राजनीति मीडिया पर अनर्गन आरोप लगाकर अनचाहे ही अघोषित नाराजगी मोल क्यों लेना चाह रहे राहुल गांधी!

मीडिया पर अनर्गन आरोप लगाकर अनचाहे ही अघोषित नाराजगी मोल क्यों लेना चाह रहे राहुल गांधी!

सड़कों पर चलते हुए केंद्र पर जमकर गरज रहे राहुल गांधी, पर सदन में . . . मीडिया पर पक्षपात का आरोप लगा रहे राहुल, पर सोशल…

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लेख रेगिस्तान के जहाज के उन्नयन और संरक्षण की आवश्यकता !

रेगिस्तान के जहाज के उन्नयन और संरक्षण की आवश्यकता !

रेगिस्तान के जहाज(द शिप ऑफ डेजर्ट) के नाम से जाना जाने वाला, राजस्थान का राज्य पशु(ऊंटों के संरक्षण के लिए राजस्थान सरकार ने इसे साल…

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राजनीति अब भारत से ब्रेनड्रेन को कम करने का समय आ गया है

अब भारत से ब्रेनड्रेन को कम करने का समय आ गया है

अभी हाल ही में इजराईल ने हमास के साथ छिड़े युद्ध के बाद भारत से एक लाख कामगारों को इजराईल भेजने का आग्रह किया है क्योंकि लगभग इतनी ही संख्या में फिलिस्तीन के नागरिक इजराईल में विभिन्न क्षेत्रों में कार्य कर रहे थे। हालांकि, इजराईल द्वारा भारत से मांगे गए एक लाख कामगारों की संख्या में इंजीनियर भी शामिल हैं। इसी प्रकार ताईवान ने भी घोषणा की थी कि उसे लगभग एक लाख भारतीय इंजीनियरों की आवश्यकता है। इसके पूर्व जापान ने भी लगभग 2 वर्ष पूर्व घोषणा की थी कि वह 2 लाख भारतीय इंजीनियरों की भर्ती जापान में विभिन्न कम्पनियों में करेगा। एक अन्य समाचार के अनुसार, माक्रोसोफ्ट के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री सत्या नंडेला एवं गूगल के मुख्य कार्यपालन अधिकार श्री सुंदर पिचाई भी प्रयास कर रहे हैं कि इनकी कम्पनियों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेन्स को बढ़ावा देने के उद्देश्य से किस प्रकार भारतीय इंजीनियरों की भर्ती बढ़ाई जाए। अमेरिका एवं कनाडा आदि देशों में पहिले से ही लगातार कुछ वर्षों से इन देशों की बहुराष्ट्रीय कम्पनियों में लाखों भारतीय इंजीनियरों की भर्ती जारी है। इस प्रकार, यह कहा जा सकता है कि भारत आज पूरे विश्व में इंजीनियरों की आपूर्ति का बहुत बड़ा केंद्र बन गया है अर्थात एक तरह से भारत पूरे विश्व के लिए इंजीनियर तैयार कर रहा है।  दूसरे, हाल ही में एक रोचक जानकारी सामने आई है कि रूस जैसे कुछ देशों की महिलाएं पति के रूप में भारतीय पुरुषों के प्रति आकर्षित हो रही हैं। क्योंकि, भारतीय पुरुष तलाक जैसी कुरीतियों से मीलों दूर दिखाई देते हैं। भारतीय पुरुष एक बार शादी के बाद पूरे जीवन भर अपनी पत्नी को सुखी जीवन प्रदान करते हैं। यह भारतीय सनातन संस्कृति का प्रभाव है। परंतु, विश्व के कई विकसित देशों में सामाजिक तानाबाना छिन्न भिन्न हो चुका है। इन देशों में तलाक की दर 50 प्रतिशत से भी अधिक हो गई है एवं अमेरिका में तो लगभग 60 प्रतिशत बच्चों को अपने