धर्म-अध्यात्म क्या हमें अपने पूर्वजन्म एवं पुनर्जन्म होने के सिद्धान्त का ज्ञान है?

क्या हमें अपने पूर्वजन्म एवं पुनर्जन्म होने के सिद्धान्त का ज्ञान है?

-मनमोहन कुमार आर्यमनुष्य हो या इतर प्राणी, सभी जन्म व मरण के चक्र में फंसे हुए हैं। संसार में हम देखते हैं कि जिसका जन्म…

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कविता दिल्ली सल्तनत

दिल्ली सल्तनत

–विनय कुमार विनायकऐ गोरी! मुहम्मद गोरी!ग्यारह सौ बेरानबे ईस्वी में‘तराईन में ‘गुल’ ‘खिला’ ‘तु’ ‘से’ ‘लो’दिल्ली में सल्तनत स्थापित कर ली(गुलाम-खिल्जी-तुगलक-सैयद-लोदी)ऐ गोरी ! मुहम्मद गोरी!पर…

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लेख उच्च शिक्षा स्वभाषाओं में ?

उच्च शिक्षा स्वभाषाओं में ?

डॉ. वेदप्रताप वैदिकशिक्षा मंत्री डाॅ. रमेश पोखरियाल निशंक ने आज घोषणा की है कि उनका मंत्रालय उच्च शिक्षा में भारतीय भाषा के माध्यम को लाने…

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राजनीति समय की मांग है, एकसाथ चुनाव

समय की मांग है, एकसाथ चुनाव

प्रमोद भार्गव अनेक असमानताओं, विसंगतियों और विरोधाभासों के बावजूद भारत एक सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के सूत्र से बंधा हुआ है। निर्वाचन प्रक्रिया राष्ट्र को एक ऐसी…

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खेत-खलिहान कृषि कानूनों का भ्रम

कृषि कानूनों का भ्रम

प्रमोद भार्गव तीन नए कृषि कानूनों के विरोध को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विपक्ष को आईना दिखाया है। उन्होंने कहा, ‘जिनका इतिहास छल का…

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राजनीति जम्मू-कश्मीर में रोहिंग्याओं को बसाने का षड्यंत्र

जम्मू-कश्मीर में रोहिंग्याओं को बसाने का षड्यंत्र

प्रमोद भार्गव जम्मू-कश्मीर में लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहे फारुख अब्दुल्ला, महबूबा मुफ्ती, गुलाम नबी आजाद और उमर अब्दुल्ला ने घाटी के मूल निवासी पंडितों…

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लेख सकारात्मक सोच एवं संकल्पों को बुनें

सकारात्मक सोच एवं संकल्पों को बुनें

– ललित गर्ग –कोरोना महासंकट से उबरते हुए हमें एक नयी जीवनशैली विकसित करनी होगी, जिसमें नकारात्मकता, अवसाद और तनाव के अंधेरों को हटाकर जीवन…

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राजनीति एक देश एक चुनाव के प्रधानमंत्री की सराहनीय पहल

एक देश एक चुनाव के प्रधानमंत्री की सराहनीय पहल

हमारे देश में प्रत्येक वर्ष कभी ग्राम पंचायतों के कभी नगरपालिका या महानगरपालिकाओं के तो कभी विधायकों के और कभी लोकसभा के चुनाव आते रहते…

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लेख बुढ़ापा नहीं है ‘अंत’

बुढ़ापा नहीं है ‘अंत’

हिमांशु प्रभाकर अक्सर लोग बूढ़े व्यक्ति की अवस्था देखकर उसे इच्छा विहीन समझ लेते हैं और ऐसी व्यवस्था बनाते हैं जिनकी खुशियों के उत्सव में…

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लेख शून्य से शिखर के धनी भामाशाह: महाशय धर्मपाल आर्य

शून्य से शिखर के धनी भामाशाह: महाशय धर्मपाल आर्य

-विनोद बंसल “जब हम जन्मे जगत में, जग हंसा हम रोये। ऐसी करनी कर चलें, हम हंसें, जग रोय।।

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राजनीति किसान आंदोलन: सरकार के नए कृषि कानूनों का क्यों हो रहा है विरोध?

किसान आंदोलन: सरकार के नए कृषि कानूनों का क्यों हो रहा है विरोध?

केन्द्र सरकार सितंबर माह में 3 नए कृषि विधेयक लाई थी, जिस पर राष्ट्रपति की मुहर लगने के बाद वे कानून बन चुके हैं. लेकिन…

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कविता भक्त भ्रष्ट हो जाते हैं नौकरी के मिलते

भक्त भ्रष्ट हो जाते हैं नौकरी के मिलते

—विनय कुमार विनायकअवैध कमाते हैं जो, अहंकार में इतराते,अवैध अवैध होता वो समझ नहीं पाते! ईश्वर भक्ति है दिखावा उन कर्मियों का,जो बिन नजराने जनसेवा…

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