राजनीति समावेशी राजनीति के प्रतीक थे प्रणव दा

समावेशी राजनीति के प्रतीक थे प्रणव दा

दलगत भावनाओं से ऊपर उठकर जीने वाले, भारत रत्न,पूर्व राष्ट्रपति श्री प्रणव मुखर्जी भौतिक जगत को छोड़कर परमधाम के लिए गमन कर गए | देश…

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कविता सुबह से शाम तक

सुबह से शाम तक

सुबह से शाम तकसूर्य की रक्ताभ किरणेंफैली -पसरी रही धरा परजीवन का सुख- दुखहर क्षण हम आत्मसात करते रहेकेवल नहीं मिली हमें प्रेम कलिकाएं…वह प्रेमजिसको…

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मनोरंजन आमिर खान : शत्रु देश में शूटिंग से विवाद

आमिर खान : शत्रु देश में शूटिंग से विवाद

आमिर खान तुर्की में गये तो फ़िल्म की शूटिंग के लिए हैं किन्तु वे वहाँ राजनीतिक व्यक्तियों से मेल जोल बढ़ाते हुए दीख रहे हैं…

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समाज कोरोना काल में बढ़ेगा कुपोषण का प्रभाव?

कोरोना काल में बढ़ेगा कुपोषण का प्रभाव?

कोरोना वायरस दिन दूनी रात चौगुनी के साथ विस्तार ले रहा है। इस वायरस के बढ़ते आंकड़ो ने न केवल हमारी ज़िंदगी की रफ़्तार पर…

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धर्म-अध्यात्म सत्य सिद्धान्तों के प्रचार से ही देश व समाज का कल्याण होगा

सत्य सिद्धान्तों के प्रचार से ही देश व समाज का कल्याण होगा

-मनमोहन कुमार आर्य                 संसार के सभी मनुष्य एक समान हैं। जन्म से सब एक समान व अज्ञानी उत्पन्न होते हैं। जीवन में ज्ञान की…

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राजनीति जातीय नहीं, शैक्षणिक आरक्षण दें

जातीय नहीं, शैक्षणिक आरक्षण दें

डॉ. वेदप्रताप वैदिक सर्वोच्च न्यायालय ने एक बार फिर जातीय आरक्षण के औचित्य पर प्रश्न-चिन्ह लगा दिया है। पांच जजों की इस पीठ ने अपनी…

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राजनीति तानाशाही और सोनिया गांधी

तानाशाही और सोनिया गांधी

डॉ. वेदप्रताप वैदिककांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने अब फिर देश को बासी कढ़ी परोस दी। मां ने बेटे को भी मात कर दिया। छत्तीसगढ़ विधानसभा…

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आर्थिकी भारतीय संस्कृति को बढ़ावा देकर भी देश की अर्थव्यवस्था को दी जा सकती है गति

भारतीय संस्कृति को बढ़ावा देकर भी देश की अर्थव्यवस्था को दी जा सकती है गति

  देश में संस्कृति की अर्थव्यवस्था पर आज तक ग़ौर नहीं किया गया है और इस तरह के  मुद्दे पर देश में शायद सारगर्भित चर्चा…

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मीडिया मीडिया में रिया चालीसा का ही जाप क्यों?

मीडिया में रिया चालीसा का ही जाप क्यों?

-ः ललित गर्ग:-भारत में एक नई आर्थिक सभ्यता और एक नई जीवन संस्कृति करवट ले रही है, तब उसके निर्माण में प्रभावी एवं सशक्त भूमिका…

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कविता बूढा पीपल हैं कहाँ,गई कहाँ चौपाल !!

बूढा पीपल हैं कहाँ,गई कहाँ चौपाल !!

— डॉo सत्यवान सौरभ, अपने प्यारे गाँव से, बस है यही सवाल !बूढा पीपल हैं कहाँ,गई कहाँ चौपाल !! रही नहीं चौपाल में, पहले जैसी…

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लेख भारतीय भाषाएँ : दशा, दिशा और भविष्य

भारतीय भाषाएँ : दशा, दिशा और भविष्य

राहुल देव सारी भारतीय भाषाएं अपने जीवन के सबसे गंभीर संकट के मुहाने पर खड़ी हैं। यह संकट अस्तित्व का है, महत्व का है, भविष्य…

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धर्म-अध्यात्म वेदाध्ययन व वेद प्रचार से अविद्या दूर होकर विद्या वृद्धि होती है

वेदाध्ययन व वेद प्रचार से अविद्या दूर होकर विद्या वृद्धि होती है

-मनमोहन कुमार आर्य                 मनुष्य एक ज्ञानवान प्राणी होता है। मनुष्य के पास जो ज्ञान होता है वह सभी ज्ञान स्वाभाविक ज्ञान नहीं होता। उसका…

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