भाजपा

‘‘कह रहीम कैसे निभै, केर-बेर को संग’’

जहां तक गठबंधन धर्म का सवाल है तो यह लालू यादव की अहम जिम्मेदारी थी कि ऐसी स्थिति में तेजस्वी का मंत्रिमण्डल से इस्तीफा दिलवाकर गठबंधन धर्म का निर्वहन करते, पर लालू यादव पुत्र मोह में धृतराष्ट्र के अवतार साबित हुए। वस्तुतः लालू यादव जैसे लोगों के पास न तो कोई नीति है और न सिद्धांत। उनका एकमात्र सिद्धांत सत्ता और उसका निर्बाध भोग है। ठीक जैसे राहुल गांधी के चलते कांग्रेस पार्टी भले रसातल में चली जाए, पर राहुल को किनारे नहीं किया जा सकता।

विश्व भर के मुस्लिमों को राह दिखाएगा भारतीय मुस्लिम

हाल ही में जब कोर्ट ने केंद्र से तीन तलाक के विषय में कोर्ट में हलफनामा प्रस्तुत करनें के लिए कहा तब नरेंद्र मोदी सरकार ने पिछली सरकारों की तरह इस मुद्दें पर कन्नी काटने व चुप बैठे रहनें के स्थान पर संविधान की धारा 44 के मर्म को समझ कर अपनी जिम्मेदारी निभाई व तीन तलाक के मुद्दे पर स्पष्ट असहमति व्यक्त कर दी है. 1840 में यह विवाद प्रथम बार उभरा था और 1985 में राजीव गांधी सरकार के समय तो शाह बानो प्रकरण से यूनिफार्म सिविल कोड अतीव सुर्ख़ियों में आया था.

दिल्ली में सरपट दौड़ा भाजपा का विजयरथ

दिल्ली महानगर पालिका के चुनाव परिणाम के बाद जैसी आशंका व्यक्त की जा रही थी, वही दिखाई दे रहा है। चुनाव में उपयोग किए जा रहे विद्युतीय मतदान यंत्रों पर फिर से सवाल खड़े होने लगे हैं। सवाल खड़े करने वाले राजनीतिक दलों के कार्यकर्ता अपनी हार को हार नहीं मान रहे हैं, बल्कि वह यह बताना चाह रहे हैं कि हमारी हार ईवीएम मशीनों के कारण हुई है। जबकि सत्यता यही है कि जनता ने उन्हें हरा दिया है। इसके अलावा गंभीरता पूर्वक चिन्तन किया जाए तो एक बात और इस हार को प्रमाणित करती हुई दिखाई देती है। अगर हम चुनाव के बाद किए गए सर्वेक्षणों पर दृष्टि डालें तो यह विदित हो जाता है कि सभी सर्वे संस्थाओं ने भारतीय जनता पार्टी को विजय की तरफ जाते हुए बताया था। यह सर्वे संस्थाएं वास्तव जनता की आवाज के आधार पर ही अपना मत व्यक्त करते हैं। इसलिए विद्युतीय मतदान यंत्रों पर सवाल खड़े करना कहीं न कहीं लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर आघात ही कहा जा सकता है। यहां सबसे बड़ा सवाल यह है कि इन सर्वे संस्थाओं ने ईवीएम से पूछकर अपना सर्वे नहीं दिया था। यानी जनता ने जो मत व्यक्त किया, वही ईवीएम ने दिखाया।

अब और गहराएगा राम मंदिर का मुद्दा

आजादी के बाद 1949 में मस्जिद में भगवान राम की मूर्तियां पाई गई। एकाएक इन मूर्तियों के प्रकट होने पर मुस्लिमों ने विरोध जताया। दोनों पक्षों ने अदालत का दरवाजा खटखटाया। नतीजतन सरकार ने इस स्थल को विवादित घोषित कर ताला डाल दिया और दोनों संप्रदाओं के प्रवेश पर रोक लगा दी। 1984 में विहिप ने भगवान राम के जन्मस्थल को मुक्त करके वहां राम मंदिर का निर्माण करने के लिए एक समिति का गठन किया। इस अभियान का नेतृत्व भाजपा नेता लालकृष्ण आडवाणी ने संभाला। 1986 में जब केंद्र में प्रधानमंत्री राजीव गांधी की सरकार थी तब फैजाबाद के तत्कालीन कलेक्टर ने हिंदुओं को पूजा के लिए विवादित ढांचे के ताले खोल दिए। इसके परिणामस्वरूप मुस्लिमों ने बावरी मस्सिद संघर्ष समिति बना ली।

अमित शाह के लिए 11 सूत्र

उन्होंने भाजपा कार्यकर्त्ताओं से कहा है कि वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यकर्त्ताओं की तरह पूर्णकालिक बनें। उनके इस प्रस्ताव की स्वीकृति में लगभग 4 लाख कार्यकर्त्ताओं ने हाथ उठाए। कुछ ने एक साल, कुछ दस माह और कुछ ने 15 दिन पूर्णकालिक बनने का संकल्प किया। यह अमित शाह की अदभुत पहल है।

उपचुनाव परिणामों से भाजपा को मिला नया बल

भाजपा के लिए सबसे उत्साहजनक परिणाम दिल्ली की राजौरी गार्डैन विधानसभा सीट से आया हैं । यहां पर भाजपाको शनदार सफलता हासिल हुई है और कांग्रेस दूसरे नंबर पर रही हैं जबकि आप की तो जमानत तक जब्त हो गयी है। दिल्ली विधानसभ उपचुनाव को एमसीडी चुनावों के पहले का सेमीफाइनल माना जा रहा था। जिसको जीतने मंे भाजपा कामयाब रही है जबकि कांग्रेस दूसरे नंबरपर आने में सफल हो गयी।

राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ बनाम राष्ट्रीय कांग्रेस स्वयं सेवक संघ

संघ के स्वयंसेवक समाज – सेवा एवं राष्ट्र-निर्माण के लिये कठोर जीवन जीते हैं। उनका लक्ष्य राजनींति एवं सत्ता के माध्यम से सुविधायें न जुटाकर, पूरे देष मे सुदूर वनवासी क्षेत्रों तक में- पैदल तक चलकर, अनवरत काम करते हैं। हिन्दू समाज मे सामाजिक समरसता का भाव भरते हुये उसे एकता के सूत्र में पिरोते हैं। संघ मे लाखों-लाख ऐसे स्वयं सेवक हैं, जो आजीवन अविवाहित रहकर एकाकी जीवन जीकर अपने रक्त की एक-एक बूंद राष्ट्र के लिये समर्पित कर देते हैं। राष्ट्र-जीवन की भयावह समस्याओं के समक्ष अपने परिजनो के दुःख-दैन्य उनके लिये गौण हो जाते हैं।