राजनीति मनमोहन सिंह की स्वायत्तता और कश्मीर का फरमान

मनमोहन सिंह की स्वायत्तता और कश्मीर का फरमान

– डॉ0 कुलदीप चंद अग्निहोत्री प्रधानमंत्री श्री मनमोहन सिंह और कश्मीर के इस्लामी आतंकवादियों के ब्यान लगभग कुछ दिनों के अन्तराल से मानों एक साथ…

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आपका व्यवहार और जीवन दृष्टि

-तरुण विजय बहुत आसान है वेद, पुराण, मनुस्मृति और अन्य शास्त्रीय ग्रंथ उठाकर सामने रखना और कहना कि इनमें कहीं भी अस्पृश्यता को मान्य नहीं…

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स्‍वास्‍थ्‍य-योग जड़ी-बूटी संरक्षण से ही आयुर्वेद सुरक्षित

जड़ी-बूटी संरक्षण से ही आयुर्वेद सुरक्षित

-त्रिलोक चन्‍द्र भट्ट हिमाच्छादित पर्वत शिखर और नैसर्गिक सौन्दर्य को निहारने वाले यात्री तीर्थाटन व पर्यटन के लिए ही प्राकृतिक संसाधनों से भरपूर हरिद्वार को…

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समाज बुर्के पर सेक्युलर सोच क्या हो?

बुर्के पर सेक्युलर सोच क्या हो?

-के. विक्रम राव बुर्के पर प्रतिबंध के मुद्दे पर भारत के प्रगतिषील और सेक्युलर समझवाले लोग, विषेषकर समाजवादी और माक्र्सवादी पार्टियों के पुरोधाजन, चुप्पी साधे…

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समाज रमजान और स्वास्थ्य

रमजान और स्वास्थ्य

-विजय कुमार कुछ दिन पूर्व दूरदर्शन पर एक मौलाना रमजान का महत्व बता रहे थे। पहले तो उन्होंने इसे अध्यात्म से जोड़ा और फिर स्वास्थ्य…

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समाज इफ्तार की दावत

इफ्तार की दावत

-विजय कुमार रमजान का महीना प्रारम्भ होते ही इफ्तार की दावतों का दौर चल पड़ता है। जहां तक मुझे पता है, सूर्योदय से सूर्यास्त तक…

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विविधा खुशहाली के नये आयाम, विकास का स्पंदन म.प्र. की पहचान

खुशहाली के नये आयाम, विकास का स्पंदन म.प्र. की पहचान

– भरतचंद्र नायक अयोध्या में ढांचा गिरने के बाद 1992 में मध्यप्रदेश सहित चार राज्‍यों की भारतीय जनता पार्टी की सरकारों को तत्कालीन नरसिंहराव सरकार…

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पर्यावरण दुश्‍वारियों में अनवाल

दुश्‍वारियों में अनवाल

-त्रिलोक चन्द्र भट्ट गाँधी आश्रम से लेकर वस्त्र विक्रेताओं की विभिन्न दुकानों पर पर्वतीय भेड़ों से प्राप्त ऊन से बने सुन्दर स्वेटर, दन, चुकटे व…

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राजनीति क्या निस्वार्थ सेवा का अपमान है तीन गुना वेतन!

क्या निस्वार्थ सेवा का अपमान है तीन गुना वेतन!

-लिमटी खरे राजनीति करना या चुनाव लड़ना जीतकर फिर जनसेवा करना, यह सब कुछ निस्वार्थ सेवा की श्रेणी में ही आता है। आजादी के मतवालों…

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कविता कविता/जी लेने दो

कविता/जी लेने दो

-अनामिका घटक कतरा-कतरा ज़िंदगी का पी लेने दो बूँद बूँद प्यार में जी लेने दो हल्का-हल्का नशा है डूब जाने दो रफ्ता-रफ्ता “मैं” में रम…

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कविता/नई कोंपल

-शालिनी मैथु नई कोपल हूँ मैं, सब कुछ है नया-नया, नई उमंग, नई तरंग लेकर हूँ आई. माँ के स्पर्श से हुई पुलकित, निर्जीव बोतल…

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व्यंग्य/ नंगे पैर

-अखिलेश शुक्ल विश्व के किसी भी लोकतांत्रिक देश में पहले यह अनहोनी घटना घटित नही हुई थी। बहुत खोजने पर किसी भी देश के इतिहास…

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