महिला-जगत Default Post Thumbnail

महिला आजीविका विकास की खामोश क्रांति बना स्वयं सहायता समूह

दिनेश पंत उत्तराखंड में कुल देवताओं के नाम से स्वयं सहायता समूह खोलकर महिलाएं आजीविका विकास की खामोश क्रांति के मार्ग पर अग्रसर हैं। ईश्ट…

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स्‍वास्‍थ्‍य-योग Default Post Thumbnail

छत्तीसगढ़ के लिए वरदान बन गया ‘‘संजीवनी‘‘

सूर्यकांत देवागंन छत्तीसगढ़ का नाम आते ही एक ऐसे क्षेत्र की छवि उभरकर सामने आती है जो पिछले तीन दशकों से हिंसा, संघर्ष और रक्तपात…

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मीडिया Default Post Thumbnail

गुम होती जनपक्षीय पत्रकारिता

संजय कुमार वैश्वीककरण के इस दौर में जनपक्षीय पत्रकारिता गुम होती जा रही है। बाजारवाद ने राष्ट्रीय मीडिया के स्वरूप को बदल डाला है। आरोपो…

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कविता कविता – चली जाऊँगी वापस

कविता – चली जाऊँगी वापस

मोतीलाल/राउरकेला   चली जाऊँगी वापस तुम्हारी देहरी से दूर तुम्हारी खुश्बू से दूर इन फसलोँ से दूर गाँव गली से दूर उन अनाम सी जगह…

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समाज Default Post Thumbnail

माओवाद के विरुद्ध निर्णायक युद्ध का समय

ओडिशा में सत्तारूढ़ बीजद सरकार के विधायक झीना हिकाका को माओवादियों द्वारा बंधक बनाने की घटना ने माओवादियों के बुलंद हौसले और सरकार की कमजोरी…

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समाज Default Post Thumbnail

2020 तक भारत विकसित राष्ट्र कैसे बन पायेगा?

इक़बाल हिंदुस्तानी एल पी जी नीतियों से यह मक़सद हासिल नहीं हो सकता! सिर्फ एक क़दम उठा था गलत राहे शौक में, मंज़िल तमाम उम्र…

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समाज सासंदों की उम्मीदवारी

सासंदों की उम्मीदवारी

वीरेन्द्र सिंह राठौर 25 मार्च को अन्ना हजारे और उनकी टीम ने एक दिन का सांकेतिक अनशन दिल्ली के जंतर-मंतर मैदान पर किया। मुबंई के…

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व्यंग्य बिन ममता सब सून

बिन ममता सब सून

जग मोहन ठाकन रहिमन ममता राखिये , बिन ममता सब सून । सभी प्राणी अपने बच्चों का तब तक पालन पोषण करते हैं जब तक…

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आलोचना आध्यात्मिक गुरूओ के राजनीतिक बयानो से देश को खतरा!

आध्यात्मिक गुरूओ के राजनीतिक बयानो से देश को खतरा!

शादाब जफर ‘‘शादाब’’ “सरकार को शिक्षा का निजीकरण कर के सरकारी विद्यालयो को बंद कर देना चाहिये क्योकि वे नक्सलवाद को जन्म देते है। सरकार…

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पर्व - त्यौहार सौभाग्य तृतीया पर विशेष

सौभाग्य तृतीया पर विशेष

संजय बिन्नाणी सफल दाम्पत्य की साधना का पर्व गणगौर इन दिनों दाम्पत्य जीवन सबसे अधिक असुरक्षाओं से घिरा दिखता है, इसलिए वासन्ती नवरात्र की प्रासंगिकता…

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राजनीति कहां छिप गये लोकतंत्र और संसद के अलंबरदार!

कहां छिप गये लोकतंत्र और संसद के अलंबरदार!

इक़बाल हिंदुस्तानी हाईकमान के नाम पर सभी दलों में चल रही है तानाशाही! अन्ना के आंदोलन के दौरान कुछ लोगों को इस बात की बड़ी…

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कला-संस्कृति Default Post Thumbnail

अलग-अलग हैं शाहबाज लाल कलंदर व झूलेलाल?

तेजवानी गिरधर जिस गीत दमा दम मस्त कलंदर को गा और सुन कर सिंधी ही नहीं, अन्य समुदाय के लोग भी झूम उठते है, उस…

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