पाकिस्‍तान

धन लेकर अराजकता फैलाने वाले अलगाववादी

सरकार की नीतियों अथवा अपनी जायज मांगों को लेकर प्रदर्शन का अधिकार संविधान ने देश के हर एक नागरिक को दिया है। देशभर में आए दिन प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए कभी-कभी लाठीचार्ज किया जाता है या आसूं गैस अथवा तेज पानी की बौछारें छोड़कर उग्र होती भीड़ को काबू में लिया जाता है। लेकिन घाटी में प्रदर्शनकारियों पर नियंत्रण के लिए पैलेट गन के इस्तेमाल का अधिकार सेना और सुरक्षा बलों को मिला हुआ है।

पाकिस्तान को सबक सिखाना ही होगा

भारतीय सीमा पर हमारे दो जवानों की शहादत के बाद पाकिस्तान ने जो कायराना हरकत की, उसके जवाब में भारतीय सेना तुरंत हरकत में आई और उसने पाकिस्तान के दस सैनिक को मौत के घाट उतार दिया लेकिन पाकिस्तान भविष्य में कोई हरकत न कर सके, इसके लिए हमें तैयार रहना होगा और ऐसी ठोस रणनीति तैयार करनी होगी जिससे पाकिस्तान भारत की ओर मुंह उठाकर भी न देख सके। अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पाकिस्तान को घेरने की रणनीति पर भारत को एक बार फिर से कदम बढ़ाने होंगे। अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भारत को अपनी बात पुरजोर तरीके से रखना होगी ताकि दुनिया को पता चल सके कि पाकिस्तान भारत के लिए ही खतरा नहीं है बल्कि अन्य देशों के लिए भी खतरा बनता जा रहा है।

गांधीवाद की परिकल्पना-10

”अगर पाकिस्तान बनेगा तो मेरी लाश पर बनेगा” परंतु यह उनके जीते जी ही बन गया। हां! ये अलग बात है कि वह उनकी लाश पर न बनकर देश के असंख्य लोगों की लाशों पर बना। क्या ही अच्छा होता कि यदि वह केवल उनकी ही लाश पर बनता तो कम से कम जो अनगिनत निरपराध लोगों का रक्त बहाया गया, वह तो कम से कम बच जाता, और उनकी अनुपस्थिति में हमारे सरदार पटेल जैसे निर्भीक योद्घा जो निर्णय लेते उसका परिणाम अवश्यमेव सुखद ही होता।

बात मुद्दे की करो, बकवास न करो चीन

चीनी सरकार के साथ चीन की मीडिया का भारत के प्रति रुख लगातार धमकाने वाला है, जिससे भारत कतई नहीं डरने वाला। हाल ही में चीन के सरकारी मीडिया ने बीजिंग द्वारा अरुणाचल प्रदेश के छह स्थानों का नाम रखने पर भारत की प्रतिक्रिया को ‘बेतुका’ कहकर खारिज करते हुए चेताया कि अगर भारत ने दलाई लामा का ‘तुच्छ खेल’ खेलना जारी रखा तो उसे ‘बहुत भारी’ कीमत चुकानी होगी। दलाई लामा की अरूणाचल यात्रा से बौखलाये चीन ने इन छह स्थानों के ‘मानकीकृत’ आधिकारिक नामों की घोषणा कर पहले से जटिल चल रही स्थिति को और अधिक जटिल बना दिया है।

कश्मीर में सरकार आपकी पर ‘राज’ किसका?

घाटी के गुमराह नौजवानों को भी यह समझाने की जरूरत है कि कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है और रहेगा। पाकिस्तान और आईएस के झंडे दिखा रही ताकतों को जानना होगा कि भारत के संयम को उसकी कमजोरी न समझा जाए। इतनी लंबी जंग लड़कर पाकिस्तान को हासिल क्या हुआ है, उसे भी सोचना चाहिए। दुनिया बदल रही है। लड़ाई बदल रही है। कश्मीर घाटी में लोकतंत्र की विरोधी शक्तियां भी पराभूत होगीं, इसमें दो राय नहीं।

पाकिस्तान का एक और झूठ उजागर

इस संदेह को दूर करने के लिए मुसलमानों को भी राष्ट्र की मुख्य धारा में आने का प्रयास करना चाहिए, जिससे समाज के अंदर व्याप्त वैमनस्य के भाव को समाप्त करने में सहयोग मिल सके।
पाकिस्तान ने जिस प्रकार से कुलभूषण को मौत की सजा सुनाई है, उससे पाकिस्तान की नीयत में खोट दिखाई देता है। भारत ने जिस प्रकार से आतंकी कसाब को सारे प्रमाण होने के बाद भी वकील उपलब्ध कराकर उसे अपने आपको निर्दोष प्रमाणित करने की खुली छूट दी थी, लेकिन पाकिस्तान ने कुलभूषण को अधिकार होने के बाद भी किसी प्रकार की कोई सुनवाई का अधिकार नहीं दिया। ऐसा केवल इसलिए ही किया होगा, क्योंकि कुलभूषण भारत का बेटा है।

गुलाम कश्मीर में पाकिस्तान के विरुद्ध तेज होता जनविद्रोह

जम्मू-कश्मीर में आजादी के बाद से ही संवैधानिक व्यवस्था है और लोकतांत्रिक ढंग से चुनी गई सरकारें शासन व्यवस्था देखती हैं। इसलिए संयुक्त राष्ट्र का दायित्व बनता है कि वह गुलाम कश्मीर में इन रिपोर्टों के आधार पर वहां की जनता के आजादी के बुनियादी अधिकारों के बहाली की दिशा में उचित पहल करे। संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार घोषणा-पत्र के प्रति वचनबद्ध होने के कारण भारत का भी यह कर्तव्य बनता है कि वह

हे पाकिस्तान….अब तेरा क्या होगा?

उरी हमले की निन्दा देश के सभी दल एक स्वर में कर रहे हैं। निन्दा करनी भी चाहिए । भारत अपनी बहुत-सी विशेषताओं के लिए सदा प्रसिद्ध रहा है। जिसमें यह भी है कि भारत बहुत ही सोच समझ कर प्रत्येक कदम उठाता है। क्योंकि भारत एक शान्तिप्रिय राष्ट्र है, अतः शान्ति बनाये रखना इसका परम कर्तव्य स्वतः ही बन जाता है किन्तु शान्तिप्रिय होने का तात्पर्य यह भी नहीं है कि कोई हमारे एक गाल पर थप्पड़ मारे और हम दूसरा गाल आगे बढ़ाते हुए यह कहे कि ये भी बाकि है। सहने की भी कोई सीमा होती है, जब सीमा पूर्ण हो जाती है तब कुछ निश्चयात्मक सोचना ही पड़ता है। ऐसा ही कुछ भारत को सोचना और करना पड़ा।