जन-जागरण इतिहास के मिथक तोड़ती तकनीक

इतिहास के मिथक तोड़ती तकनीक

प्रमोद भार्गव विज्ञान सम्मत कोर्इ भी नर्इ मान्यता वर्तमान मान्यता के खण्डन के दृष्टिगत असितत्व में लार्इ जाती है। नर्इ मान्यता का उत्सर्जन पहली मान्यता…

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राजनीति छत्तीसगढ़ को फिर चाहिए रमन

छत्तीसगढ़ को फिर चाहिए रमन

डॉ. मयंक चतुर्वेदी   विकास, विकास और विकास देश में आज यह तस्वीर बनी है छत्तीसगढ़ राज्य की। एक छोटा प्रदेश कम संसाधन और क्षेत्रफल…

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व्यंग्य दास्तान-ए-सुविधा शुल्क

दास्तान-ए-सुविधा शुल्क

एम. अफसर खां सागर शर्मा जी को हमे शा कसक रहता कि वे सरकारी मुलाजिम न हुए। जब भी हमारे यहां उनकी आमद होती, बस…

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कविता भारती का भाल

भारती का भाल

भारती के भाल को लज्‍जा रहा है देश क्‍यों ? बेटों के शिश मुण्‍ड को देख कर भी चुप है क्‍यों ? क्‍यों मुख अब…

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महिला-जगत नारी – आत्‍मा और छाया के मध्‍य

नारी – आत्‍मा और छाया के मध्‍य

युगों युगों की भारतीय संस्‍कृति जिसमें हर पीढी को ‘’ जहां नारी का वास होता है वहां देवता विराजते है ’’ पढाये जाने के बावजूद…

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शख्सियत कांशीराम के सपनों का समाज

कांशीराम के सपनों का समाज

अरविंद जयतिलक सैकड़ों साल बाद भारतीय समाज का स्वरुप, चरित्र एवं चिंतन की व्याख्या का दायरा और उसके मूल्यों को मापने व परखने का मापदण्ड…

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विविधा जनता का पैसा

जनता का पैसा

भारत सरकार पर जनता के पैसे को खर्च करने की जिम्मेवारी होती है, जिसे वह अनेक प्रकार के टैक्स के रूप में जनता से वसूल…

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राजनीति चुनावी दंगल में कौन कितने पानी में

चुनावी दंगल में कौन कितने पानी में

सुरेश हिन्दुस्थानी पाँच राज्यों में होने जा रहे विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक दलों ने अपनी अपनी तैयारियां प्रारम्भ कर दी हैं। हालांकि जिन राज्यों…

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राजनीति दागियों के अरमानों पर कुठाराघात

दागियों के अरमानों पर कुठाराघात

प्रमोद भार्गव   राहुल गांघी की बुलंदी ने आखिरकार दागियों के अरमानों पर पानी फेर दिया। लालू प्रसाद यादव ऐसे पहले कद्रदावर नेता होंगे,जिनके राजनीतिक…

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मीडिया ‘प्रवक्ता’ के पाँच वर्ष /  आर. सिंह

‘प्रवक्ता’ के पाँच वर्ष / आर. सिंह

मैंने ख़तना कहानी लिखी थी,पर मुझे शक था कि इसे ‘प्रवक्ता डॉट कॉम ‘ में जगह मिलेगी, क्योंकि कहानी एक ऐसे यथार्थ की ओर इंगित…

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मीडिया निःस्वार्थ और अव्यावसायिक संकल्प को सफलता के साथ बनाए रखा ‘प्रवक्‍ता’ ने

निःस्वार्थ और अव्यावसायिक संकल्प को सफलता के साथ बनाए रखा ‘प्रवक्‍ता’ ने

शब्द मानवीय उद्विकास के महानतम अनुसंधान हैं। परिवार से लेकर समाज तक और कला से लेकर विज्ञान तक मानवता के भव्य महल की प्रत्येक दीवार…

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मीडिया पाठकों और लेखकों के मन में प्रवक्ता के प्रति एक “साफ्ट-कार्नर” हमेशा रहा है / सुरेश चिपलूनकर

पाठकों और लेखकों के मन में प्रवक्ता के प्रति एक “साफ्ट-कार्नर” हमेशा रहा है / सुरेश चिपलूनकर

बात उन दिनों की है, जब मैं ब्लॉगिंग में अति-सक्रिय था अर्थात २००७. भाई संजीव सिन्हा अपने ब्लॉग “हितचिन्तक” पर सक्रिय थे. जैसा कि हमेशा…

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