बचपन

बारिश  और बचपन  

बचपन में बारिश हो और हम जैसे बच्चे घर में बैठे रहें, नामुमकिन था. किसी न किसी बहाने बाहर जाना था, बारिश की ठंडी फुहारों का आनन्द लेते हुए न जाने क्या-क्या करना था. हां, पहले से बना कर रक्खे विभिन्न साइज के कागज़ के नाव को बारिश के बहते पानी में चलाना और पानी में छप-छपाक करना सभी बच्चों का पसंदीदा शगल था.

न समाजवाद न बहुजनवाद : साईकिल के चक्कों में फंसा बचपन

अगर शिक्षा के प्रति बच्चों के ख़त्म होते रुझान की बात करें तो आपको इसका अंदाजा यहाँ के सरकारी विद्यालयों से लग जायेगा । यहाँ के विद्यालय में कहने को तो सारे बच्चों का एडमिशन है और शायद सभी बच्चे कुछ अहम मौके पर उपस्थित भी हो जाते हों पर पर सच्चाई ये थी की विद्यालय में इक्का दुक्का ही बच्चे थे । जब मैं उसी समय गाँव के अंदर गया तो मुझे कई बच्चे साइकिल के चक्के चलाते हुए दिखे ।