पिता के बारे में जानकारी ही नहीं रहती है। इन विपरीत परिस्थितियों के बीच कुल मिलाकर इन देशों में बच्चों का मानसिक विकास प्रभावित हो रहा है एवं इन देशों में बच्चे गणित एवं विज्ञान जैसे विषयों में गहरी रुचि नहीं ले पा रहे हैं। अतः इन देशों में महिलाएं बहुत अधिक परेशानी में दिखाई दे रही हैं एवं वे भारतीय पुरुषों को अपने पति के रूप में स्वीकार करने को लालायित दिखाई दे रही हैं।  आज 1.40 करोड़ भारतीय मूल के नागरिक विभिन्न देशों में रह रहे हैं, जो इन देशों की नागरिकता प्राप्त करने का इंतजार कर रहे हैं एवं इसके अतिरिक्त 1.80 करोड़ भारतीय मूल के नागरिक इन देशों के स्थायी नागरिक बन चुके हैं। अतः कुल मिलाकर 3.20 करोड़ भारतीय मूल के नागरिक आज विश्व के अन्य देशों में निवास कर रहे हैं। भारतीय मूल के नागरिकों का यह वर्ग न केवल इन देशों में भारतीय सनातन संस्कृति को फैलाने में अपनी अहम भूमिका निभा रहा है बल्कि अपनी बचतों को भारत में भेजकर भारत में अपना पूंजी निवेश भी बढ़ा रहा हैं। पिछले वर्ष, भारतीय मूल के इन नागरिकों द्वारा 10,000 करोड़ अमेरिकी डॉलर से अधिक की राशि भारत में भेजी गई थी, जो पूरे विश्व में किसी भी देश में भेजी गई राशि में सबसे अधिक है। भारतीय मूल के नागरिक अपने संस्कारों के चलते इन देशों में शीघ्र ही अपना विशेष स्थान बना लेते हैं एवं अपनी मेहनत के बल पर सम्पन्नता भी प्राप्त कर लेते हैं। आज भारतीय मूल के नागरिक कई देशों में राजनैतिक क्षेत्र में भी बहुत आगे आ गए हैं। अमेरिका की उपराष्ट्रपति श्रीमती कमला हेरिस, ब्रिटेन के प्रधानमंत्री श्री ऋषि सुनक सहित कई देशों के प्रमुख आज भारतीय मूल के नागरिक ही हैं।  जब विशेष रूप से विकसित देशों में भारत से डॉक्टर, इंजीनियर एवं प्रबंधन के क्षेत्र में विशेषज्ञ भारत से बाहर जाते हैं तो इन विशिष्ट श्रेणी में विशेषज्ञों की भारत में कमी होना स्वाभाविक है। अब तो ऐसा आभास होने लगा है कि पूरे विश्व के लिए विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञ जैसे भारत तैयार कर रहा है। यह विशेषज्ञ विभिन्न देशों में जाकर इन देशों की कम्पनियों को मजबूती प्रदान करते हैं एवं यह कम्पनियां पूरे विश्व में अपने व्यापार को फैलाने में सफल हो रही हैं। अब समय आ गया है कि भारतीय कम्पनियां भी बहुराष्ट्रीय कम्पनियां बनें एवं पूरे विश्व में अपने व्यापार को फैलाएं। इस दृष्टि से भारत की इन कम्पनियों को विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों की आवश्यकता होगी। यदि भारतीय कम्पनियां विश्व के अन्य देशों में अपने पैर पसरना शुरू करें तो हो सकता है इन क्षेत्रों में पूर्व से ही कार्य कर रही विकसित देशों की बहुराष्ट्रीय कम्पनियों से भारतीय कम्पनियों को गला काट प्रतिस्पर्धा करनी पड़े। जबकि विकसित देशों की बहुराष्ट्रीय कम्पनियों को वैश्विक स्तर पर आगे बढ़ाने में भारतीय विशेषज्ञों का ही अधिक योगदान रहा है। विदेश में रह