उत्तर प्रदेश

उत्तर प्रदेश औद्योगिक विकास समिति 2018 के परिप्रेक्ष्य में कुछ महत्वपूर्ण सुझाव:

देवेंद्र सिंह आर्य प्रधानमंत्री मोदी जी की सेवा में महोदय, उत्तर प्रदेश के विकास की

उत्तर प्रदेश की उच्च मेडिकल शिक्षा

हर साल देश भर में 55,000 डॉक्टर अपना एमबीबीएस और 25,000 पोस्ट ग्रेजुएशन पूरा करते है। विकास की इस दर के साथ, वर्ष 2020 तक 1.3 बिलियन आबादी के लिए भारत में प्रति 1250 लोगों पर एक डॉक्टर (एलोपैथिक) होना चाहिए और और 2022 तक प्रति 1075 लोगों पर एक डॉक्टर होना चाहिए (जनसंख्यारू 1.36 बिलियन)। दूसरे विशेषज्ञ का कहना है कि, “हालांकि, समिति को सूचित किया गया है। एक रात में डॉक्टर नहीं बनाया जा सकता है और यदि हम अगले पांच सालों तक हर साल 100 मेडिकल कॉलेज जोड़ते हैं तभी वर्ष 2029 तक देश में डॉक्टरों की संख्या पर्याप्त होगी।“

गरीबों को मिल सकेगे सस्ते घर

एंटी भू माफिया अभियान के बाद एक के बाद सफेदपोश नेताओं व बाबुओं के चेहरे से नकाब उतर सकता हैं । यही कारण है कि अपने आप को बचाने के लिए अब सभी लोग महागठबंधन की बात करने लग गये हैं। ईवीएम की आलोचना होने लग गयी हे लोग अपनी गलतियों को सुधारने का प्रयास नहीं कर रहे हैं अपितु ओर अधिक गलतियां लगातार कर रहे है। यदि कहीं प्रदेशभर के विपक्ष ने नोटबंदी की तरह एंटी भू- माफिया अभियान का भी विरोध करना शुरू कर दिया तो यह दल अगले चुनावों में एक – एक सीट ही नहीं वोट के लिए भी तरस जायेंगे।

‘न्यू इंडिया’ और गांवों की समृद्घि का रास्ता

अब पुन: ‘न्यू इंडिया’ को भी अंग्रेजी में अभिव्यक्ति देना जंचता नहीं है। फिर भी ‘न्यू इंडिया’ अर्थात ‘नव भारत’ के निर्माण में गांव की भूमिका पर हम केन्द्र सरकार और राज्य सरकार दोनों से निवेदन करेंगे कि इस कार्य के लिए गांव को गंवारों का या पिछड़े लोगों का झुण्ड मानने की मानसिकता से इस देश के शिक्षित वर्ग को निकालने का प्रयास किया जाए। गांव के विकास की बात यहीं से प्रारंभ हो। देश का शिक्षित वर्ग आज भी गांव के लोगों से और गांव के परिवेश से वैसी ही घृणा करता है जैसी अंग्रेज किया करते थे। विदेशी शिक्षा को देश में लागू करोगे तो ऐसे ही परिणाम आएंगे। गांव के प्रति ऐसी घृणास्पद मानसिकता के परिवर्तित करने के लिए शिक्षा का भारतीयकरण किया जाए।

उत्तर प्रदेश व उत्तराखंड में भाजपा की जीत के ऐतिहासिक मायने

आज भाजपा की जीत के लिए सबसे बड़ा कारण यह भी है कि भाजपा को विगत तीन माह में जुमलेबाज पार्टी , नेता विहीन दल तीन साल मेंकोई काम न कर पाने वाले दल के रूप में अलंकृत किया गया था। जिसका लाभ आज भाजपा व सहयोगी दलों को मिल रहा है। विगत 27 सालों से किस न किसी प्रकार से सपा, बसपा और कांग्रेस ही प्रदेश मं राज कर रहे थे लेकिन यह सभी दल अपनी नाकामियों को छिपाते हुए प्रदेश के बिगड़ते हुए हालातांे के लिए पीएम मोदेी व भाजपा को जिम्मेदार मान रहे थे। सबसे बड़ी राहत की बात यह मिली हे कि एग्जिट पोलों के तुरंत बाद ही मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने बिना किसी देरी के अपनी बुआ के साथ प्यार की पेंगे बढ़ानी शुरू कर दी थी

कौन जीता कौन हारा

इन चुनाव परिणामों की गंभीरता से समीक्षा की जानी अपेक्षित है। सर्वप्रथम हम उत्तर प्रदेश पर आते हैं, यहां की जनता ने सपा के परिवारवाद, पारिवारिक कलह, साम्प्रदायिक तुष्टिकरण की नीति, शासन प्रमुख का जातिवादी दृष्टिकोण पर अपना नकारात्मक दृष्टिकोण स्पष्ट कर दिया है। इसी प्रकार बसपा के खुरपा व बुरका के समीकरण को सिरे से नकार दिया है। कुमारी मायावती ने इन चुनावों को पूर्णतया साम्प्रदायिक आधार पर लड़ते हुए मुस्लिम मतों को अपने साथ लाने हेतु 100 से अधिक टिकट मुस्लिम प्रत्याशियों को दिये।