भाजपा

राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ बनाम राष्ट्रीय कांग्रेस स्वयं सेवक संघ

संघ के स्वयंसेवक समाज – सेवा एवं राष्ट्र-निर्माण के लिये कठोर जीवन जीते हैं। उनका लक्ष्य राजनींति एवं सत्ता के माध्यम से सुविधायें न जुटाकर, पूरे देष मे सुदूर वनवासी क्षेत्रों तक में- पैदल तक चलकर, अनवरत काम करते हैं। हिन्दू समाज मे सामाजिक समरसता का भाव भरते हुये उसे एकता के सूत्र में पिरोते हैं। संघ मे लाखों-लाख ऐसे स्वयं सेवक हैं, जो आजीवन अविवाहित रहकर एकाकी जीवन जीकर अपने रक्त की एक-एक बूंद राष्ट्र के लिये समर्पित कर देते हैं। राष्ट्र-जीवन की भयावह समस्याओं के समक्ष अपने परिजनो के दुःख-दैन्य उनके लिये गौण हो जाते हैं।

भाजपाः वैचारिक हीनग्रंथि से मुक्ति का समय

लंबे समय के बाद भाजपा में अपनी वैचारिक लाइन को लेकर गर्व का बोध दिख रहा है। असरे बाद वे भारतीय राजनीति के सेकुलर संक्रमण से मुक्त होकर अपनी वैचारिक भूमि पर गरिमा के साथ खड़े दिख रहे हैं। समझौतों और आत्मसमर्पण की मुद्राओं के बजाए उनमें अपनी वैचारिक भूमि के प्रति हीनताग्रंथि के भाव कम हुए हैं। अब वे अन्य दलों की नकल के बजाए एक वैचारिक लाइन लेते हुए दिख रहे हैं। दिखावटी सेकुलरिज्म के बजाए वास्तविक राष्ट्रीयता के उनमें दर्शन हो रहे हैं। मोदी जब एक सौ पचीस करोड़ हिंदुस्तानियों की बात करते हैं तो बात अल्पसंख्यक और बहुसंख्यक से ऊपर चली जाती है। यहां देश सम्मानित होता है, एक नई राजनीति का प्रारंभ दिखता है। एक भगवाधारी सन्यासी जब मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठता है तो वह एक नया संदेश देता है। वह संदेश त्याग का है, परिवारवाद के विरोध का है, तुष्टिकरण के विरोध का है, सबको न्याय का है।

मणिपुर में शुरु की भाजपा ने पहली पारी

ऐसा नहीं कि कांग्रेस अपनी सत्ता पर आया संकट देख कर भी चुपचाप देखती रही । पन्द्रह साल से मणिपुर में कांग्रेस की सरकार चला रहे इबोबी सिंह ने अन्ततः वही पत्ता चला जिसके बलबूते कांग्रेस लम्बे अरसे से पूर्वोत्तर में अपना शासन चलाती रही है । उसने राज्य के नौ जिलों को तोड़ कर उनके सोलह ज़िले बना दिए । मणिपुर के नौ जिलों में से चार ज़िले तो घाटी में हैं और पाँच ज़िले पहाड़ में हैं ।

ऐसे तो कैसे कांग्रेस मजबूत होगी राहुलजी!

राहुल गांधी की राजनीतिक समझ पर शक होने लगा है। मुंबई में करारी हार हुई है। महाराष्ट्र में शर्मनाक स्थिति में कांग्रेस का प्रदर्शन रहा। यूपी में गठबंधन के बावजूद कांग्रेस के पनपने के आसार कम हैं। कांग्रेस को अब कोई और उपाय करना होगा।

मौत के सौदागर से लेकर रेनकोट स्नान तक किसका सर्वाधिक अपमान

नोटबंदी के बाद से अब तक यह सभी दल लगातार पीएम मोदी को डिगाने की साजिशें रच रहे हैें। संसद का पिछला सत्र पूरी तरह से बर्बाद कर दिया गया और पीएम मोदी के खिलाफ अपशब्दों की बौछार होती रही। लेकिन यह पीएम मोदी का 56 इंच का सीना ही है कि वह लगातार आगे बढ़ते जा रहे हैं। रेनकोट वाले बयान पर पीएम मोदी को माफी मांगने की कोई आवश्यकता नहीं है

पीएम मोदी की गर्जना व संकल्प पत्र के सहारे चुनावी मैदान में भाजपा

मृत्युंजय दीक्षित नोटबंदी के ऐतिहासिक फैसले के बाद उप्र के विधानसभा चुनाव भारतीय जनता पार्टी