रहे भारतीय विशेषज्ञों एवं भारत में रह रहे भारतीय विशेषज्ञों की आपस में प्रतिस्पर्धा होगी। इस प्रतिस्पर्धा में सम्भव है कि भारतीय कम्पनियां विदेशी बहुराष्ट्रीय कम्पनियों के आगे प्रतिस्पर्धा में टिक ही न सकें। दूसरे, बदले हुए आर्थिक परिदृश्य में आज भारत में आर्थिक विकास की रफ्तार बहुत तेज हो चुकी है, जबकि विश्व के अन्य देशों, विशेष रूप से विकसित देशों में, आर्थिक विकास की रफ्तार लगातार कम बनी हुई है। भारत आज विश्व की पांचवी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया है एवं अगले लगभग 5 वर्षों के दौरान भारत विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएगा, ऐसी सम्भावना विश्व की वित्तीय एवं आर्थिक संस्थाएं  व्यक्त कर रही हैं। अतः आगे आने वाले समय में भारत में भी विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों की अधिक आवश्यकता महसूस होने लगेगी।  इस प्रकार, आज भारत में इस विषय पर गम्भीरता से विचार किए जाने की आवश्यकता है कि भारत से ब्रेन ड्रेन को कम करने के उद्देश्य से क्या उपाय किए जाने चाहिए। यदि भारत से ब्रेन ड्रेन पर अंकुश लगाने में सफलता मिलती है तो सम्भव है कि विदेशी बहुराष्ट्रीय कम्पनियां भारत में ही अपनी विनिर्माण इकाईयां स्थापित करें, क्योंकि इन बहुराष्ट्रीय कम्पनियों को इनके अपने देशों में भारतीय विशेषज्ञ इंजीनियरों की कमी महसूस होने लगेगी। भारत में ही विनिर्माण इकाईयों के स्थापित होने से न केवल भारत में रोजगार के अधिक अवसर निर्मित होंगे बल्कि इन कम्पनियों का विदेशी व्यापार भी भारत के माध्यम से होने लगेगा और भारत के कर संग्रहण में भी अपार वृद्धि होगी। कुल मिलाकर, भारत में और अधिक खुशहाली फैलाने का रास्ता साफ होगा।  भारत से ब्रेन ड्रेन को एकदम बंद तो नहीं किया जा सकता है परंतु कुछ क्षेत्रों जिनमें भारत को पूर्व में ही महारत हासिल हैं एवं जिन क्षेत्रों में भारत तेजी से विश्व में अपना स्थान मजबूत कर रहा है तथा जिन क्षेत्रों में भारत को आगे आने वाले समय में विशेषज्ञों की बहुत अधिक आवश्यकता होने जा रही है, ऐसे क्षेत्रों में विशेषज्ञ इंजीनियरों के ब्रेन ड्रेन को कम करने की जरूर आज आवश्यकता है। जैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेन्स एवं मशीन लर्निंग जैसे नए क्षेत्र अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उभर रहे हैं, इन क्षेत्रों को भारतीय इंजीनियरों द्वारा भारत में ही अधिक विकसित अवस्था में लाया जा सकता है। इससे अन्य विकसित देशों की तुलना में इन क्षेत्रों को भारत में अधिक तेजी से आगे बढ़ाया जा सकेगा। कुल मिलाकर, भारत से किन क्षेत्रों से कितने विशेषज्ञ इंजीनियरों को विदेश जाने की अनुमति दी जानी चाहिए, इस विषय पर अब गम्भीरता से विचार किया जाना चाहिए ताकि आगे आने वाले समय में भारत में इन पूर्व निर्धारित क्षेत्रों में विशेषज्ञ इंजीनियरों की कमी नहीं हो।  प्रहलाद सबनानी

