धर्मनिरपेक्षता

गांधीवाद की परिकल्पना-7

नैतिक मूल्यों के आधार बनाकर भी गांधीवाद का एक धूमिल चित्र भारत में गांधीवादियों ने खींचने का प्रयास किया है। गांधीजी भारतीय राजनीति को धर्महीन बना गये। वह उसे संप्रदाय निरपेक्ष नहीं बना सके, अपितु उसे इतना अपवित्र करन् दिया है कि वह सम्प्रदायों के हितों की संरक्षिका सी बन गयी जान पड़ती है। इससे भारतीय राजनीति पक्षपाती बन गयी। जहां पक्षपात हो वहां नैतिक मूल्य ढूंढऩा ‘चील के घोंसले में मांस ढूढऩे के बराबर’ होता है। नैतिक मूल्य, नीति पर आधारित होते हैं नीति दो अक्षरों से बनी है-नी+ति। जिसका अर्थ है एक निश्चित व्यवस्था। नीति निश्चित व्यवस्था की संवाहिका है, ध्वजवाहिका है और प्रचारिका है।

भगवा योगी की जय ! अर्थात, सफेद-आतंकियों की पराजय

खुद ‘सफेद आतंक’ बरपाते रहे इन समाजवादियों-कांग्रेसियों
द्वारा मुस्लिम-वोटबैंक पर अपनी पकड बनाये रखने के लिए साम्प्रदायिक
तुष्टिकरण-आधारित विभेदकारी शासन से बहुसंख्यक समाज में उत्त्पन्न
असंतोष-अक्रोश ने योगी आदित्यनाथ के हिन्दूत्ववादी तेवर को धार देने और
पूरे प्रदेश में उसे चमकाने का काम किया ।