तमिलनाडु

राष्ट्र के ब्रह्मा, विष्णु, महेश

जब उसे विश्वमंचों पर देश के नायक के रूप में अपनी बात कहने का अवसर मिलता है। पंडित नेहरू, इंदिरा गांधी और अटल जी ने अनेकों अवसरों पर विश्वमंचों पर देश का सम्मान बढ़ाया था, तब लोगों को लगता था कि उनके पास कोई नेता है। आज उसी परंपरा को नरेन्द्र मोदी आगे बढ़ा रहे हैं। उन्होंने चीन में या उससे पूर्व अन्य देशों में जाकर जो सम्मान अर्जित किया है उससे देश का मस्तक ऊंचा हुआ है। उन्होंने चीन की धरती से ठीक ही कहा है कि चीन के राष्ट्रपति ने प्रोटोकॉल तोडकऱ जिस प्रकार उनका सम्मान किया है वह मेरे देश के सवा अरब लोगों को दिया गया सम्मान है। जिस किसी ने भी मोदी के यह शब्द सुने उसी ने प्रसन्नता का अनुभव किया। हर व्यक्ति ने मोदी से अधिक स्वयं को गौरवान्वित अनुभव किया। कोई व्यक्ति मुख्यमंत्री रहते हुए प्रधानमंत्री बनने की सोच सकता है, और समय आने पर जनता की इच्छा से प्रधानमंत्री बन भी सकता है, यह एक अलग बात है।

एक मुस्लिम नास्तिक की हत्या

वे अपने मजहब की तौहीन इस प्रकार करते हैं कि वे उसमें अंधविश्वास करने की वकालत करते हैं। वे तर्क नहीं करना चाहते। वे वाद-विवाद से डरते हैं। क्या उनका धर्म या मजहब इतना पोंगापंथी है कि उस पर कोई बहस ही नहीं हो सकती? भारत में तो शास्त्रार्थ की परंपरा बहुत प्राचीन है। शंकराचार्य से लेकर महर्षि दयानंद तक धार्मिक मान्यताओं की बखिया उधेड़ते रहे हैं। भारत में नास्तिक मतों को भी पलने-पालने की बड़ी परंपरा है।

आपके लिए कौन रोएगा?

ऐसा नहीं है कि जयललिता ने तमिलनाडु की सारी समस्याएं हल कर दी हों और वहां की जनता अमन चैन की सांस ले रही हो। राज्य में अभी भी समस्याएं हैं जिनका हल निकाला जाना है। तमिलनाडु की तरह भारत के विभिन्न राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों में भी समस्याएं हैं।