आरक्षण का दांव
Updated: September 6, 2012
हिमकर श्याम कोयले की आग में जल रही केंद्र सरकार ने तरक्की में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजातियों को आरक्षण का ऐलान कर एक बड़ा…
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प्रधानमन्त्री की चुप्पी दे रही कई सवालों को जन्म
Updated: September 6, 2012
लोकतांत्रिक, संसदीय मर्यादाओं को भी कर रही तार तार .. प्रसंग – वाशिंगटन पोस्ट बेहुस्न बेपर्दा है तिरा खामोशां, बात सवालात मेरे बड़े नंगे है!…
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ये है दिल्ली मेरी जान
Updated: September 6, 2012
लिमटी खरे एलजाईमर की जद में आला नेता कहते हैं ढलती आयु के साथ ही मस्तिष्क को शरीर के अंदर से उतपन्न पोषक तत्व मिलने…
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संसद ठप्प कर भाजपा क्या हासिल करेगी? / मा. गो. वैद्य
Updated: September 4, 2012
एक सप्ताह से अधिक समय हो चुका है, हमारी सार्वभौम संसद ठप्प है; और उसके ठप्प होने का श्रेय कहे, या अपश्रेप, भारतीय जनता पार्टी…
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‘राज’नीति पर बिहार सरकार का ढुलमुल रवैय्या
Updated: September 4, 2012
भवेश नंदन झा केंद्र और महाराष्ट्र की कांग्रेस सरकार का वरदहस्त पाकर मनसे नेता राज ठाकरे एक राज्य विशेष बिहार के लोगों से अभद्रता से…
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‘राज’ नीतिक आतंकवाद से भी सख्ती से निपटें
Updated: September 4, 2012
नीरज कुमार दुबे हाल ही में अफवाहें फैलाकर पूर्वोत्तर भारत के लोगों को देश के विभिन्न राज्यों से पलायन के लिए मजबूर करने वाली साजिशों…
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पश्चिम बंगाल में पूंजीनिवेश के मित्रतापूर्ण माहौल की तलाश में रतन टाटा
Updated: September 4, 2012
जगदीश्वर चतुर्वेदी पश्चिम बंगाल में औद्योगिक पूंजी निवेश में सबसे बड़ी बाधा है नेताओं का पूंजीपति विरोधी राजनीतिक कठमुल्लापन । इस राजनीतिक कठमुल्लेपन को विभिन्न…
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समानता का मूल अधिकार विभेद की मनाही नहीं करता!
Updated: September 4, 2012
समानता का मतलब सबको आँख बंद करके एक समान मानना नहीं है, बल्कि सरकार के द्वारा समान लोगों के साथ समान व्यवहार करना है, जिसके…
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पी. चिदम्बरम को बदनाम करने का मुआवजा क्या?
Updated: September 4, 2012
अब इस न्यायिक परिदृश्य में सबसे बड़ा और न्यायसंगत सवाल ये है कि पी. चिदम्बरम जो देश के एक सम्मानित मंत्री हैं और देश के…
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अपनी ग़ज़ल समाज का तू आईना बना…..
Updated: September 4, 2012
इक़बाल हिंदुस्तानी वो शख़्स है मक्कार कहूं या ना कहूं मैं, छिपकर करेगा वार कहूं या ना कहूं मैं। रोटी ना अमन चैन पढ़ाई…
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शब्दों की कथा
Updated: September 4, 2012
अदभुत थी कथा और कथनीय था कथन सुन रहे थे सभी वहाँ रूचि लेकर. शाखों और पत्तों पर यहाँ वहाँ अटक जाते थे विचार. वातावरण…
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कविता – संकट
Updated: September 4, 2012
मोतीलाल आसान तो बिल्कुल नहीं शब्दों का धुँआ बनना अकेला मन का किला आँखों को नम कर जाता है टूट चुकी होती है जब…
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