कविता कोरोना की करवाचौथ

कोरोना की करवाचौथ

मेरे साथ एक घटना घटी,बात बिल्कुल सच्ची है पर अटपटी |करवांचौथ का दिन था ,मेरा मन बड़ा ही खिन्न था ,दफ़्तर में काम ज्यादा था…

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आर्थिकी अर्थव्यवस्था के फिर से पटरी पर लौटने के संकेत

अर्थव्यवस्था के फिर से पटरी पर लौटने के संकेत

-ललित गर्ग-कोरोना वायरस के संक्रमण से जुड़ी खबरों ने फिलहाल थोड़ी राहत भले ही दी है, लेकिन खतरा टला नहीं है, इसके संकेत भी साफ…

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आर्थिकी भारतीय अर्थव्यवस्था में हो सकती है V आकार की बहाली

भारतीय अर्थव्यवस्था में हो सकती है V आकार की बहाली

अर्थशास्त्र में V आकार की बहाली से आश्य यह है कि जिस तेज़ी से अर्थव्यवस्था में ढलान देखने में आया था उतनी ही तेज़ी से…

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राजनीति लव जिहाद और राणा जैसे बयान दो समुदायों के बीच नफरत पैदा करते है।

लव जिहाद और राणा जैसे बयान दो समुदायों के बीच नफरत पैदा करते है।

रात हलाला नेक है, उठते नहीं सवाल ! राम नाम की दक्षिणा,पर क्यों कटे बवाल !!लव जिहाद और राणा जैसे बयान दो समुदायों के बीच…

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व्यंग्य नाम ही नहीं, विचारों में भी करना होगा बदलाव

नाम ही नहीं, विचारों में भी करना होगा बदलाव

सुशील कुमार ‘नवीन’ मॉर्निंग वॉक में मेरे साथ अजीब किस्से घटते ही रहते हैं। कोशिश करता हूं कि बचा रहूं पर हालात ही ऐसे बन…

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महिला-जगत करवा चौथ पर पाएं दमकती त्वचा

करवा चौथ पर पाएं दमकती त्वचा

– श्वेता गोयल भारत में सुहागिन महिलाओं का सबसे बड़ा त्यौहार है ‘करवा चौथ’, जो दाम्पत्य जीवन में एक-दूसरे के प्रति समर्पण का अनूठा पर्व…

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धर्म-अध्यात्म यज्ञ करने से मनुष्य को सुख प्राप्ति सहित कामनाओं की पूर्ति होती है

यज्ञ करने से मनुष्य को सुख प्राप्ति सहित कामनाओं की पूर्ति होती है

–मनमोहन कुमार आर्य                 यज्ञ वेदों से प्राप्त हुआ एक शब्द है। इसका अर्थ होता है श्रेष्ठ व उत्तम कर्म। श्रेष्ठ कर्म वह होता है…

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आलोचना हिन्दी वालों की हिन्दी वालों से हिन्दी के लिए लड़ाई.

हिन्दी वालों की हिन्दी वालों से हिन्दी के लिए लड़ाई.

·   डॉ. अमरनाथ “पूजनीय बड़े पिता जी और माता जी, आप लोग मुझे माफ कर देना. मैं आपका अच्छा बेटा नहीं बन पाया…… मैं जा रहा…

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विश्ववार्ता उदारता की बजाय पड़ोस में सजगता की जरूरत है।

उदारता की बजाय पड़ोस में सजगता की जरूरत है।

—-प्रियंका सौरभ  पड़ोस में शांति हो, तो इन्सान चैन की नींद सोता है, लेकिन यह शांति तभी बनी रह सकती है, जब पड़ोसी के साथ-साथ…

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समाज मुख्यधारा से अभी भी दूर है पहाड़िया समाज

मुख्यधारा से अभी भी दूर है पहाड़िया समाज

अमरेन्द्र सुमन दुमका, झारखंड संथाल परगना प्रमण्डल के हरित पर्वत मालाओं, घने जंगलों, स्वच्छंद नदी-नालों तथा प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा के लिए अंग्रेजों, जमींदार और…

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आर्थिकी ग़रीबी रेखा को पुनर्निर्धारित करने का समय अब आ गया है

ग़रीबी रेखा को पुनर्निर्धारित करने का समय अब आ गया है

भारत में ग़रीबी रेखा के नीचे जीवन यापन कर रहे लोगों की संख्या में भारी कमी देखने में तो आई है परंतु क्या उन्हें स्वास्थ्य,…

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राजनीति ये ‘चिराग़’ कोई चिराग़ है,न जला हुआ न बुझा हुआ ?

ये ‘चिराग़’ कोई चिराग़ है,न जला हुआ न बुझा हुआ ?

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