कविता भारत की पलायन करती अर्थव्यवस्था यानी मज़दूरों को सादर समर्पित

भारत की पलायन करती अर्थव्यवस्था यानी मज़दूरों को सादर समर्पित

गर लौट सका तो जरूर लौटूंगा, तेरा शहर बसाने को।पर आज मत रोको मुझको, बस मुझे अब जाने दो।।मैं खुद जलता था तेरे कारखाने की…

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धर्म-अध्यात्म आत्मा की उन्नति के बिना सामाजिक तथा देशोन्नति सम्भव नहीं

आत्मा की उन्नति के बिना सामाजिक तथा देशोन्नति सम्भव नहीं

-मनमोहन कुमार आर्य                मनुष्य मननशील प्राणी को कहते हैं। मनन का अर्थ सत्यासत्य का विचार करना होता है। सत्यासत्य के विचार करने की सामथ्र्य…

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प्रवक्ता न्यूज़ लॉक डाउन में शादी

लॉक डाउन में शादी

भेज रहे है प्रेम निमंत्रण,प्रियवर तुम्हे दिखावे को।आ जाना न कभी भूल से,तुम यहां खाने को।। लॉक डाउन देश में लगा हुआ है,बारात में कोई…

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कहानी चुहिया माँ

चुहिया माँ

खेतों में मकई न केवल पक चुका था, बल्कि खमार-खलिहान में थ्रेसिंग के लिए आ चुका था । बारिश का मौसम तो नहीं था, किन्तु…

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विश्ववार्ता प्रवासी मज़दूर या मजबूरियाँ प्रवासी

प्रवासी मज़दूर या मजबूरियाँ प्रवासी

✍? *डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’* चिलचिलाती धूप और तेज़ पड़ती गर्मी, कराहती धरती और उस पर चलते भारत के नवनिर्माता के पाँव में होते छाले,…

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धर्म-अध्यात्म संसार का ईश्वर के एक सत्यस्वरूप पर सहमत न होना कल्याणकारी नहीं

संसार का ईश्वर के एक सत्यस्वरूप पर सहमत न होना कल्याणकारी नहीं

-मनमोहन कुमार आर्य        हमारा यह संसार एक अपौरुषेय सत्ता द्वारा बनाया गया है। वही सत्ता इस संसार को बनाती है व चलाती भी है।…

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धर्म-अध्यात्म विश्व की सभी अपौरुषेय रचनायें ईश्वर के अस्तित्व का प्रमाण हैं

विश्व की सभी अपौरुषेय रचनायें ईश्वर के अस्तित्व का प्रमाण हैं

–मनमोहन कुमार आर्य                अधिकांश मनुष्यों को यह नहीं पता कि संसार में ईश्वर है या नहीं? जो ईश्वर को मानते हैं वह भी ईश्वर…

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धर्म-अध्यात्म ऋषि दयानन्द वेद, योग तथा ब्रह्मचर्य की शक्तियों से देदीप्यमान थे

ऋषि दयानन्द वेद, योग तथा ब्रह्मचर्य की शक्तियों से देदीप्यमान थे

-मनमोहन कुमार आर्य                ऋषि दयानन्द संसार के सभी मनुष्यों व महापुरुषों से अलग थे। उनका जीवन वेदज्ञान, योग सिद्धि तथा ब्रह्मचर्य की शक्तियों से…

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प्रवक्ता न्यूज़ वक़्त ने ऐसा वक़्त कभी देखा नहीं था

वक़्त ने ऐसा वक़्त कभी देखा नहीं था

जिंदगी तो चल रही है पर कभी, वक़्त ने ऐसा वक़्त देखा नहीं था । दुश्मन केवल एक था दिखता न था सारी दुनिया के…

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कविता बस करो बस की सियासत को ।

बस करो बस की सियासत को ।

बस करो बस की सियासत को,और न बढ़ाओ इस आफत को।मजदूर पहले से ही परेशान है,और न कम करो उसकी हिम्मत को।। बेबस था पहले…

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लेख स्वदेशी आंदोलन के अग्रणी महानायक राष्ट्रवादी दिव्यद्रष्टा बिपिन चन्द्र पाल

स्वदेशी आंदोलन के अग्रणी महानायक राष्ट्रवादी दिव्यद्रष्टा बिपिन चन्द्र पाल

दीपक कुमार त्यागी हमारे देश की आजादी में ‘गरम दल’ के ‘लाल-बाल-पाल’ की मशहूर तिकड़ी की बहुत ही अहम भूमिका मानी जाती है, इस महान…

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लेख हिंदी का पहला ‘ध्वनि व्याकरण’

हिंदी का पहला ‘ध्वनि व्याकरण’

■लेखक : डॉ. सदानंद पॉल जब मैंने 2000-2001ई. में हिंदी शब्द ‘श्री’ को 2,05,00,912 तरीके से लिखा । मूलरूप से उनमें 30,736 (कैलीग्राफी सहित) शब्दों…

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