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व्यंग्य तुमको याद रखेंगे गुरु

तुमको याद रखेंगे गुरु

“आइए महसूस कीजिये पब्लिसिटी के ताप को, मैं फिल्मवालों की गली में ले चलूंगा आपको” तो ख़्वातीनो हजरात मायानगरी की इस चमक-दमक से भरी दुनिया…

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समाज क्या आने वाले दिनों में वाकई उत्तर प्रदेश नेहरू गांधी परिवार के वारिसानों से मुक्त हो जाएगा!

क्या आने वाले दिनों में वाकई उत्तर प्रदेश नेहरू गांधी परिवार के वारिसानों से मुक्त हो जाएगा!

सोनिया गांधी का सीधे चुनाव न लड़कर राज्य सभा का पर्चा भरना कांग्रेस के असली कार्यकर्ताओं को करेगा निराश . . . (लिमटी खरे) देश…

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राजनीति एटीएम भारत के देसी मुसलमानों यानि डीएम को गुलाम बनाना चाहता है

एटीएम भारत के देसी मुसलमानों यानि डीएम को गुलाम बनाना चाहता है

– डा० कुलदीप चन्द अग्निहोत्री एटीएम (अरब, तुर्क, मंगोल) भारतीय मुसलमानों को अपना ग़ुलाम मानने की मानसिकता से ग्रसित रहे हैं। एटीएम की मानसिकता की शुरुआती…

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लेख दिल्ली में सजा एशिया का सबसे बड़ा पुस्तक मेला

दिल्ली में सजा एशिया का सबसे बड़ा पुस्तक मेला

विश्व पुस्तक मेला (10-18 फरवरी) पर विशेषपुस्तकों के प्रति रूचि बढ़ाता विश्व पुस्तक मेला– योगेश कुमार गोयलनई दिल्ली में प्रतिवर्ष नेशनल बुक ट्रस्ट (एनबीटी) द्वारा…

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कविता फूलों जैसी कली है बेटी

फूलों जैसी कली है बेटी

प्रियंका कोशियारी कपकोट, उत्तराखंड फूलों जैसी कली है बेटी। तितली जैसी उड़ान है उसकी। कर सकती है वो भी सबकुछ। अपने पिता की शान है वो।…

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कविता वे दिन थे मेरे लिए बेहद खास

वे दिन थे मेरे लिए बेहद खास

करीना थायत कक्षा-9 गरुड़, उत्तराखंड वे भी दिन थे मेरे लिए बेहद खास। जब खेलने का था मुझको अहसास।। अब तो जिंदगी से है यही…

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आर्थिकी भारतीय अर्थव्यवस्था में हो रहे बदलाव की ब्यार पर प्रश्नचिन्ह क्यों?

भारतीय अर्थव्यवस्था में हो रहे बदलाव की ब्यार पर प्रश्नचिन्ह क्यों?

