कविता : “विद्या बालन के लिए गीतों को गाना चाहती हूँ” – कृष्णमूर्ति
Updated: January 28, 2012
कविता कृष्णमूर्ति की आवाज में ऐसी कशिश है कि उसे सुन कर कोई भी उनकी आवाज का दीवाना बने हुए नही रह सकता. आज कल…
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अटेंशन – एक व्यंग्य कथा !!!
Updated: January 30, 2012
कुछ दिन पहले तक मेरी हालत बहुत खराब थी। मुझे कहीं से कोई भी अटेंशन नहीं मिल रही थी। हर कोई मुझे बस टेंशन देकर…
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भारतीय गणतंत्रता दिवस पर विशेष
Updated: January 28, 2012
राष्ट्रभक्ति और समर्पण की मिसाल है प्रताप सिंह जाधव. भारतीय जवानों को दी अस्पताल की सौगात कोल्हापुर। 15 जनवरी। इस देश में शायद ही कोई…
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उत्तर प्रदेश चुनावों को भावनाओं की भेंट चढ़ाने की तैयारी
Updated: January 28, 2012
तनवीर जाफ़री एक दशक पूर्व तक भारतीय लोकतंत्र में होने वाले चुनावों में राजनीतिक पार्टियों द्वारा चुनाव पूर्व जारी किए जाने वाले चुनाव घोषणा पत्र…
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कविता : अलविदा– विजय कुमार
Updated: January 25, 2012
सोचता हूँ जिन लम्हों को ; हमने एक दूसरे के नाम किया है शायद वही जिंदगी थी ! भले ही वो ख्यालों में हो…
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कविता : देह – विजय कुमार
Updated: January 25, 2012
देह के परिभाषा को सोचता हूँ ; मैं झुठला दूं ! देह की एक गंध , मन के ऊपर छायी हुई है !! …
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आरक्षण समाप्त करना है तो………
Updated: January 26, 2012
डॉ. पुरुषोत्तम मीणा ‘निरंकुश’ आरक्षण समाप्त करना है तो आरक्षित वर्ग के वर्गद्रोही अफसर तत्काल बर्खास्त किये जायें! भारत के संविधान के बारे में जानकारी…
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गाय के दूध का महत्व
Updated: February 18, 2012
हृदय रोग से बचाता हें गाय माता का दूध— भारतीय संस्कृति में गाय का बेहद उच्च स्थान है। इसे कामधेनु कहा गया है। इसका दूध…
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राष्ट्रीय दलों के लिए चुनौती बनते विधानसभा चुनाव
Updated: January 26, 2012
निर्मल रानी अगले महीने देश के 5 राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनावों की तिथि ज्यों-ज्यों करीब आती जा रही है,राजनैतिक दल वैसे-वैसे अपने चुनाव…
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गणतंत्र दिवस पर शक्ति प्रदर्शन का औचित्य क्या है?
Updated: January 26, 2012
आजादी के लगभग तीन साल बाद भारत राष्ट्र के तत्कालीन सुविग्य्जनों और कानूनविदों ने भारतीय संविधान को अंगीकृत करते हुए उसकी प्रस्तावना में कहा था…
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न लोक ही बचा न तंत्र
Updated: January 26, 2012
डॉ. शशि तिवारी लोक का स्थान स्वयं ने ले लिया और तंत्र का स्थान परिवादवाद ने, बची-कुची कसर जातिवाद के तंत्र ने कर दी। बढ़ते…
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ये भी एक तरह की ‘पेड’ पत्रकारिता है !
Updated: January 26, 2012
जगमोहन फुटेला मैं ‘टोटल टीवी’ में उत्तर-पश्चिमी राज्यों का ब्यूरो देखता था जब एक दिन मुझे मेरे डायरेक्टर विनोद मेहता का फोन आया. उन ने…
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