कविता कविता : “विद्या बालन के लिए गीतों को गाना चाहती हूँ” – कृष्णमूर्ति

कविता : “विद्या बालन के लिए गीतों को गाना चाहती हूँ” – कृष्णमूर्ति

कविता कृष्णमूर्ति की आवाज में ऐसी कशिश है कि उसे सुन कर कोई भी उनकी आवाज का दीवाना बने हुए नही रह सकता. आज कल…

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व्यंग्य अटेंशन – एक व्यंग्य कथा !!!

अटेंशन – एक व्यंग्य कथा !!!

कुछ दिन पहले तक मेरी हालत बहुत खराब थी। मुझे कहीं से कोई भी अटेंशन नहीं मिल रही थी। हर कोई मुझे बस टेंशन देकर…

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पर्व - त्यौहार भारतीय गणतंत्रता दिवस पर विशेष

भारतीय गणतंत्रता दिवस पर विशेष

राष्ट्रभक्ति और समर्पण की मिसाल है प्रताप सिंह जाधव. भारतीय जवानों को दी अस्पताल की सौगात कोल्हापुर। 15 जनवरी। इस देश में शायद ही कोई…

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चुनाव उत्तर प्रदेश चुनावों को भावनाओं की भेंट चढ़ाने की तैयारी

उत्तर प्रदेश चुनावों को भावनाओं की भेंट चढ़ाने की तैयारी

तनवीर जाफ़री एक दशक पूर्व तक भारतीय लोकतंत्र में होने वाले चुनावों में राजनीतिक पार्टियों द्वारा चुनाव पूर्व जारी किए जाने वाले चुनाव घोषणा पत्र…

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कविता कविता : अलविदा– विजय कुमार

कविता : अलविदा– विजय कुमार

 सोचता हूँ जिन लम्हों को ; हमने एक दूसरे के नाम किया है शायद वही जिंदगी थी !   भले ही वो ख्यालों में हो…

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कविता कविता : देह – विजय कुमार

कविता : देह – विजय कुमार

देह के परिभाषा को सोचता हूँ ; मैं झुठला दूं !   देह की एक गंध , मन के ऊपर छायी हुई है !!  …

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विधि-कानून आरक्षण समाप्त करना है तो………

आरक्षण समाप्त करना है तो………

डॉ. पुरुषोत्तम मीणा ‘निरंकुश’ आरक्षण समाप्त करना है तो आरक्षित वर्ग के वर्गद्रोही अफसर तत्काल बर्खास्त किये जायें! भारत के संविधान के बारे में जानकारी…

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प्रवक्ता न्यूज़ गाय के दूध का महत्व

गाय के दूध का महत्व

हृदय रोग से बचाता हें गाय माता का दूध— भारतीय संस्कृति में गाय का बेहद उच्च स्थान है। इसे कामधेनु कहा गया है। इसका दूध…

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राजनीति राष्ट्रीय दलों के लिए चुनौती बनते विधानसभा चुनाव

राष्ट्रीय दलों के लिए चुनौती बनते विधानसभा चुनाव

निर्मल रानी अगले महीने देश के 5 राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनावों की तिथि ज्यों-ज्यों करीब आती जा रही है,राजनैतिक दल वैसे-वैसे अपने चुनाव…

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विधि-कानून गणतंत्र दिवस पर शक्ति प्रदर्शन का औचित्य क्या है?

गणतंत्र दिवस पर शक्ति प्रदर्शन का औचित्य क्या है?

आजादी के लगभग तीन साल बाद भारत राष्ट्र के तत्कालीन सुविग्य्जनों और कानूनविदों ने भारतीय संविधान को अंगीकृत करते हुए उसकी प्रस्तावना में कहा था…

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राजनीति न लोक ही बचा न तंत्र

न लोक ही बचा न तंत्र

डॉ. शशि तिवारी लोक का स्थान स्वयं ने ले लिया और तंत्र का स्थान परिवादवाद ने, बची-कुची कसर जातिवाद के तंत्र ने कर दी। बढ़ते…

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लेख ये भी एक तरह की ‘पेड’ पत्रकारिता है !

ये भी एक तरह की ‘पेड’ पत्रकारिता है !

जगमोहन फुटेला मैं ‘टोटल टीवी’ में उत्तर-पश्चिमी राज्यों का ब्यूरो देखता था जब एक दिन मुझे मेरे डायरेक्टर विनोद मेहता का फोन आया. उन ने…

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