विविधा ‘मधुभाई की रचनाएं शोधपरक और प्रेरणाप्रद होती हैं’

‘मधुभाई की रचनाएं शोधपरक और प्रेरणाप्रद होती हैं’

प्रो. (डॉ.) मधुसूदन जी अमेरिका में रहते हैं और प्रारंभ से ही प्रवक्‍ता डॉट कॉम से जुड़े हुए हैं। अपनी सारगर्भित टिप्‍पणियों से लेखकों का…

Read more
आर्थिकी भूअधिग्रहण पर संसदीय समिति की सिफारिशें

भूअधिग्रहण पर संसदीय समिति की सिफारिशें

भूमि अधिग्रहण पर संसदीय समिति ने सिफारिश की है कि किसी भी प्रकार की कृषि योग्य भूमि चाहे वह सिंचित हो या असिंचित के अधिग्रहण…

Read more
राजनीति “हिंदुत्व” से “मोदित्व” की ओर बढ़ती भाजपा?

“हिंदुत्व” से “मोदित्व” की ओर बढ़ती भाजपा?

तनवीर जाफ़री पिछले दिनों मुंबईं में भारतीय जनता पाटा की राष्ट्रीय कार्यंकारिणी की दो दिवसीय बैठक सम्पन्न हुईं। बजाय इसके कि इस कार्यंकारिणी की बैठक…

Read more
राजनीति जगन की अदावत कहीं भारी न पड़ जाए कांग्रेस को

जगन की अदावत कहीं भारी न पड़ जाए कांग्रेस को

 सिद्धार्थ शंकर गौतम कभी कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी के ख़ास क्षत्रप वाईएस राजशेखर रेड्डी के पुत्र जगनमोहन रेड्डी से कांग्रेस की बीते २ वर्षों से…

Read more
कहानी टिटलागढ की एक रात

टिटलागढ की एक रात

बात कई साल पुरानी है .जब मेरी नयी नयी नौकरी नागपुर में लगी थी .मैं एक सेल्समेन था और मुझे बहुत टूर करना पड़ता था.…

Read more
आलोचना परवर्ती पूंजीवाद और साहित्येतिहास-भाग-2

परवर्ती पूंजीवाद और साहित्येतिहास-भाग-2

जगदीश्वर चतुर्वेदी उत्तर आधुनिकतावादी विकास का प्रधान लक्षण है व्यवस्थागत भ्रष्टाचार,नेताओं में संपदा संचय की प्रवृत्ति, अबाधित पूंजीवादी विकास,उपभोक्तावाद की लंबी छलांग और संचार क्रांति।…

Read more
आलोचना परवर्ती पूंजीवाद और साहित्येतिहास- भाग-1

परवर्ती पूंजीवाद और साहित्येतिहास- भाग-1

जगदीश्वर चतुर्वेदी हिंदी साहित्य का प्रचलित इतिहास अधूरा है। रामचन्द्र शुक्ल का इतिहास हो या हजारीप्रसाद द्विवेदी का लिखा इतिहास हो। इन दोनों में अधूरापन…

Read more
गजल गजल:पहलू-श्यामल सुमन

गजल:पहलू-श्यामल सुमन

मुस्कुरा के हाल कहता पर कहानी और है जिन्दगी के फलसफे की तर्जुमानी और है   जिन्दगी कहते हैं बचपन से बुढ़ापे का सफर लुत्फ…

Read more
कविता कविता:खिलौना-श्यामल सुमन

कविता:खिलौना-श्यामल सुमन

देख के नए खिलौने, खुश हो जाता था बचपन में। बना खिलौना आज देखिये, अपने ही जीवन में।।   चाभी से गुड़िया चलती थी, बिन…

Read more
गजल गजल:इंसानियत-श्यामल सुमन

गजल:इंसानियत-श्यामल सुमन

इंसानियत ही मज़हब सबको बताते हैं देते हैं दग़ा आकर इनायत जताते हैं   उसने जो पूछा हमसे क्या हाल चाल है लाखों हैं बोझ…

Read more
कविता कविता:संवाद-श्यामल सुमन

कविता:संवाद-श्यामल सुमन

काम कितना कठिन है जरा सोचना। गाँव अंधों का हो आईना बेचना।।   गीत जिनके लिए रोज लिखता मगर। बात उन तक न पहुँचे तो…

Read more
राजनीति मायावती सरकार के घोटाले

मायावती सरकार के घोटाले

राकेश कुमार आर्य भारत में राजनीति जैसे पवित्र मिशन को जब से कुछ लोगों ने व्यवसाय बनाया है, तब से यह मिशन न होकर घृणास्पद…

Read more