मीडिया प्रवक्ता की गोष्ठी से जनसंवाद पर आम सहमति बनी!

प्रवक्ता की गोष्ठी से जनसंवाद पर आम सहमति बनी!

इक़बाल हिंदुस्तानी प्रवक्ता डॉटकॉम की स्थापना के पांच साल पूरे होने पर 16 लेखकों का सम्मान समारोह और ‘‘न्यू मीडिया और जनसंवाद’’ पर विचार गोष्ठी…

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राजनीति चुनावी हिसाब में पारदर्शिता से परहेज

चुनावी हिसाब में पारदर्शिता से परहेज

प्रमोद भार्गव आखिरकार राजनीतिक दलों ने चंदे के हिसाब किताब में पारदर्शिता लाने वाले निर्वाचन आयोग के प्रस्ताव को ठोकर मार दी। राष्ट्रीय दलों में…

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राजनीति हारेंगे या हरायेंगे !

हारेंगे या हरायेंगे !

अनिल सौमित्र बात अजीब-सी है, लेकिन सच है. मामला मध्यप्रदेश भाजपा से सम्बन्धित है. विधानसभा चुनाव के महज तीन हफ्ते ही बचे हैं. लेकिन पार्टी…

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आर्थिकी महंगाई के कारण यह भी हैं!

महंगाई के कारण यह भी हैं!

भारत में पिछली शताब्दी के प्रारम्भ से ही अनाज के व्यापार में आढती शामिल हो गए थे. फसल आने से पहले ही ये किसानो से…

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महिला-जगत दूसरी बीवी को गुजारा भत्ता, सुप्रीम कोर्ट का बहुपत्नीवादी निर्णय

दूसरी बीवी को गुजारा भत्ता, सुप्रीम कोर्ट का बहुपत्नीवादी निर्णय

अधिकतर स्त्रियों को वास्तव में इस बात का ज्ञान होता है कि वे जिस पुरुष से विवाह रचाने जा रही हैं, वह पहले से ही…

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राजनीति राहुल गांधी द्वारा करूणा रस पैदा करने के असफल प्रयास

राहुल गांधी द्वारा करूणा रस पैदा करने के असफल प्रयास

डॉ. कुलदीप चंद अग्निहोत्री इधर राहुल गांधी ने भी देश भर में घूमना शुरू कर दिया है। राजस्थान से लेकर गुवाहाटी तक सब जगह जिज्ञासा…

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खेल जगत खेल  प्रशासन में गड़बड़ियों के निहितार्थ

खेल प्रशासन में गड़बड़ियों के निहितार्थ

भारत में खेलों के प्रशासन में जो गड़बडि़यां हैं, वे गाहे-बगाहे सामने आती रहती हैं। कई मामले ऐसे भी आए हैं जिनमें खिलाडि़यों को अपने…

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व्यंग्य एक और सीक्वल

एक और सीक्वल

ये मेरा तीसरा सीक्वल है। सबसे पहले मैंने एक गंभीर विषय पर लेख लिखा था ‘हिन्दी किसकी है?’ उसका सीक्वल था ‘‘हिन्दी सबकी है’’।‘’कवि और…

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राजनीति नवाज से शराफत की उम्‍मीद बेवकूफी है

नवाज से शराफत की उम्‍मीद बेवकूफी है

सिद्धार्थ मिश्र “स्‍वतंत्र” उदारता और मूर्खता में बहुत बड़ा अंतर होता है । ये सामान्‍य सा तथ्‍य है जिससे शायद देश का आम आदमी भी…

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महत्वपूर्ण लेख भारतीय-संस्कृति में समाज, राष्ट्र और मानवाधिकार

भारतीय-संस्कृति में समाज, राष्ट्र और मानवाधिकार

राकेश कुमार आर्य अमेरिका ब्रिटेन और फ्रांस जैसे विकसित राष्ट्रों सहित विदेशों में भारतीय संस्कृति के प्रति लोगों का आकर्षण अप्रत्याशित रूप से बढ़ रहा…

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सिनेमा एक थे मन्ना डे

एक थे मन्ना डे

कौन कहता है कि मन्ना डे अब नहीं रहे? उनकी सुरीली आवाज़ फ़िजाओं में अनन्त काल तक तैरती रहेगी। बेशक उन्हें उनके समकालीन गायक मुकेश,…

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महत्वपूर्ण लेख ‘काश! इतिहास हमारे अवगुणों में भी ‘इतिहास’ खोजता’

‘काश! इतिहास हमारे अवगुणों में भी ‘इतिहास’ खोजता’

मनुष्य के वैभव काल में उसके ‘सदगुण’ उसकी ढाल बनते हैं, जो हर प्रकार की आपदा से उसकी रक्षा करते हैं। परंतु पराभव काल में…

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