काला धन

काला धन अपनी सत्ता खो बैठा

सरकार के इस क़दम से घबराहट तो पाकिस्तान की आई एस आई में है , पाकिस्तान के उन तस्करों में है जो नेपाल और बंगलादेश के रास्ते तस्करी में अरसे से संलग्न थे । नोटों के बन्द होने से इन की कमर टूट गई है । सीमा के उस पार भी घबराहट है और जो आतंकी अन्दर घुस चुके हैं , उनके भी हाथ पाँव फूले हुए हैं । काग़ज़ के जिन नोटों की झलक दिखा कर वे घाटी के लोगों को सड़कों पर नाच नचवाते थे उन नोटों की ताक़त अब समाप्त हो गई है । कश्मीर घाटी के आतंकी संगठनों की हालत पंचतंत्र के उस चूहे के समान हो गई है , जिस के बिल के नीचे से स्वर्ण मुद्राओं से भरा घड़ा निकाल लिया गया है और अब वह लाख ज़ोर लगाने पर भी दूर खूँटी पर लटके सत्तू के थैले तक नहीं पहुँच पा रहा है ।

‘काला धन’: घबराइए मत

जहां तक नगदप्रेमी करोड़पतियों, अरबपतियों, खरबपतियों और हमारे महान नेताओं का प्रश्न है, उन्हें भी ज्यादा डरने की जरुरत नहीं है। वे अपने हजारों कर्मचारियों और लाखों पार्टी-कार्यकर्ताओं में से एक-एक को लाखों पुराने नोट देकर उन्हें नये नोटों में बदलवा सकते हैं। उप्र के नेताओं ने यह ‘पवित्र कार्य’ शुरु भी कर दिया है। नेता ही नेता को पटकनी मार सकते हैं। जाहिर है कि सरकार डाल-डाल है तो सेठ और नेता पात-पात हैं।

काला धन पर लगाम लगना शुरू

पांच सौ और हजार रुपए के नोट के चलन पर रोक लगाने के केंद्र सरकार के फैसले का लोगों ने स्वागत किया है। देश से कालाधन समाप्त करने के लिए सरकार द्वारा उठाए गए कदमों का लोगों ने हमेशा समर्थन किया है। मध्यवर्ग, किसानों, व्यवसायियों, छात्र, गृहिणियों की समस्या को देखते हुए पुराने करेंसी नोट के बदले नए करेंसी नोट का प्रचलन प्रभावी तरीके से जल्द होना चाहिए। ज

काला धन : कुछ सवाल?

इस सफलता का एक कारण यह भी हो सकता है कि अपनी धनराशि उजागर करने वालों के नाम सरकार ने मजबूती से दबाकर रखे हैं। उन्हें बदनामी का कोई डर नहीं है। लगभग 30 हजार करोड़ रु. सरकार को इन लोगों से आयकर के रुप में प्राप्त होंगे।