भारत में पिछले एक दशक में, विशेष रूप से आर्थिक क्षेत्र में, अतुलनीय सुधार दृष्टिगोचर है और भारतीय अर्थव्यवस्था आज विश्व की पांचवी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने के साथ ही विश्व की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच सबसे तेज गति से आगे बढ़ती अर्थव्यवस्था भी बन गई है। आगे आने वाले लगभग पांच वर्षों के दौरान भारतीय अर्थव्यवस्था विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएगी, ऐसा आंकलन विश्व के कई वित्तीय एवं आर्थिक संस्थान कर रहे हैं। आज विश्व के कई देश पूंजीवादी मॉडल से निराश होकर भारतीय आर्थिक मॉडल को अपनाने की बात करने लगे हैं क्योंकि सनातन संस्कृति पर आधारित भारतीय आर्थिक मॉडल पश्चिमी आर्थिक मॉडल की तुलना में बेहतर माना जा रहा है। परंतु, दुर्भाग्य से भारत में कुछ राजनैतिक दल एक दूसरे से प्रतिस्पर्धा करते हुए भारत में हाल ही के समय में हुई आर्थिक प्रगति को कमतर आंकते हुए भारतीय अर्थव्यवस्था में हो रहे बदलाव की ब्यार पर ही प्रश्न चिन्ह लगाते दिखाई दे रहे हैं।   भारत आज अर्थ के विभिन्न क्षेत्रों में नित नई ऊंचाईयां छू रहा है। दिसम्बर 2023 के प्रथम सप्ताह में भारत ने फ्रान्स एवं ब्रिटेन को पीछे छोड़ते हुए शेयर बाजार के पूंजीकरण के मामले में पूरे विश्व में पांचवा स्थान हासिल किया था। भारत से आगे केवल अमेरिका, चीन, जापान एवं हांगकांग थे। परंतु, अब दो माह से भी कम समय में भारत ने शेयर बाजार के पूंजीकरण के मामले में हांगकांग को पीछे छोड़ते हुए विश्व में चौथा स्थान प्राप्त कर लिया है। अब ऐसा आभास होने लगा है कि भारत अर्थ के क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर खोई हुई अपनी प्रतिष्ठा को पुनः प्राप्त करता हुआ दिखाई दे रहा है। एक ईसवी से लेकर 1750 ईसवी तक आर्थिक दृष्टि से पूरे विश्व में भारत का बोलबाला था। इस खंडकाल में विश्व के कुल विदेशी व्यापार में भारत की हिस्सेदारी 32 प्रतिशत से भी अधिक की रही है क्योंकि उस समय पर भारत में सनातन संस्कृति का पालन करते हुए व्यापार किया जाता था। भारत में कर्म एवं अर्थ के कार्यों को धर्म का पालन करते हुए करने की प्रथा का पुरातन शास्त्रों में वर्णन मिलता है। भारत में चूंकि आज एक बार पुनः सनातन संस्कृति का पालन करते हुए विभिन्न क्षेत्रों में कार्य सम्पन्न हो रहे हैं अतः पूरे विश्व का भारत पर विश्वास बढ़ रहा है। विदेशी निवेश के साथ साथ आज लगभग 50 देश भारत के साथ द्विपक्षीय व्यापार समझौता करना चाहते हैं क्योंकि भारत वैश्विक स्तर पर विभिन्न उत्पादों के लिए एक बहुत बड़े बाजार के रूप में विकसित हो रहा है।   ऐसा कहा जाता है कि शेयर बाजार में निवेशक अपनी जमापूंजी का निवेश बहुत सोच विचार कर करता है एवं जब निवेशकों को यह आभास होने लगता है कि अमुक कम्पनी का भविष्य बहुत उज्जवल है एवं निवेशक द्वारा किए गए निवेश पर प्रतिफल अधिकतम रहने की सम्भावना है, तभी निवेशक अपनी जमापूंजी को शेयर बाजार में उस अमुक कम्पनी में निवेश करते है। इस प्रकार, जब किसी भी देश की अर्थव्यवस्था पर निवेशकों का भरोसा बढ़ता हुआ दिखाई देता है तो विशेष रूप से विदेशी निवेशक एवं विदेशी संस्थागत निवेशक उस देश में विभिन्न कम्पनियों के शेयर में अपनी निवेश बढ़ाते हैं। चूंकि विदेशी संस्थानों को आगे आने वाले समय में भारतीय अर्थव्यवस्था पर एवं भारतीय कम्पनियों की विकास यात्रा पर भरपूर भरोसा है अतः भारतीय शेयर बाजार में निवेश भी रफ्तार पकड़ रहा है।   