प्रवक्ता की गोष्ठी से जनसंवाद पर आम सहमति बनी!
Updated: October 28, 2013
इक़बाल हिंदुस्तानी प्रवक्ता डॉटकॉम की स्थापना के पांच साल पूरे होने पर 16 लेखकों का सम्मान समारोह और ‘‘न्यू मीडिया और जनसंवाद’’ पर विचार गोष्ठी…
Read more
चुनावी हिसाब में पारदर्शिता से परहेज
Updated: October 28, 2013
प्रमोद भार्गव आखिरकार राजनीतिक दलों ने चंदे के हिसाब किताब में पारदर्शिता लाने वाले निर्वाचन आयोग के प्रस्ताव को ठोकर मार दी। राष्ट्रीय दलों में…
Read more
हारेंगे या हरायेंगे !
Updated: October 26, 2013
अनिल सौमित्र बात अजीब-सी है, लेकिन सच है. मामला मध्यप्रदेश भाजपा से सम्बन्धित है. विधानसभा चुनाव के महज तीन हफ्ते ही बचे हैं. लेकिन पार्टी…
Read more
महंगाई के कारण यह भी हैं!
Updated: October 28, 2013
भारत में पिछली शताब्दी के प्रारम्भ से ही अनाज के व्यापार में आढती शामिल हो गए थे. फसल आने से पहले ही ये किसानो से…
Read more
दूसरी बीवी को गुजारा भत्ता, सुप्रीम कोर्ट का बहुपत्नीवादी निर्णय
Updated: October 28, 2013
अधिकतर स्त्रियों को वास्तव में इस बात का ज्ञान होता है कि वे जिस पुरुष से विवाह रचाने जा रही हैं, वह पहले से ही…
Read more
राहुल गांधी द्वारा करूणा रस पैदा करने के असफल प्रयास
Updated: October 28, 2013
डॉ. कुलदीप चंद अग्निहोत्री इधर राहुल गांधी ने भी देश भर में घूमना शुरू कर दिया है। राजस्थान से लेकर गुवाहाटी तक सब जगह जिज्ञासा…
Read more
खेल प्रशासन में गड़बड़ियों के निहितार्थ
Updated: October 28, 2013
भारत में खेलों के प्रशासन में जो गड़बडि़यां हैं, वे गाहे-बगाहे सामने आती रहती हैं। कई मामले ऐसे भी आए हैं जिनमें खिलाडि़यों को अपने…
Read more
एक और सीक्वल
Updated: October 26, 2013
ये मेरा तीसरा सीक्वल है। सबसे पहले मैंने एक गंभीर विषय पर लेख लिखा था ‘हिन्दी किसकी है?’ उसका सीक्वल था ‘‘हिन्दी सबकी है’’।‘’कवि और…
Read more
नवाज से शराफत की उम्मीद बेवकूफी है
Updated: October 26, 2013
सिद्धार्थ मिश्र “स्वतंत्र” उदारता और मूर्खता में बहुत बड़ा अंतर होता है । ये सामान्य सा तथ्य है जिससे शायद देश का आम आदमी भी…
Read more
भारतीय-संस्कृति में समाज, राष्ट्र और मानवाधिकार
Updated: October 26, 2013
राकेश कुमार आर्य अमेरिका ब्रिटेन और फ्रांस जैसे विकसित राष्ट्रों सहित विदेशों में भारतीय संस्कृति के प्रति लोगों का आकर्षण अप्रत्याशित रूप से बढ़ रहा…
Read more
एक थे मन्ना डे
Updated: October 26, 2013
कौन कहता है कि मन्ना डे अब नहीं रहे? उनकी सुरीली आवाज़ फ़िजाओं में अनन्त काल तक तैरती रहेगी। बेशक उन्हें उनके समकालीन गायक मुकेश,…
Read more
‘काश! इतिहास हमारे अवगुणों में भी ‘इतिहास’ खोजता’
Updated: October 25, 2013
मनुष्य के वैभव काल में उसके ‘सदगुण’ उसकी ढाल बनते हैं, जो हर प्रकार की आपदा से उसकी रक्षा करते हैं। परंतु पराभव काल में…
Read more