इतिहास के मिथक तोड़ती तकनीक
Updated: October 10, 2013
प्रमोद भार्गव विज्ञान सम्मत कोर्इ भी नर्इ मान्यता वर्तमान मान्यता के खण्डन के दृष्टिगत असितत्व में लार्इ जाती है। नर्इ मान्यता का उत्सर्जन पहली मान्यता…
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छत्तीसगढ़ को फिर चाहिए रमन
Updated: October 10, 2013
डॉ. मयंक चतुर्वेदी विकास, विकास और विकास देश में आज यह तस्वीर बनी है छत्तीसगढ़ राज्य की। एक छोटा प्रदेश कम संसाधन और क्षेत्रफल…
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दास्तान-ए-सुविधा शुल्क
Updated: October 10, 2013
एम. अफसर खां सागर शर्मा जी को हमे शा कसक रहता कि वे सरकारी मुलाजिम न हुए। जब भी हमारे यहां उनकी आमद होती, बस…
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भारती का भाल
Updated: October 10, 2013
भारती के भाल को लज्जा रहा है देश क्यों ? बेटों के शिश मुण्ड को देख कर भी चुप है क्यों ? क्यों मुख अब…
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नारी – आत्मा और छाया के मध्य
Updated: October 10, 2013
युगों युगों की भारतीय संस्कृति जिसमें हर पीढी को ‘’ जहां नारी का वास होता है वहां देवता विराजते है ’’ पढाये जाने के बावजूद…
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कांशीराम के सपनों का समाज
Updated: October 10, 2013
अरविंद जयतिलक सैकड़ों साल बाद भारतीय समाज का स्वरुप, चरित्र एवं चिंतन की व्याख्या का दायरा और उसके मूल्यों को मापने व परखने का मापदण्ड…
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जनता का पैसा
Updated: October 10, 2013
भारत सरकार पर जनता के पैसे को खर्च करने की जिम्मेवारी होती है, जिसे वह अनेक प्रकार के टैक्स के रूप में जनता से वसूल…
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चुनावी दंगल में कौन कितने पानी में
Updated: October 10, 2013
सुरेश हिन्दुस्थानी पाँच राज्यों में होने जा रहे विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक दलों ने अपनी अपनी तैयारियां प्रारम्भ कर दी हैं। हालांकि जिन राज्यों…
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दागियों के अरमानों पर कुठाराघात
Updated: October 10, 2013
प्रमोद भार्गव राहुल गांघी की बुलंदी ने आखिरकार दागियों के अरमानों पर पानी फेर दिया। लालू प्रसाद यादव ऐसे पहले कद्रदावर नेता होंगे,जिनके राजनीतिक…
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‘प्रवक्ता’ के पाँच वर्ष / आर. सिंह
Updated: October 10, 2013
मैंने ख़तना कहानी लिखी थी,पर मुझे शक था कि इसे ‘प्रवक्ता डॉट कॉम ‘ में जगह मिलेगी, क्योंकि कहानी एक ऐसे यथार्थ की ओर इंगित…
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निःस्वार्थ और अव्यावसायिक संकल्प को सफलता के साथ बनाए रखा ‘प्रवक्ता’ ने
Updated: October 10, 2013
शब्द मानवीय उद्विकास के महानतम अनुसंधान हैं। परिवार से लेकर समाज तक और कला से लेकर विज्ञान तक मानवता के भव्य महल की प्रत्येक दीवार…
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पाठकों और लेखकों के मन में प्रवक्ता के प्रति एक “साफ्ट-कार्नर” हमेशा रहा है / सुरेश चिपलूनकर
Updated: October 10, 2013
बात उन दिनों की है, जब मैं ब्लॉगिंग में अति-सक्रिय था अर्थात २००७. भाई संजीव सिन्हा अपने ब्लॉग “हितचिन्तक” पर सक्रिय थे. जैसा कि हमेशा…
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