मनोरंजन श्याम बेनेगल का जाना नये सिनेमा का अंत

श्याम बेनेगल का जाना नये सिनेमा का अंत

-ः ललित गर्ग:-बालीवुड में समानांतर सिनेमा के जनक, ‘मंथन’ से लेकर ‘वेलडन अब्बा’ तक जिनके फिल्मी सफर को एक युग कहा जा सकता है, बेहद…

Read more
लेख उपभोक्ताओं को मिले त्वरित न्याय

उपभोक्ताओं को मिले त्वरित न्याय

राष्ट्रीय उपभोक्ता दिवस (24 दिसम्बर) – योगेश कुमार गोयलदेश में प्रतिवर्ष 24 दिसम्बर को उपभोक्ताओं के विभिन्न हितों और उनके अधिकारों की सुरक्षा के लिए…

Read more
राजनीति महान राष्ट्र-सपूतों में अग्रणी थे अटल बिहारी वाजपेयी

महान राष्ट्र-सपूतों में अग्रणी थे अटल बिहारी वाजपेयी

अटल बिहारी वाजपेयी की 100वीं जन्म जयन्ती-25 दिसम्बर, 2024-ललित गर्ग- भारतीय राजनीति का महानायक, भारतीय जनता पार्टी के दिग्गज नेता, भारत रत्न, प्रखर कवि, वक्ता…

Read more
राजनीति ‘आरएसएस-शिवसेना’ के हिन्दू दर्शन की ‘अकाल मौत’ के मायने

‘आरएसएस-शिवसेना’ के हिन्दू दर्शन की ‘अकाल मौत’ के मायने

 कमलेश पांडेय आखिर जब पूरी दुनिया में मुस्लिम कट्टरपंथी ताकतें हावी होती जा रही हैं और लोकतंत्र को चुनौती देते हुए एक के बाद दूसरी…

Read more
लेख बड़ा दिन, बड़े लोग, बड़ी बातें

बड़ा दिन, बड़े लोग, बड़ी बातें

डॉ घनश्याम बादल 25 दिसंबर यानी बड़ा दिन. दुनिया भर में ईसाई धर्म का सबसे बड़ा त्योहार क्रिसमस मनाया जाता है आज. अब जब दुनिया…

Read more
मीडिया पत्रकारिता  के अपराधीकरण का  दौर

पत्रकारिता  के अपराधीकरण का  दौर

कुमार कृष्णन  राजनीति का अपराधीकरण और अपराध का राजनीतिकरण इस देश में विमर्श का बड़ा मुद्दा रहा है लेकिन पत्रकारिता के अपराधीकरण पर कभी कोई…

Read more
कला-संस्कृति साड़ी: भारतीयता और परंपरा का विश्व प्रिय पोशाक 

साड़ी: भारतीयता और परंपरा का विश्व प्रिय पोशाक 

21 दिसंबर विश्व साड़ी दिवस के अवसर पर विशेष-         – सुरेश सिंह बैस “शाश्वत” महाभारत काल में हस्तिनापुर राज्य हस्तिनापुर के राज दरबार…

Read more
लेख पति अनिश्चित काल तक पत्नी को गुजारा भत्ता देने के लिए बाध्य नहीं

पति अनिश्चित काल तक पत्नी को गुजारा भत्ता देने के लिए बाध्य नहीं

                    रामस्वरूप रावतसरे सुप्रीम कोर्ट ने 19 दिसंबर 2024 को भरण-पोषण और गुजारा भत्ता को लेकर एक अहम टिप्पणी की है। अदालत ने कहा है कि कुछ कानून महिला…

Read more
राजनीति डॉ.आंबेडकर को सही परिप्रेक्ष्य में समझने की आवश्यकता !

डॉ.आंबेडकर को सही परिप्रेक्ष्य में समझने की आवश्यकता !

डॉ सुधाकर कुमार मिश्रा                                             डॉ आंबेडकरजी भारतीय राजनीति के महान नेता थे। भारत के स्वतंत्रता के समय आंबेडकर जी  सामाजिक परिवर्तन चाहते थे, सामाजिक परिवर्तन के पुरोधा समाज की दुरावस्था एवं सामाजिक कुरीतियों को देखकर आत्मा से दु:खी थे और उनको बदलने के लिए  प्रयत्नशील थे । उनके सामाजिक कार्यक्रमों में तत्कालीन कांग्रेस ने रोड़ा लगाया था। कांग्रेस के सन् 1886 के दुसरे अधिवेशन में तत्कालीन कांग्रेस अध्यक्ष श्री दादाभाई नौरोजी ,जो भारत के व्यवृद्ध व्यक्ति थे और उदारवादी नेता थे  ने कहा था कि कांग्रेस संगठन को अपना  ध्यान राजनीतिक विषयों पर देना चाहिए। सन्  1887 के मद्रास अधिवेशन के समय भी कांग्रेस अध्यक्ष श्री बदरुद्दीन तैय्यब जी ने कहा कि कांग्रेस के कार्यकर्ता अपने आपको  सामाजिक समस्याओं से अलग रखें। डॉ आंबेडकर जी ने अपना ध्यान बाल – विवाह , अछूतोद्धार,स्त्री वर्ग की प्रगति, अस्पृश्यता तथा अन्य रूढ़ियों के समाप्त करने का कार्य किया। यह महत्वपूर्ण तथ्य है कि जिन लोगों ने स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात सत्ता प्राप्त किए , वे  समाज सुधार से कोसों दूर चले गए। आंबेडकर जी का कहना था कि “मैं सामाजिक सुधार को राजनीतिक सुधार की अपेक्षा अधिक मौलिक मानता हूं।”…

Read more
शख्सियत यशपाल का आजादी की लड़ाई और साहित्य में योगदान

यशपाल का आजादी की लड़ाई और साहित्य में योगदान

–    कल्पना पाण्डे प्रसिद्ध हिन्दी कथाकार एवं निबंधकार यशपाल का जन्म 3 दिसम्बर 1903 को फिरोजपुर (पंजाब) में हुआ था। उनके पूर्वज हिमाचल के भूम्पल गांव, हमीरपुर के रहने वाले थे।…

Read more
लेख भारत में बुज़ुर्ग आबादी की समस्याएँ

भारत में बुज़ुर्ग आबादी की समस्याएँ

–डॉ. सत्यवान सौरभ भारत की आबादी में वरिष्ठ नागरिकों का प्रतिशत हाल के वर्षों में तेजी से बढ़ रहा है और यह प्रवृत्ति जारी रहने…

Read more
राजनीति राजनीति के दलदल में खिला कमल : अटल बिहारी 

राजनीति के दलदल में खिला कमल : अटल बिहारी 

डा. विनोद बब्बर  पिछले कुछ दशकों से राजनीति कीचड़ का पर्याय बन चुकी है। शायद ही कोई चादर उजली हो। कुछ अपने कर्म तो कुछ…

Read more