राजनीति मोदी और मुसलमान

मोदी और मुसलमान

-फखरे आलम-  चुनाव से पूर्व की स्थिति दर्शा रही है कि अभी तक की रेस में नरेन्द्र मोदी अन्यों की अपेक्षा आगे हैं और लगभग…

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कविता रंग नहीं होली के रंगों में

रंग नहीं होली के रंगों में

-हिमकर श्याम-  फिर बौरायी मंजरियों के बीच कोयल कूकी, दिल में एक टीस उठी पागल भोरें मंडराने लगे, अधखिली कलियों के अधरों पर पलाश फूटे…

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व्यंग्य घुटन का मौसम

घुटन का मौसम

-विजय कुमार-  मौसम विज्ञानियों की बात यदि मानें, तो दुनिया भर में मुख्यत: तीन मौसम होते हैं। सर्दी, गर्मी और वर्षा। जहां तक भारत की…

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व्यंग्य चुनावी मौसम बड़ा सुहाना लगे

चुनावी मौसम बड़ा सुहाना लगे

-नजमून नवी खान-  प्रकति के बनाये हूये तीन मौसम हमें मिले जिन्हें हम सर्दी, गर्मी और बरसात के नाम से जानते हैं, इनके अलावा हम…

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वर्त-त्यौहार होलीः राक्षसी शक्तियों के दहन का पर्व

होलीः राक्षसी शक्तियों के दहन का पर्व

-प्रमोद भार्गव-  होली एक प्राचीन त्यौहार है। पौराणिक कथाओं के अनुसार मुख्य रूप से यह बुराई पर अच्छाई की विजय का पर्व है। भारत और…

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चुनाव भारतीय जनतंत्र का सबसे बड़ा उत्सव!

भारतीय जनतंत्र का सबसे बड़ा उत्सव!

-फखरे आलम-  भारतीय सभ्यता, संस्कृति और धर्म का सबसे बड़ा उत्साह, उल्लास और उत्सव जिस प्रकार से होली है। ठीक उसी प्रकार से भारतीय लोकतंत्र…

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राजनीति आरक्षण के भंवर में जाट!

आरक्षण के भंवर में जाट!

-दीपक कुमार-  जाट शब्द जुबान पर आते ही एक आम जन के दिमाग में ऐसी जाति की छवि बनती है, जिसमें एक अजीबोगरीब अल्हड़पन, शारीरिक…

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विविधा त्वरित न्याय के दायरे में माननीय

त्वरित न्याय के दायरे में माननीय

संदर्भः- सर्वोच्च न्यायालय ने दागी सांसद – विधायकों के मामलों में तय की समय सीमा -प्रमोद भार्गव-  विधायिका जब राजनीतिक कुनबों के दागियों पर अंकुश…

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चुनाव जाट आरक्षण के घोड़े पर कांग्रेस

जाट आरक्षण के घोड़े पर कांग्रेस

-अरविंद जयतिलक-  आमचुनाव सिर पर देख कांग्रेसनीत यूपीए सरकार की कैबिनेट ने आखिरकार जाट आरक्षण पर मुहर लगा ही दी। इससे उत्तर प्रदेश, हरियाणा, हिमाचल…

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चिंतन मुआवजे के बदले अपमान क्यों? जबकि है अपमानकारी मुआवजे का स्थायी समाधान!

मुआवजे के बदले अपमान क्यों? जबकि है अपमानकारी मुआवजे का स्थायी समाधान!

-डॉ. पुरुषोत्तम मीणा ‘निरंकुश’-  बलात्कारित स्त्री और मृतक की विधवा, बेटी या अन्य परिजनों को लोक सेवकों के आगे एक बार नहीं बार-बार न मात्र…

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कविता भोलाराम का प्रजातंत्र

भोलाराम का प्रजातंत्र

-प्रभुदयाल श्रीवास्तव-  जब पवित्र पावक मनमोहक‌ दिन चुनाव का आता है भोलाराम निकलकर घर से वोट डालने जाता है| किसे चुने या किसे वोट दें…

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व्यंग्य योग्य उम्मीदवार

योग्य उम्मीदवार

-प्रभुदयाल श्रीवास्तव-  चुनाव सिर पर थे और योग्य उम्मीदवारों के चयन की प्रक्रिया आरंभ हो चुकी थी। सभी राजनैतिक दल एक दूसरे को पटकनी देने…

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