समाज हर साल दो लाख लोगों के देश की नागरिकता छोड़ने के मायने

हर साल दो लाख लोगों के देश की नागरिकता छोड़ने के मायने

देश की नागरिकता छोड़ने वालों के ये आंकड़े केवल संख्या नहीं हैं बल्कि गहरे सामाजिक-आर्थिक और राजनीतिक संकेत हैं। जब संसद को बताया जाता है…

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समाज भाई दूर, पड़ोसी नेड़े — आधुनिक जीवन में पड़ोसी संबंधों की प्रासंगिकता

भाई दूर, पड़ोसी नेड़े — आधुनिक जीवन में पड़ोसी संबंधों की प्रासंगिकता

आधुनिक और तथाकथित उन्नत जीवन-शैली में पड़ोसी संबंध लगातार कमजोर होते जा रहे हैं। महानगरों की ऊँची-ऊँची इमारतों में लोग वर्षों तक साथ रहते हैं,…

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शख्सियत गुुरु गोविन्द सिंहः हिन्दू धर्म और संस्कृति के रक्षक

गुुरु गोविन्द सिंहः हिन्दू धर्म और संस्कृति के रक्षक

गुरु गोविंद सिंह जी का जन्म 22 दिसंबर 1666 को पटना साहिब (वर्तमान बिहार) में हुआ। उनके पिता गुरु तेग बहादुर जी सिखों के नौवें…

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कला-संस्कृति कालचक्र के नये पड़ाव के स्वागत की बेला

कालचक्र के नये पड़ाव के स्वागत की बेला

यह परम्परा प्रागैतिहासिक काल से चली आ रही है। दुनिया भर के तमाम समाजों, जातियों और समुदायों, सम्प्रदायों में अलग-अलग ढंग से, अलग-अलग तिथियों, महीनों…

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विश्ववार्ता बांग्लादेशः सत्ता-संघर्ष, कट्टरपंथ और लोकतंत्र की अनिश्चित राह

बांग्लादेशः सत्ता-संघर्ष, कट्टरपंथ और लोकतंत्र की अनिश्चित राह

17 वर्षों के स्वनिर्वासन के बाद बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के पुत्र और बांग्लादेश राष्ट्रवादी पार्टी (बीएनपी) के कार्यवाहक अध्यक्ष तारिक रहमान की…

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लेख वन्यजीवन विकास की पटरी पर कुचला

वन्यजीवन विकास की पटरी पर कुचला

दिसंबर 2025 में असम के होजाई ज़िले में सात हाथियों—जिनमें शावक भी शामिल थे—की रेल दुर्घटना में हुई मृत्यु कोई साधारण हादसा नहीं थी। यह…

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मनोरंजन सुबह की चाय से मोबाइल तक : अखबार की जगह सोशल मीडिया

सुबह की चाय से मोबाइल तक : अखबार की जगह सोशल मीडिया

अख़बार केवल समाचारों का संग्रह नहीं होता, बल्कि वह ज्ञान, भाषा, विचार और दृष्टिकोण को विकसित करने का सशक्त माध्यम है। अख़बार पढ़ने से बच्चों…

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राजनीति जरा एक पत्थर तो तबियत से उछालो यारो

जरा एक पत्थर तो तबियत से उछालो यारो

एक तरह से यह भारतीय राष्ट्र के समक्ष एक बहुत बड़ी आपदा जैसे टूट पड़ी हो लेकिन मोदी सरकार ने इस आपदा को कुछ ऐसे…

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समाज शहरों की ओर युवाओं का बढता पलायन चिंताजनक

शहरों की ओर युवाओं का बढता पलायन चिंताजनक

हमारा देश एक कृषि प्रधान देश है जिसकी आत्मा आज भी गांवों में बसती है किंतु वर्तमान समय में ग्रामीण युवाओं का बड़े पैमाने पर…

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शख्सियत कविता, करुणा और कूटनीति का अद्भुत संगम थे अटल बिहारी वाजपेयी

कविता, करुणा और कूटनीति का अद्भुत संगम थे अटल बिहारी वाजपेयी

सही मायने में अटल जी भारतीय राजनीति के आकाश का ध्रुवतारा थे। उनकी शख्सियत ऐसी थी कि हर राजनीतिक दल में उनकी स्वीकार्यता रही। 2005…

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लेख अरावली की चिन्ताः नारे से आगे, अस्तित्व की लड़ाई

अरावली की चिन्ताः नारे से आगे, अस्तित्व की लड़ाई

अरावली की आयु भूगर्भीय दृष्टि से करोड़ों वर्षों में आंकी जाती है। यह हिमालय से भी पुरानी है। यही कारण है कि अरावली का स्वरूप…

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विश्ववार्ता सच से कब तक मुंह मोड़ोगे?

सच से कब तक मुंह मोड़ोगे?

वस्तुत: बांग्लादेश में शेख हसीना सरकार के तख्तापलट के बाद जितने भी घटनाक्रम हो रहे हैं। हिंदुओं का नरसंहार हो रहा है। वो कोई निजी…

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