मनमोहन सिंह की स्वायत्तता और कश्मीर का फरमान
Updated: December 22, 2011
– डॉ0 कुलदीप चंद अग्निहोत्री प्रधानमंत्री श्री मनमोहन सिंह और कश्मीर के इस्लामी आतंकवादियों के ब्यान लगभग कुछ दिनों के अन्तराल से मानों एक साथ…
Read moreआपका व्यवहार और जीवन दृष्टि
Updated: December 22, 2011
-तरुण विजय बहुत आसान है वेद, पुराण, मनुस्मृति और अन्य शास्त्रीय ग्रंथ उठाकर सामने रखना और कहना कि इनमें कहीं भी अस्पृश्यता को मान्य नहीं…
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जड़ी-बूटी संरक्षण से ही आयुर्वेद सुरक्षित
Updated: December 22, 2011
-त्रिलोक चन्द्र भट्ट हिमाच्छादित पर्वत शिखर और नैसर्गिक सौन्दर्य को निहारने वाले यात्री तीर्थाटन व पर्यटन के लिए ही प्राकृतिक संसाधनों से भरपूर हरिद्वार को…
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बुर्के पर सेक्युलर सोच क्या हो?
Updated: December 22, 2011
-के. विक्रम राव बुर्के पर प्रतिबंध के मुद्दे पर भारत के प्रगतिषील और सेक्युलर समझवाले लोग, विषेषकर समाजवादी और माक्र्सवादी पार्टियों के पुरोधाजन, चुप्पी साधे…
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रमजान और स्वास्थ्य
Updated: December 22, 2011
-विजय कुमार कुछ दिन पूर्व दूरदर्शन पर एक मौलाना रमजान का महत्व बता रहे थे। पहले तो उन्होंने इसे अध्यात्म से जोड़ा और फिर स्वास्थ्य…
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इफ्तार की दावत
Updated: December 22, 2011
-विजय कुमार रमजान का महीना प्रारम्भ होते ही इफ्तार की दावतों का दौर चल पड़ता है। जहां तक मुझे पता है, सूर्योदय से सूर्यास्त तक…
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खुशहाली के नये आयाम, विकास का स्पंदन म.प्र. की पहचान
Updated: December 22, 2011
– भरतचंद्र नायक अयोध्या में ढांचा गिरने के बाद 1992 में मध्यप्रदेश सहित चार राज्यों की भारतीय जनता पार्टी की सरकारों को तत्कालीन नरसिंहराव सरकार…
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दुश्वारियों में अनवाल
Updated: December 22, 2011
-त्रिलोक चन्द्र भट्ट गाँधी आश्रम से लेकर वस्त्र विक्रेताओं की विभिन्न दुकानों पर पर्वतीय भेड़ों से प्राप्त ऊन से बने सुन्दर स्वेटर, दन, चुकटे व…
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क्या निस्वार्थ सेवा का अपमान है तीन गुना वेतन!
Updated: December 22, 2011
-लिमटी खरे राजनीति करना या चुनाव लड़ना जीतकर फिर जनसेवा करना, यह सब कुछ निस्वार्थ सेवा की श्रेणी में ही आता है। आजादी के मतवालों…
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कविता/जी लेने दो
Updated: December 22, 2011
-अनामिका घटक कतरा-कतरा ज़िंदगी का पी लेने दो बूँद बूँद प्यार में जी लेने दो हल्का-हल्का नशा है डूब जाने दो रफ्ता-रफ्ता “मैं” में रम…
Read moreकविता/नई कोंपल
Updated: December 22, 2011
-शालिनी मैथु नई कोपल हूँ मैं, सब कुछ है नया-नया, नई उमंग, नई तरंग लेकर हूँ आई. माँ के स्पर्श से हुई पुलकित, निर्जीव बोतल…
Read moreव्यंग्य/ नंगे पैर
Updated: December 22, 2011
-अखिलेश शुक्ल विश्व के किसी भी लोकतांत्रिक देश में पहले यह अनहोनी घटना घटित नही हुई थी। बहुत खोजने पर किसी भी देश के इतिहास…
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