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यह सरकारी अस्पताल है जनाब!

दीपिका कुमारी  सेहत प्रकृति का दिया अनमोल उपहार है। कहा भी यही जाता है कि एक स्वस्थ व्यक्ति ही स्वस्थ समाज और एक स्वस्थ समाज…

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नशे के शिकंजे में छत्तीसगढ़ का आदिवासी समाज

गिरजा मानकर बीते साल केंद्र सरकार की अनुशंसा के बाद कई राज्यों ने गुटखा पर प्रतिबंध लगा दिया है। क्योंकि इसके सेवन से आम आदमी…

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समाज Default Post Thumbnail

बाल विवाह का संक्रमण जारी है

सुप्रिया साहू छह साल की पारूल (बदला हुआ नाम) के लिए खुशी का ठिकाना नहीं था। क्योंकि उसका घर और वह दुल्हन की तरह सजी…

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विश्ववार्ता अरब वसंतागम के विकट सूर

अरब वसंतागम के विकट सूर

इस्लामी सियासी जगत् में जनतंत्र के लिए कोई स्थान नहीं. कुछ अपवाद हो सकते है; लेकिन नियम इस्लामी सत्ता और जनतांत्रिक व्यवस्था की दुश्मनी का…

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कविता Default Post Thumbnail

दामिनी तुम देश की बेटी बन गयी हो।

राकेश कुमार आर्य दामिनी तुम देश की बेटी बन गयी हो। दुष्टाचारी पापाचारी के सामने तन गयी हो।।   तुम्हारे नाम से बहुत सी बहनों…

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पुस्तक समीक्षा Default Post Thumbnail

मातृसत्ताक समाज और ‘वोल्गा से गंगा’– सारदा बनर्जी

राहुल सांकृत्यायन की कृति ‘वोल्गा से गंगा’ मातृसत्ताक समाज में स्त्री वर्चस्व और स्त्री सम्मान को व्यक्त करने वाली बेजोड़ रचना है। इस रचना में…

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आर्थिकी Default Post Thumbnail

2013 की चिंता और चुनौतियां

  डॉ. आशीष वशिष्ठ बनने-बिगडऩे के ढेरों कारनामें अपने दामन में समेटकर 2012 भारी जनाक्रोश, आंदोलन और लोकतंत्र के चारों खंभों को हिलाकर विदा हो…

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बच्चों का पन्ना Default Post Thumbnail

छक्का

प्रभुदयाल श्रीवास्तव “दादाजी मैं छक्का मारूंगा”अमित ने क्रिकेट बेट लहराते हुये मुझसे कहा|वह एक हाथ में बाल लिये था”,बोला प्लीज़ बाँलिंग करो न दादाजी|” “अरे!…

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बाल कहानी – कीरत तीरथ

प्रभुदयाल श्रीवास्तव धरमपुरा रियासत के एक गांव में कीरत तीरथ नाम के दो सगे भाई रहते थे। किसी गंभीर बीमारी के चलते उनके पिता मल्थूराम…

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चिंतन Default Post Thumbnail

विडंबनाओं के देश में स्त्री-सुरक्षा..

अरुण कान्त शुक्ला दुनिया के किसी भी देश में रहने वाले इतनी विडंबनाओं के साथ नहीं जीते, जितनी विडंबनाओं के साथ हमें भारत में जीना…

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चिंतन Default Post Thumbnail

लापरवाह नागरिक बनाना चाहते हैं आदर्श राष्ट्र

एक से अधिक व्यक्तियों के जुड़ने से एक परिवार बनता है, परिवारों के मिलने से मोहल्ला, नगर और समाज का निर्माण का होता है। इसी…

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जन-जागरण Default Post Thumbnail

दामिनी कह गई- अब सोना नहीं

लोकेन्द्र सिंह राजपूत दु:खद, बेहद दु:खद २०१३ का आखिरी शनिवार। दामिनी चली गई। हमेशा के लिए इस बेदर्द दिल्ली से। बेहया दुनिया से, जहां उसे…

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