समाज बेकार है ऐसी आज़ादी

बेकार है ऐसी आज़ादी

ए एन शिबली हर साल 15 अगस्त आते ही एक अजब सी खुशी सा अहसास होता है। हर तरफ राष्ट्रिए गीत बजते रहते हैं। स्कूलों…

Read more
हिंद स्‍वराज भारत को घेरता चीन

भारत को घेरता चीन

प्रमोद भार्गव भारतीय सीमा पर चीन और पाकिस्तानी सेना का संयुक्त युद्घाभ्यास इस बात का प्रतीक है कि चीन भारत को घेरने के लिए लगातार…

Read more
सिनेमा याहू और जंगली शमशेर यानी शम्मी

याहू और जंगली शमशेर यानी शम्मी

 रामकृष्ण कहते हैं, सुप्रसिद्ध शिक्षाविद् अमरनाथ झा ने एक शिक्षक के रूप में जब इलाहाबाद विश्वविद्यालय में प्रवेश किया तब उनकी अवस्था मात्र इक्कीस वर्ष…

Read more
समाज ”जाति”- भूषण या दूषण?

”जाति”- भूषण या दूषण?

डॉ. मधुसूदन विद्वानों की ज़बानी।  प्रवेश: पाठकों के, विचार-चिन्तन-मनन इत्यादि के लिए, कुछ मौलिक कथन (१) एक मिशनरी का(२) एक विशेषज्ञ का(३) एक प्रभावी विचारक…

Read more
सिनेमा फिल्म ”गांधी टू हिटलर मेरे नाटक की नकल है – फ्रैंक हुजूर

फिल्म ”गांधी टू हिटलर मेरे नाटक की नकल है – फ्रैंक हुजूर

 सुनील अमर  गत दिनों देश के कुछ सिनेमाघरों में प्रदर्शित द्विभाषी फिल्म ‘गॉंधी टू हिटलर’ की पटकथा विवाद में आ गई है। देश के युवा…

Read more
सिनेमा ‘आरक्षण’ फिल्म और खोखली दलित चिन्ताएं

‘आरक्षण’ फिल्म और खोखली दलित चिन्ताएं

जगदीश्वर चतुर्वेदी  आरक्षण फिल्म रिलीज हो गयी। तीन राज्यों उत्तरप्रदेश,पंजाब और आंध्र ने इसके प्रदर्शन पर रोक लगायी हुई है। आंध्र में कांग्रेस ,यू.पी. में…

Read more
धर्म-अध्यात्म Default Post Thumbnail

मूल्यपरक जीवन जीने का प्रषिक्षण है रोजा

मो. इफ्तेखार अहमद, रमजान का महत्व धार्मिक ही नहीं, वैज्ञानिक भी ’’रमजान‘‘ के पाक महीना के आरम्भ होते ही मस्जिदों में इबादत की हलचल व…

Read more
विधि-कानून यूआईडीः यह कार्ड खतरनाक है

यूआईडीः यह कार्ड खतरनाक है

डॉ. मनीष कुमार  वर्ष 1991 में भारत सरकार के वित्त मंत्री ने ऐसा ही कुछ भ्रम फैलाया था कि निजीकरण और उदारीकरण से 2010 तक…

Read more
लेख सोशल नेटवर्किंग बनाम सेक्स नेटवर्किंग

सोशल नेटवर्किंग बनाम सेक्स नेटवर्किंग

 डॉ. मनोज चतुर्वेदी मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है वह समाज के लिए जीता व मरता है। यदि वह समाज से अलग हो तो या वह…

Read more
लेख वुस्तानवी एक शख्सियत नहीं बल्कि एक विचारधारा का संघर्ष

वुस्तानवी एक शख्सियत नहीं बल्कि एक विचारधारा का संघर्ष

इक़बाल हिंदुस्तानी दारूलउलूम देवबंद विश्वप्रसिद्व इस्लामी संस्था है। मौलाना वुस्तानवी का मामला भले ही शांत दिख रहा हो लेकिन उनके समर्थक अगर उनकी बर्खास्तगी के…

Read more
कला-संस्कृति सोने की चिड़िया क्यों लुटती थी?

सोने की चिड़िया क्यों लुटती थी?

शंकर शरण महान इतिहासकार विल ड्यूराँ ने अपना पूरा जीवन लगाकर वृहत ग्यारह भारी-भरकम खंडों में “स्टोरी ऑफ सिविलाइजेशन” लिखी था। उसके प्रथम खंड में…

Read more
कविता हाँ, हाँ मैंने वक्त बदलते देखा है…….

हाँ, हाँ मैंने वक्त बदलते देखा है…….

पंकज व्यास मैंने वक्त बदलते देखा है, दुनिया के दस्तूर बदलते देखे हैं, मैंने, मैंने, रिश्ते और रिश्तेदार बदलते देखे हैं मैंने, अपनो को बैगाना…

Read more