आखिर क्या है बिहार सरकार की नक्सल-नीति ?
Updated: February 6, 2014
-आलोक कुमार- बिहार की सरकार काफी समय तक नक्सलवाद को कानून और व्यवस्था की समस्या कह कर इसकी भयावहता का सही अंदाजा लगाने में…
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मेरठ, महर्षि दयानंद और मोदी
Updated: February 6, 2014
मेरठ का भारत के इतिहास में महत्वपूर्ण स्थान रहा है। यह क्षेत्र कुरूवंशी राजधानी हस्तिनापुर से ध्वंसावशेषों के पास ही बसा है। महाभारत की साक्षी…
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मेरे क़ातिल कोई और नहीं मेरे साथी निकले
Updated: February 6, 2014
-बदरे आलम खां- मेरे क़ातिल कोई और नहीं मेरे साथी निकले मेरे जनाजे के साथ बनकर वो बाराती निकले रिश्तेदारों ने भी रिस्ता तोड़…
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भरत के अल्पसंख्यक वंशज
Updated: February 7, 2014
-विजय कुमार- पिछले दिनों हिन्दुओं की सशक्त आर्थिक भुजा (जैन समाज) को केन्द्र सरकार ने ‘अल्पसंख्यक’ घोषित किया है। इससे पूर्व भारत की…
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कह-मुकरी को काव्य की मुख्यधारा में लाना है
Updated: February 5, 2014
‘कह मुकरी’ काव्य की एक ऐसी विधा है जिसका अस्तित्व भारतेंदु युग की समाप्ति और द्विवेदी युग के आरम्भ के साथ ही लुप्तप्राय हो गया…
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देखा मैंने राजधानी में
Updated: February 5, 2014
-मिलन सिन्हा – देखा मैंने राजधानी में आलीशान इमारतों का काफिला और बगल में झुग्गी झोपड़ियों की बस्ती जैसे अमीरी-गरीबी रहते साथ-साथ दो अलग-अलग दुनिया…
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क्या, हमारा नामोऽनिशां मिट जाएगा
Updated: February 5, 2014
-डॉ. मधुसूदन – कुटुम्ब संस्था की समाप्ति ही, यूनान और रोम की संस्कृतियां मिटाने का एक मूल (?) कारण माना जाता है। यदि हम…
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छोटे दलों का बड़ा सियासी मंसूबा
Updated: February 5, 2014
-एम. अफसर खां सागर- हम तो दरिया हैं हमें अपना हुनर मालूम है, जिस तरफ भी चल पड़ेंगे रास्ता हो जाएगा। कुछ इसी हौंसले…
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एमपी अजब है, लोग गजब हैं
Updated: February 5, 2014
एमपी वाकई में कई मामलों में अजब-गजब हैं, अजब इस मामले में कि शिवराज के करिश्माई मार्गदर्शन में किन्तु-परन्तु के बीच विपक्ष को औंधे मुंह गिरा। तीसरी बार पहले से ज्यादा सुदृढ़ होकर उभरी हैं, दूसरा विकास दर, सूचना तकनीकी, पर्यटन,लोकसेवा गारंटी, लाड़ली लक्ष्मी एवं अन्य योजनाओं में न केवल राज्य बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी कई पुरस्कार भी अपनी झोली में डाले। एक बात तो निर्विवाद रूप से कटु सत्य है जो सभी को स्वीकार्य भी है कि ‘‘मध्य प्रदेश में विकास’’ तो हुआ है। तीसरा विपक्ष के मुंह को ऐसा सिला दिया कि विरोध के शब्द तक ठीक से नहीं फूट सकें, उलट तेजतर्रारों को अपनी ही पार्टी की सदस्यता दिला गाल पर तमाचा मारा सो अलग, रहा सवाल कांग्रेस के निष्ठावान कार्यकर्ताओं का तो उन्हें उन्हीं के सेना नायकों द्वारा कुचला जा रहा है। गजब इस मामले में कि यहां चपरासी से लेकर अधिकारियों, मंत्रियों की तो बात ही नहीं है। सभी करोड़पति हैं, बिना नाखून के लोकायुक्त की दाद देनी होगी जिसे सरकार भ्रष्टों के खिलाफ चालन की अनुमति नहीं दे रही है, फिर वह घड़ाधड़ छापामार कार्यवाही में जुटा हुआ है। यहां यक्ष प्रश्न उठता है कि कौन कहता है कि ‘‘मप्र गरीब हैं’’ दूसरा मंत्रियों एवं अधिकारियों के खिलाफ लोकायुक्त में…
Read moreकैसी पीड़ा
Updated: February 5, 2014
उनके खुलने से जो पर्दा सरका था उनकी आंखों से सबसे पहले घुप्प अंधेरा डोल रहा था आंखों में और यहीं समझी थी जीवन का…
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अंतर्राष्ट्रीय दबाब का सामना करने के लिए केंद्र में पूर्ण बहुमत आवश्यक
Updated: February 5, 2014
-कन्हैया झा- सन 1990 से पहले कांग्रेस पार्टी की सरकार ने देश पर एक-छत्र राज्य किया था. 90 के दशक से अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर…
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सचिन के साथ ध्यानचंद क्यों नहीं ?
Updated: February 4, 2014
-प्रवीण दुबे- क्रिकेट के भगवान कहे जाने वाले सचिन तेंदुलकर को भारत रत्न से अलंकृत करके सरकार ने सराहनीय कार्य किया है, इससे…
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