कविता शोक-सभा के कौए

शोक-सभा के कौए

काले पंख फैलाए

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खान-पान फास्ट फूड: बच्चों की प्लेट में जोखिम

फास्ट फूड: बच्चों की प्लेट में जोखिम

सीधे-सीधे कहें तो फास्ट फूड वही खाना है जो झटपट मिल जाए और झटपट खा लिया जाए। न ज़्यादा इंतज़ार, न ज़्यादा मेहनत । इसकी…

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राजनीति पुनरावलोकन 2025  : पांच की कसौटी पर ’25’

पुनरावलोकन 2025  : पांच की कसौटी पर ’25’

अपने तीसरे कार्यकाल मेंएनडीए की सरकार ने 2025 में साफ कर दिया कि सत्ता में निरंतरता केवल उपलब्धि नहीं, बल्कि जिम्मेदारी भी है। नीतियों की…

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पर्यावरण अरावली पर सरकार की मंशा आखिर क्या थी?

अरावली पर सरकार की मंशा आखिर क्या थी?

विशेषज्ञों का कहना था कि सरकार और सुप्रीम कोर्ट के इस कदम से 100 मीटर से कम ऊंचाई वाली महत्वपूर्ण पहाड़ियां संरक्षण से बाहर हो…

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समाज बढ़ते कामकाजी जीवन के दबाव में बिखरते परिवार

बढ़ते कामकाजी जीवन के दबाव में बिखरते परिवार

व्यस्ततम, घटनाबहुल एवं कामकाजी जिंदगी जीने के साथ परिवार के लिए वक्त निकालना आज के इंसान के लिए ज्यादा जरूरी हो गया है। परिवार से…

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खान-पान खैनी, जर्दा, तम्बाकू और शराब दे रहे कैंसर का दंश… ओरल कैंसर के 62 फीसदी मामलों के लिए जिम्मेदार

खैनी, जर्दा, तम्बाकू और शराब दे रहे कैंसर का दंश… ओरल कैंसर के 62 फीसदी मामलों के लिए जिम्मेदार

भारत में मुंह के कैंसर के हर दस में से छह यानी 62 फीसदी मामलों के लिए ये ही जिम्मेदार है। यानी जब शराब और तंबाकू साथ-साथ शरीर में जाते हैं तो उनका असर मिलकर कई गुणा ज्यादा जानलेवा हो जाता है। 

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विश्ववार्ता बंगलादेश में हिंदुओं के उत्पीड़न पर आखिर खामोश क्यों हैं दुनिया के लोग?

बंगलादेश में हिंदुओं के उत्पीड़न पर आखिर खामोश क्यों हैं दुनिया के लोग?

दि हालिया घटनाओं पर नजर दौड़ाएं तो पता चलता है कि नवंबर 2024 से जनवरी 2025 तक 76 हमले दर्ज हुए, जबकि अगस्त 2024 से अब तक 23 हिंदुओं की हत्या और 152 मंदिरों पर आक्रमण की खबरें हैं। वहीं, 2025 में राजबाड़ी जिले में अमृत मंडल और दीपू चंद्र दास जैसे हिंदू युवकों की 

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आर्थिकी भारत@2025: सामर्थ्य, संतुलन और संकल्प का निर्णायक दौर

भारत@2025: सामर्थ्य, संतुलन और संकल्प का निर्णायक दौर

अर्थव्यवस्था से अंतरिक्ष तक भारत की ऐतिहासिक उपलब्धियां– योगेश कुमार गोयलभारत के लिए वर्ष 2025 केवल एक कैलेंडर वर्ष नहीं बल्कि एक ऐसे संक्रमणकाल का…

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लेख पेंशन का सवाल: नेता और विधायक मालामाल, जनता और कर्मचारी बेहाल

पेंशन का सवाल: नेता और विधायक मालामाल, जनता और कर्मचारी बेहाल

एक से अधिक पेंशन, यात्रा भत्ते की सर्वसम्मति और 60 साल सेवा के बाद भी पेंशन से वंचित कर्मचारी—लोकतंत्र की उलटी प्राथमिकताओं की कहानी

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मनोरंजन सोशल मीडिया : वरदान भी, अभिशाप भी

सोशल मीडिया : वरदान भी, अभिशाप भी

आज वृद्ध, युवा और बालक—सभी वर्गों के लोग अपने समय का बड़ा हिस्सा मोबाइल स्क्रीन पर बिताने लगे हैं। पारिवारिक संवाद, सामाजिक मेल-जोल और वास्तविक…

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समाज नक्सली आतंक से पूर्ण मुक्ति की ओर लाल गलियारा

नक्सली आतंक से पूर्ण मुक्ति की ओर लाल गलियारा

माओवादी अर्से से देश में एक ऐसी जहरीली विचारधारा रही है, जिसे नगरीय बौद्धिकों का समर्थन मिलता रहा है। ये बौद्धिक नक्सली संगठनों को आदिवासी…

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विश्ववार्ता दोस्ती, राजनीति और दूरी: बांग्लादेश-भारत संबंधों की बदलती कहानी

दोस्ती, राजनीति और दूरी: बांग्लादेश-भारत संबंधों की बदलती कहानी

शेख हसीना ने भारत के समर्थन के साथ बांग्लादेशी राजनीति में मजबूती प्राप्त की। अवामी लीग का सत्ता में बने रहना भारत की नीति का…

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