गजल प्यार है लाज़िमी ज़िंदगी के लिये…..

प्यार है लाज़िमी ज़िंदगी के लिये…..

इक़बाल हिंदुस्तानी तुमने उनको चुना रहबरी के लिये, वो जो मशहूर हैं रहज़नी के लिये।   सिर्फ जज़्बातो ताक़त ही काफी नहीं, हौंसला चाहिये दुश्मनी…

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कविता सम्प्रेषण और भंगिमाएं

सम्प्रेषण और भंगिमाएं

सम्प्रेषण और भंगिमाएं दोनों की सीमाओं पर सतत निरंतर आँखों का सदा ही बना रहना और पता चल जानें से लेकर प्रकट हो जानें तक…

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राजनीति येदि के बिना भी भाजपा लगाएगी सीटो की शतक

येदि के बिना भी भाजपा लगाएगी सीटो की शतक

संजय swadesh राजनीति के समझदार कह रहे हैं कि येदियुरप्पा के भाजपा से जाने के बाद पार्टी को करारा झटका मिलेगा, लेकिन फिलहाल ऐसा कुछ…

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महत्वपूर्ण लेख मॅक्स मूलर का पत्र और संस्कृत की प्रेरणा -डॉ. मधुसूदन

मॅक्स मूलर का पत्र और संस्कृत की प्रेरणा -डॉ. मधुसूदन

मॅक्स मूलर ने, I C S ( Indian Civil Service) की परीक्षा के हेतु तैय्यार होने वाले युवाओं के सामने १८८० के आस पास, केम्ब्रिज…

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आर्थिकी एफडीआई के दूरगामी परिणाम बेहद घातक

एफडीआई के दूरगामी परिणाम बेहद घातक

बीपी गौतम विदेशी निवेश संवर्धन बोर्ड (एफडीआई) देश भर में चर्चा का विषय बना हुआ है, लेकिन आम आदमी एफडीआई के बारे में इतना सब…

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कविता कविता – उम्र का हिसाब

कविता – उम्र का हिसाब

कितने बदल चुके हैं सिकुड़े हुए अंतरिक्ष में मौन तिलक लगाकर मेहराब से टूटता कोई पत्थर कि युगों पुराना अदृश्य हाथ पसीने से सरोबार होकर…

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कविता जो कह चूका गीत उसे भी न भूल जाओ

जो कह चूका गीत उसे भी न भूल जाओ

तुम्हे मेरे सपनो में अब भी देखा करता हूँ कभी भी यहाँ वहाँ पहले की ही तरह अब भी भटका करता हूँ .. नहीं होते…

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कविता लाखो घर बर्बाद हो गये इस दहेज़ की बोली में ,

लाखो घर बर्बाद हो गये इस दहेज़ की बोली में ,

लाखो घर बर्बाद हो गये इस दहेज़ की बोली में , अर्थी चड़ी बहुत कन्याये बैठ न पाई डोली में , कितनो ने अपनी कन्यायो…

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राजनीति मोदी प्रधानमंत्री नहीं तो मुलायम आखिर क्यों?

मोदी प्रधानमंत्री नहीं तो मुलायम आखिर क्यों?

सिद्धार्थ शंकर गौतम आम चुनाव में भले ही अभी पर्याप्त समय बचा हो किन्तु देश के भावी प्रधानमंत्री हेतु दर्जन भर नाम राजनीतिक हलकों में…

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विविधा आखिर कितनी लड़ाईयां और लड़नी पडे़ंगीं जन्मभूमि के लिए ?

आखिर कितनी लड़ाईयां और लड़नी पडे़ंगीं जन्मभूमि के लिए ?

विनोद बंसल हमारे ऋषियों मनीषियों ने माता व मातृभूमि को स्वर्ग के समान संज्ञा देते हुए सर्वोच्च माना है। ’’जननी जन्म भूमिश्च, स्वर्गादपि गरीयसी‘‘ इस…

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विविधा भाषा की टूटती मर्यादाएं-अरविंद जयतिलक

भाषा की टूटती मर्यादाएं-अरविंद जयतिलक

नैतिकता के उच्च आदर्शों का परखा जाना कभी खत्म नहीं होता। लेकिन बात जब सियासतदानों पर आ टिकती है तो सब कुछ बेमानी हो जाता…

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विविधा वी वांट मोर योर ऑनर

वी वांट मोर योर ऑनर

श्रीराम तिवारी इन दिनों जबकि सत्तासीन राजनीतिक गठबंधन और विपक्ष के सभी दल देश की जनता के कष्ट दूर करने के बजाय उसके बहाने एक-…

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