कर्त्तव्य कर्म हो सर्वोपरि यही सँवारता है व्यक्तित्व
Updated: May 31, 2012
डॉ. दीपक आचार्य हर आदमी के लिए विधाता ने मनुष्यता का आवरण देकर अपने कर्त्तव्य कर्म को पूर्ण करने के लिए धरा पर भेजा हुआ…
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गजल:आप हम से मिले जिंदगी की तरह-इक़बाल हिंदुस्तानी
Updated: May 31, 2012
खिल उठी जिंदगी फिर कली की तरह, आप हम से मिले जिंदगी की तरह। जब उसे पा लिया हम ने चाहा जिसे, ग़म भी…
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मजे मूर्ख बने रहने के
Updated: May 31, 2012
मूर्ख होना हमारा ज्न्म सिद्ध अधिकार है और जो लोग इस अधिकार से वाकिफ हैं वे जन्म से ही मूर्ख होते हैं|खुदा की मार से…
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वैश्विक मंदी के दौर में गांधी का चरखा
Updated: May 30, 2012
प्रमोद भार्गव वैश्वीकरण के दौर में चरखे के व्यवसाय में उछाल के आंकड़े अविश्वसनीय एवं हास्यापद लगते हैं। लेकिन हकीकत को झुठलाया नहीं जा सकता।…
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कोयले की दलाली में प्रधानमंत्री के हाथ
Updated: May 30, 2012
प्रमोद भार्गव दल अण्णा ने प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह समेत 15 केबिनेट मंत्रियों पर दस्तावेजी साक्ष्य पेश करके भ्रष्टाचार के जो संगीन आरोप लगाए हैं,…
Read moreवैचारिक जड़ता लाती ही कुंठा
Updated: May 31, 2012
राजस्थान के दैनिक समाचार पत्र राजस्थान पत्रिका में एडिटोरियल पेज के हैडर पर वाल्तेयर की उक्ति आती है कि हो सकता है में आपके विचारों…
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आर्थिक मंदी के च्रकव्यूह में सरकार
Updated: May 29, 2012
प्रमोद भार्गव आर्थिक विकास की छदम दौड़ में शामिल संप्रग द्धितिय बुरी तरह आर्थिक मंदी के च्रकव्यूह में उलझ गर्इ है। इसलिए उसे सबसे ज्यादा…
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कम्युनिज्म का अन्तर्द्वन्द्व, विरोधाभास और असफलता-२
Updated: June 10, 2012
विपिन किशोर सिन्हा कार्ल मार्क्स के जीवन का अधिकांश भाग इंगलैन्ड में व्यतीत हुआ था। उन्होंने संपूर्ण अध्ययन वहीं किया था। उनके मन-मस्तिष्क पर वहां…
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स्वतंत्रता राष्ट्रीय नमक हरामी के लिए नहीं है
Updated: May 29, 2012
छद्म धर्म निरपेक्षता से लकवाग्रस्त कांग्रेस और उसके कुछ अन्य समान विचारधारा वाले दलों का मानना है कि राजनीति (वास्तव में राष्ट्रनीति) से भला भगवाधारी…
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ये स्टालिनवादी वैचारिक बहुलता के विरोधी होते हैं / राकेश सिन्हा
Updated: June 28, 2012
राकेश सिन्हा (जनसत्ता ने अपने चार रविवारीय अंकों में वैचारिक एवं बौद्धिक संवाद पर बहस चलाया. कई न्यूनताओं के बावजूद यह एक सराहनीय एवं अभिनंदनीय…
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