महत्वपूर्ण लेख 370 पर विमर्श क्यों नहीं

370 पर विमर्श क्यों नहीं

-अरविंद जयतिलक- प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्यमंत्री जितेंद्र सिंह द्वारा अनुच्छेद 370 को समाप्त करने के बयान के बाद पर सियासत गरमा गयी है। जम्मू-कश्मीर के…

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व्यंग्य पार्क की महफिल में

पार्क की महफिल में

-विजय कुमार- बचपन में रामलीला देखने का चाव किसे नहीं होता ? हमारे गांव में भी जब रामलीला होती थी, तो हम शाम को ही…

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जन-जागरण हिंदी हैं हम वतन हैं…

हिंदी हैं हम वतन हैं…

– बी एन गोयल- नरेद्र मोदी के सन्दर्भ में हिंदी की पुनर्स्थापना ‘हिंदी हैं हम वतन हैं हिन्दुस्तां हमारा हम बुलबुले हैं इस की, यह…

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परिचर्चा धर्म, हिंसा और आतंक

धर्म, हिंसा और आतंक

-बीनू भटनागर- मैंने पुणे के एक युवक की पीट-पीट कर हत्या होने पर आक्रोश प्रकट किया, तो मुझे याद दिलाया गया कि कश्मीर से पंडितों…

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जरूर पढ़ें आप-कथा विसर्जन होत है

आप-कथा विसर्जन होत है

-डॉ. सुजाता मिश्रा- “कहीं की ईंट कहीं का रोड़ा, भानुमती ने कुनबा जोड़ा“ की तर्ज़ पर बनी आम आदमी पार्टी जितनी तेज़ी से ऊपर बढ़ी…

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प्रवक्ता न्यूज़ बलात्कार पर ‘तमाशबीन’ बना पुलिस तंत्र

बलात्कार पर ‘तमाशबीन’ बना पुलिस तंत्र

-रमेश पाण्डेय – दिल्ली में सामूहिक बलात्कार से संबंधित निर्भया मामले के बाद जन आक्रोश की अभूतपूर्व अभिव्यक्ति हुई थी। इसके बावजूद हवस में अंधे…

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कविता जगत मिलन

जगत मिलन

-मिलन सिन्हा- 1.जगत मिलन सख्त चेहरा था उसका पत्थर जैसा झांक कर देखा अंदर बच्चों सा दिल मोम सा पिघलने लगा संकल्प था उसके मन…

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परिचर्चा अनहोनी को होनी कर दे…!

अनहोनी को होनी कर दे…!

-तारकेश कुमार ओझा- तब मेहमानों के स्वागत में शरबत ही पेश किया जाता था। किसी के दरवाजे पहुंचने पर पानी के साथ चीनी या गुड़…

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आर्थिकी ‘वायदा’ के खेल पर रोक की जरूरत

‘वायदा’ के खेल पर रोक की जरूरत

-प्रमोद भार्गव- केंद्र की नई सरकार और उसके प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सामने सबसे बड़ी और मुंहबाए खड़ी चुनौती ‘महंगाई’ है। वैसे तो वैष्विक स्तर…

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व्यंग्य दुखराम बाबा

दुखराम बाबा

-विजय कुमार- शर्मा जी के मोहल्ले में संकटमोचन हनुमान जी का एक प्राचीन सिद्ध मंदिर है। वहां प्रायः कथा, कीर्तन और सत्संग होते रहते हैं।…

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परिचर्चा स्वयं को छलती, देश को ठगती कांग्रेस

स्वयं को छलती, देश को ठगती कांग्रेस

-दिनेश परमार- भारतीय राजनीति में जिस प्रकार की विकृति व विसंगति वर्तमान समय में उभर रही है वह ठिक तो कदापि नहीं, अव्यवहारिक व देश…

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लेख हिंदी साहित्य में बाजारवाद: चुनौतियां और समाधान

हिंदी साहित्य में बाजारवाद: चुनौतियां और समाधान

-डॉ. भगवान गव्हाडे- हिंदी साहित्येतिहास के हर काल में बाजार का वर्णन किसी न किसी रूप में होता रहा है । कबीर, सूर, तुलसी, मीरा…

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