाह या ई-फ्लो कहते हैं, नहीं बचा है।  पर्यावरणीय प्रवाह के अभाव में नदी के स्वास्थ्य के लिए आवश्यक जलीय जीवों जैसे मछलियां, घड़ियाल, डॉलफिन आदि के साथ ही जलीय वनस्पति के जीवन पर खतरा  पैदा हो रहा है। राष्ट्रीय पर्यावरण अभियांत्रिकी अनुसंधान संस्थान (नीरी) ने 12 वर्षों के शोध के बाद अभी हाल में गंगाजल को विशिष्ट बनाने वाले तीन तत्व खोजे हैं जो अविरल बहती गंगा को स्वच्छ करते रहते हैं। पहला है गंगा के पानी में घुली प्रचुर ऑक्सीजन। यह प्रति लीटर 20 मिमी तक होती है। दूसरा  तत्व है गोमुख से हरिद्वार तक गंगा के मार्ग में पड़ने वाली वनस्पतियों से उत्पन्न रसायन टरपीन एवं तीसरा तत्व है दूषित जीवाणुओं को नष्ट करने वाला बैक्टीरियोफाज। ये तीनों तत्व गंगा की तलहटी में भारी मात्रा में मिले हैं। इन तत्त्वों के संपर्क में आकर पानी अपने आप निर्मल हो जाता है। प्रवाह धीमा होने और मार्ग में अवरोध होने से यह क्षमता कम होती जाती है।    …

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लेख बेटी नहीं बचाओगे, तो बहू कहाँ से लाओगे?

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 बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ कार्यक्रम ने बेटे को प्राथमिकता देने के मुद्दे पर सफलतापूर्वक जागरूकता बढ़ाई है, लेकिन अपर्याप्त कार्यान्वयन और निगरानी के कारण, यह…

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राजनीति आखिर दिल्ली में क्यों ढ़हा ‘आप’ का किला?

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– योगेश कुमार गोयलदिल्ली में आम आदमी पार्टी का किला बुरी तरह ढ़ह गया है। आतिशी को छोड़कर पार्टी के लगभग तमाम दिग्गज नेता चुनाव…

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राजनीति गिग वर्कर्स को पेंशन: सरकार की एक बड़ी और नायाब पहल!

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सुनील कुमार महला भारत सरकार ‘गिग वर्कर्स’ को एक बड़ा तोहफा देने जा रही है। पाठकों को बताता चलूं कि गिग वर्कर को एक ऐसे…

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राजनीति ‘आप’ का दिल्ली में अपराजेय होने का टूटा भ्रम

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डॉ. रमेश ठाकुर लोकतंत्र की चुनावी प्रक्रिया में जनता जर्नादन ही सर्वोपरि होती है पर ये बात एकाध बंपर जीत करने के बाद सियासी दल…

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राजनीति टल गया नीतीश कुमार के पाला बदलने का खतरा 

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कमलेश पांडेय दिल्ली विधानसभा चुनाव 2025 के दौरान भाजपा और कांग्रेस विरोधी क्षेत्रीय दलों ने जो पारस्परिक एकजुटता दिखाई, उससे भी यहां पिछले 12 वर्षों…

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राजनीति दिल्ली में भाजपा ने जीत की नई इबारत लिखी

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-ः ललित गर्ग:- दिल्ली में भारतीय जनता पार्टी विधानसभा चुनाव में ऐतिहासिक जीत दर्ज करते हुए न केवल 27 साल के वनवास को खत्म करने…

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राजनीति बांग्लादेशी घुसपैठिए और देश की राजधानी दिल्ली

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