गजल गजल:गीत ज़िन्दगी के हम गुनगुनाते रहे-हिमकर श्याम

गजल:गीत ज़िन्दगी के हम गुनगुनाते रहे-हिमकर श्याम

जहां तक हुआ खुद को बहलाते रहे गीत ज़िन्दगी के हम गुनगुनाते रहे   छूटती रही ख़ुशियों की डोर हाथों से वक़्त हमें, हम उसे…

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राजनीति मनमोहनी आश्वासनों का टूटता तिलिस्म

मनमोहनी आश्वासनों का टूटता तिलिस्म

सिद्धार्थ शंकर गौतम आज संप्रग सरकार अपने द्वितीय कार्यकाल के तीन वर्ष पूर्ण करने जा रही है| इन तीन वर्षों में सरकार तथा जनता; दोनों…

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विविधा आखिर कहां जा रहे हैं हम

आखिर कहां जा रहे हैं हम

नरेश शांडिल्य ‘चार रईसजादों ने चलती कार में एक लड़की से रात भर किया बलात्कार’, ‘पॉश कालोनी की तीन लड़कियां वेश्यावृत्ति का धंधा करती गिरफ्तार’,…

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कार्टून कार्टून: अनाज सड़ रहा है– गोपाल गोयल

कार्टून: अनाज सड़ रहा है– गोपाल गोयल

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व्यंग्य व्यंग्य-तो कोतवाल जी कहिन-अशोक गौतम

व्यंग्य-तो कोतवाल जी कहिन-अशोक गौतम

सरकार के घर तो दिन रात डाके पड़ते रहते हैं, कोर्इ पूछने वाला नहीं। कोर्इ सारा दिन दफतर की कुर्सी पर ऊंघने के बाद शाम…

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शख्सियत Default Post Thumbnail

‘‘ बरसो याद आयेगी प्रेम कुमार सड़ाना की आवाज ’’

शादाब जफर‘‘शादाब’’ कुछ खास तरह से, विदाई एक अपने को:- 31 मई को को पूरा हो रहा है इन का आकाशवाणी नजीबाबाद से सेवाकाल। ‘‘…

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चिंतन अनायास जो विचार आए लिख लें

अनायास जो विचार आए लिख लें

डॉ. दीपक आचार्य अनायास जो विचार आए लिख लें दुबारा कभी पास नहीं फटकते ये दिव्य तरंगों का बहुत ही व्यापक संसार हमारे इर्द-गिर्द दिन-रात…

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विविधा जनसांख्यिकीय परिवर्तन गंभीर संकट की चेतावनी

जनसांख्यिकीय परिवर्तन गंभीर संकट की चेतावनी

राजेन्द्र चड्ढा   भारत में हिन्दू और अन्य मतावलंबियों की जनसंख्या में तेजी से बढ़ रहे असंतुलन ने सीमावर्ती और मध्य भारत में तीव्रता से…

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राजनीति ममता बनर्जी के पापुलिज्म का टूटता तिलिस्म

ममता बनर्जी के पापुलिज्म का टूटता तिलिस्म

जगदीश्‍वर चतुर्वेदी राजनीति में पापुलिज्म कैंसर है। पापुलिज्म के आधार पर सरकार गिराई जा सकती है लेकिन सरकार चलायी नहीं जा सकती। पापुलिज्म के आधार…

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जन्म-मृत्यु मंत्री की चिंता…..

एल.आर. गाँधी आखिर मासूम नवजात बच्चों की अंतिम चीत्कार ,देश के ‘जन्म-मृत्यु’ मंत्री जनाब गुलाम नबी आज़ाद साहेब को सुनाई दे ही गयी …. देती…

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गजल गजल-खूं बहाके दंगों में जन्नतें नहीं मिलती…..इक़बाल हिंदुस्तानी

गजल-खूं बहाके दंगों में जन्नतें नहीं मिलती…..इक़बाल हिंदुस्तानी

महनती ग़रीबों को देवता बना देना, कुदरती वसाइल पर सबका हक़ लिखा देना।   लोग जिनके ज़हनों को रहनुमा चलाते हैं, अब भी वो गुलामी…

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राजनीति तेरी तेरी सब कहें, मेरी कहे न कोय

तेरी तेरी सब कहें, मेरी कहे न कोय

 विनायक शर्मा अभी बीते सप्ताह ही हिमाचल कांग्रेस के विधायक और चार्जशीट कमेटी के अध्यक्ष ने टेलीफोन पर बताया था कि चार्जशीट पर अभी काम…

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