किसी भी देश की आर्थिक प्रगति में शासन द्वारा बनाई गई नीतियों का विशेष प्रभाव रहता है। पिछले 10 वर्षों के खंडकाल में भारत न केवल आर्थिक क्षेत्र बल्कि सांस्कृतिक, सामाजिक एवं राजनैतिक क्षेत्रों में भी मजबूत हुआ है और भारत ने पूरे विश्व में अपनी धाक जमाई है। आज भारतीय मूल के लगभग 3.20 करोड़ लोग विश्व के अन्य देशों में निवास कर रहे हैं। भारतीय मूल के इन नागरिकों ने भारतीय सनातन संस्कृति का पालन करते हुए इन देशों के स्थानीय नागरिकों को भी प्रभावित किया है जिससे विदेशी नागरिक भी अब सनातन संस्कृति की ओर आकर्षित होने लगे हैं। विशेष रूप से विकसित देशों में तो सामाजिक तानाबाना इतना अधिक छिन्न भिन्न हो चुका है कि अब ये देश आर्थिक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक समस्याओं के हल हेतु आशाभारी नजरों से भारत की ओर देख रहे हैं। अंतरिक्ष के क्षेत्र में आज भारत एक वैश्विक ताकत बनाकर उभरा है। भारत आज न केवल अपने लिए सेटेलाईट अंतरिक्ष में भेज रहा है बल्कि विश्व के कई अन्य देशों के लिए भी सेटेलाईट अंतरिक्ष में स्थापित करने में सक्षम हो गया है। योग एवं आध्यात्म के क्षेत्र में तो भारत अनादि काल से विश्व गुरु रहा ही है, परंतु हाल ही के समय में भारत एक बार पुनः योग एवं आध्यात्म के क्षेत्र में विश्व का मार्गदर्शन करने की ओर अग्रसर है। योग को सिखाने के लिए तो यूनाइटेड नेशन्स ने प्रति वर्ष 21 जून को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर योग दिवस मनाने का निर्णय लिया है और इसे पूरे विश्व में लगभग सभी देशों द्वारा बहुत ही उत्साह से मनाया जाता है। इसी प्रकार विज्ञान के क्षेत्र में भी भारत ने पूरे विश्व में अपना एक अलग मुकाम बना लिया है। किसी भी देश के लिए आर्थिक प्रगति तभी सफल मानी जानी चाहिए जब उस देश के अंतिम पंक्ति में खड़े नागरिक को भी उस देश की आर्थिक प्रगति का लाभ मिलता दिखाई दे। इस दृष्टि से विशेष रूप से गरीबी एवं आय की असमानता को कम करने में भारत ने विशेष सफलता पाई है। जिसकी अंतरराष्ट्रीय मुद्रकोष एवं विश्व बैंक ने भी जमकर सराहना की है। भारत में वर्ष 1947 में 70 प्रतिशत लोग गरीबी की रेखा से नीचे जीवन यापन कर रहे थे, और अब वर्ष 2020 में देश की कुल आबादी का लगभग 10 प्रतिशत हिस्सा गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन कर रहा है। आज भारत डिजिटल इंडिया के माध्यम से क्रांतिकारी परिवर्तन के दौर से गुजर रहा है। पिछले 10 वर्षों के दौरान भारत ने डिजिटलीकरण के क्षेत्र में अतुलनीय प्रगति की है एवं आज भारत में 120 करोड़ से अधिक इंटरनेट, 114 करोड़ से अधिक मोबाइल एवं 65 करोड़ से अधिक स्मार्टफोन उपयोगकर्ता हैं। इस प्रकार भारत ने एक नए डिजिटल युग में प्रवेश कर लिया है। शिक्षा एवं स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में भी डिजिटल इंडिया ने कमाल ही कर दिया है। ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता बढ़ाई गई है। अब तो ड्रोन के लिए भी नए डिजिटल प्लेटफार्म का उपयोग हो रहा है एवं ड्रोन के माध्यम से कृषि को किस प्रकार सहयोग किया जा सकता है इस पर भी कार्य हो रहा है। ड्रोन के माध्यम से बीजों का छिड़काव आदि जैसे कार्य किए जाने लगे हैं।  कृषि क्षेत्र, रक्षा उत्पादों, फार्मा, नवीकरण ऊर्जा, डिजिटल व्यवस्था के साथ ही प्रौद्योगिकी, सूचना तकनीकी, आटोमोबाईल, मोबाइल उत्पादन, बुनियादी क्षेत्रों का विकास, स्टार्ट अप्स, ड्रोन, हरित ऊर्जा और अंतरिक्ष जैसे क्षेत्रों में भी  भारत अपने आप को तेजी से वैश्विक स्तर पर एक लीडर के रूप में स्थापित करने की ओर अग्रसर हो गया है। इस प्रकार आर्थिक प्रगति के बल पर भारत एक बार पुनः अपने आप को विश्व गुरु के रूप में स्थापित करने जा रहा है। भारत विश्व में विकास के इंजन के रूप में उभर रहा है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष ने कहा है कि वर्ष 2024 में वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद की वृद्धि में भारत का योगदान 16 प्रतिशत से भी अधिक का रहने वाला है। जब अन्य देशों की विकास दर कम हो रही हैं तब भारत में आर्थिक विकास दर तेज हो रही हैं। केंद्र सरकार द्वारा देश में लागू की जा रही आर्थिक नीतियों एवं देश में मंदिर अर्थव्यवस्था एवं धार्मिक पर्यटन के बढ़ते आधार के चलते ही यह सम्भव हो पा रहा है। प्रहलाद सबनानी 

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लेख रामकृष्ण परमहंस ब्रह्मर्षि, देवर्षि एवं त्रिकालदर्शी थे

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