प्रवक्ता न्यूज़ पत्रकार रामबहादुर राय पर केंद्रित होगा मीडिया विमर्श का अगला अंक

पत्रकार रामबहादुर राय पर केंद्रित होगा मीडिया विमर्श का अगला अंक

भोपाल। जनसंचार के सरोकारों पर केंद्रित त्रैमासिक पत्रिका मीडिया विमर्श का आगामी अंक देश के चर्चित पत्रकार श्री रामबहादुर राय पर केंद्रित होगा। हमारे समय…

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विश्ववार्ता परदे के पीछे – अमेरिकी लोकतंत्र का अल्पज्ञात पक्ष

परदे के पीछे – अमेरिकी लोकतंत्र का अल्पज्ञात पक्ष

हरिकृष्ण निगम आज के युग में शायद ऐसी कोई चीज नहीं है जिसे निष्पक्ष सत्य कहा जा सके और उसको किसी न किसी संदर्भ में…

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विश्ववार्ता सिकुड़ते पाकिस्तान का पुनर्रचित मानचित्र

सिकुड़ते पाकिस्तान का पुनर्रचित मानचित्र

हरिकृष्ण निगम अंग्रेजी में एक लोकप्रिय कहावत है कि जो तलवार के बल पर जीवित रहता है वह तलवार के बार से ही मरता भी…

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राजनीति ये है दिल्ली मेरी जान

ये है दिल्ली मेरी जान

लिमटी खरे यूपी कांग्रेस से आहत हैं युवराज भट्टा परसौल गांव में जाकर कांग्रेस के युवराज राहुल गांधी ने उत्तर प्रदेश में कांग्रेस को जगाने…

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राजनीति आम आदमी के लिये मुसीबत भरे सरकार के दो वर्ष

आम आदमी के लिये मुसीबत भरे सरकार के दो वर्ष

यूपीए 2 सरकार के दो वर्ष पूरे हुए। पर इन दो सालो में भारत में जो कुछ घटित हुआ शायद भारत का इतिहास उसे कभी…

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हिंद स्‍वराज सारे जहॉ में अच्छा हिन्दोस्ता हमारा……..

सारे जहॉ में अच्छा हिन्दोस्ता हमारा……..

मेरा भारत महान या मुझे भारतीय होने पर गर्व है ये बात अब हम वास्तव में गर्व से कह सकते है। क्यो कि पिछले दिनो…

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सिनेमा आज कल पॉव जमी पर नही पड़ते इनके

आज कल पॉव जमी पर नही पड़ते इनके

बॉलीवुड की यह एक अच्छी पहल है कि वो गांवो की ओर लौट चला है वही दूसरी ओर ग्लैमर और स्टार इमेज व भागदौड भरी…

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राजनीति केन्द्र सरकार का हिन्दुओं के प्रति घोर अन्याय

केन्द्र सरकार का हिन्दुओं के प्रति घोर अन्याय

पाकिस्तान बनने के पश्चात भी भारत में हिन्दुओं की स्थिति लगातार खराब होती जा रही है- 1. हिन्दुओं की जनसंख्या का प्रतिशत कम करने के…

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समाज वशीर साहब आप से यह उम्मीद नहीं थी ।

वशीर साहब आप से यह उम्मीद नहीं थी ।

मुझे याद नहीं है कि मैनें कहां पॄा था कि शहद से डूबें हुये हाथ में चिपके हुये तिलों के बराबर भी एक मुसलमान कसमें…

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गजल इतनी बेरूखी कभी अच्छी नहीं

इतनी बेरूखी कभी अच्छी नहीं

इतनी बेरूखी कभी अच्छी नहीं ज्यादा दीवानगी भी अच्छी नहीं। फासला जरूरी चाहिए बीच में इतनी दिल्लगी भी अच्छी नहीं। मेहमान नवाजी अच्छी लगती है…

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कविता बहुत याद आती है माँ……

बहुत याद आती है माँ……

पथरीलेँ रास्तोँ पर जीवन के, घाव जलते हैँ जब तन मन के, बहुत याद आती है माँ।।   याद आती है मेरे लिये आँखोँ मेँ…

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कविता मैं उजला ललित उजाला हूँ!

मैं उजला ललित उजाला हूँ!

मैं उजला ललित उजाला हूँ! मैं हूँ तो फिर अंधकार नहीं है!   तेरे मन के तम से लड़ता हूँ तेरी राहें उजागर करता हूँ…

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