यह सरकारी अस्पताल है जनाब!
Updated: January 5, 2013
दीपिका कुमारी सेहत प्रकृति का दिया अनमोल उपहार है। कहा भी यही जाता है कि एक स्वस्थ व्यक्ति ही स्वस्थ समाज और एक स्वस्थ समाज…
Read moreनशे के शिकंजे में छत्तीसगढ़ का आदिवासी समाज
Updated: January 5, 2013
गिरजा मानकर बीते साल केंद्र सरकार की अनुशंसा के बाद कई राज्यों ने गुटखा पर प्रतिबंध लगा दिया है। क्योंकि इसके सेवन से आम आदमी…
Read moreबाल विवाह का संक्रमण जारी है
Updated: January 5, 2013
सुप्रिया साहू छह साल की पारूल (बदला हुआ नाम) के लिए खुशी का ठिकाना नहीं था। क्योंकि उसका घर और वह दुल्हन की तरह सजी…
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अरब वसंतागम के विकट सूर
Updated: January 2, 2013
इस्लामी सियासी जगत् में जनतंत्र के लिए कोई स्थान नहीं. कुछ अपवाद हो सकते है; लेकिन नियम इस्लामी सत्ता और जनतांत्रिक व्यवस्था की दुश्मनी का…
Read moreदामिनी तुम देश की बेटी बन गयी हो।
Updated: January 2, 2013
राकेश कुमार आर्य दामिनी तुम देश की बेटी बन गयी हो। दुष्टाचारी पापाचारी के सामने तन गयी हो।। तुम्हारे नाम से बहुत सी बहनों…
Read moreमातृसत्ताक समाज और ‘वोल्गा से गंगा’– सारदा बनर्जी
Updated: January 2, 2013
राहुल सांकृत्यायन की कृति ‘वोल्गा से गंगा’ मातृसत्ताक समाज में स्त्री वर्चस्व और स्त्री सम्मान को व्यक्त करने वाली बेजोड़ रचना है। इस रचना में…
Read more2013 की चिंता और चुनौतियां
Updated: January 2, 2013
डॉ. आशीष वशिष्ठ बनने-बिगडऩे के ढेरों कारनामें अपने दामन में समेटकर 2012 भारी जनाक्रोश, आंदोलन और लोकतंत्र के चारों खंभों को हिलाकर विदा हो…
Read moreछक्का
Updated: January 2, 2013
प्रभुदयाल श्रीवास्तव “दादाजी मैं छक्का मारूंगा”अमित ने क्रिकेट बेट लहराते हुये मुझसे कहा|वह एक हाथ में बाल लिये था”,बोला प्लीज़ बाँलिंग करो न दादाजी|” “अरे!…
Read moreबाल कहानी – कीरत तीरथ
Updated: January 2, 2013
प्रभुदयाल श्रीवास्तव धरमपुरा रियासत के एक गांव में कीरत तीरथ नाम के दो सगे भाई रहते थे। किसी गंभीर बीमारी के चलते उनके पिता मल्थूराम…
Read moreविडंबनाओं के देश में स्त्री-सुरक्षा..
Updated: January 2, 2013
अरुण कान्त शुक्ला दुनिया के किसी भी देश में रहने वाले इतनी विडंबनाओं के साथ नहीं जीते, जितनी विडंबनाओं के साथ हमें भारत में जीना…
Read moreलापरवाह नागरिक बनाना चाहते हैं आदर्श राष्ट्र
Updated: January 2, 2013
एक से अधिक व्यक्तियों के जुड़ने से एक परिवार बनता है, परिवारों के मिलने से मोहल्ला, नगर और समाज का निर्माण का होता है। इसी…
Read moreदामिनी कह गई- अब सोना नहीं
Updated: January 2, 2013
लोकेन्द्र सिंह राजपूत दु:खद, बेहद दु:खद २०१३ का आखिरी शनिवार। दामिनी चली गई। हमेशा के लिए इस बेदर्द दिल्ली से। बेहया दुनिया से, जहां उसे…
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