लेख मनुस्मृति, एक ग्रंथ, अनेक अर्थ और आज के संदर्भ September 7, 2026 / September 7, 2026 by विवेक रंजन श्रीवास्तव | Leave a Comment मनुस्मृति Read more » मनुस्मृति
लेख क्या मनुस्मृति इतिहास की कूड़ेदानी है June 2, 2021 / June 2, 2021 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायकदैनिक जागरण के 10 फरवरी 2001 ई.के संपादकीय पृष्ठमें छपे श्री ह्रदय नारायण दीक्षित के आलेख ‘नए भारत कीसंरचना’ को पढ़ा था। आलेख की भाषा शैली अच्छी थी किन्तुप्रस्तुति तथ्य छिपाऊं एवं अधूरी है। लेखक के कुछ विचारऐसे हैं जिससे सहमत नहीं हुआ जा सकता। खासकर मनुस्मृतिके संबंध में लेखक की एक टिप्पणी […] Read more » Is Manusmriti the dustbin of history? मनुस्मृति
धर्म-अध्यात्म मनुस्मृति में किये गये प्रक्षेपों से होने वाली हानियां May 27, 2021 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment -मनमोहन कुमार आर्यआर्यजगत् की प्रसिद्ध वैदिक साहित्य के शोध एवं प्रकाशन की संस्था ‘आर्ष साहित्य प्रचार ट्रस्ट, दिल्ली’ द्वारा इतिहास में प्रथमवार दिनांक 26 दिसम्बर, 1981 को प्रक्षेपों से रहित ‘‘विशुद्ध-मनुस्मृति” का भव्य प्रकाशन किया गया था। इस अत्यन्त महत्वपूर्ण ग्रन्थ के व्याख्याता, समीक्षक तथा सम्पादक आर्यसमाज के सुप्रसिद्ध विद्वान कीर्तिशेष पं. राजवीर शास्त्री जी […] Read more » Losses due to projections made in Manusmriti मनुस्मृति
चिंतन धर्म-अध्यात्म मनुस्मृति के बारे में विद्वानों के मत May 16, 2019 / May 16, 2019 by राकेश कुमार आर्य | Leave a Comment अध्याय 12 मनु महाराज की दी गई व्यवस्था को संसार के अनेक देशों ने स्वीकार किया । अनेक देशों में ऐसे प्रमाण आज भी उपलब्ध हैं जहां मनु महाराज की दी गई व्यवस्था के अनुसार राजनीति और समाज दोनों ही शासित अनुशासित और मर्यादित होते रहे । संपूर्ण भूमंडल के बहुत बड़े भाग पर यदि […] Read more » मनु महाराज की दी गई व्यवस्था मनुस्मृति
धर्म-अध्यात्म “दूसरों की उन्नति में ही हमारी व देश समाज की उन्नति सम्भव है” December 3, 2018 by अभिलेख यादव | Leave a Comment मनमोहन कुमार आर्य, परमात्मा ने यह संसार जीवात्माओं के कर्म फल भोग और अपवर्ग अर्थात् मोक्ष प्राप्ति के लिये बनाया है। मनुष्य तथा सभी पशु-पक्षी आदि योनियों में सबका आत्मा एक जैसा है। सबको समान रूप से सुख व दुःख की अनुभूति होती है। सब जीवात्मायें अपने पूर्व जन्मों के कर्मानुसार भिन्न-भिन्न योनियों को प्राप्त […] Read more » अवतारवाद उपनिषद फलित ज्योतिष मनुस्मृति महाभारत मूर्तिपूजा मृतक श्राद्ध रामायण वेदानुकूल दर्शन
धर्म-अध्यात्म “अविद्या से रहित तथा विद्यायुक्त एकमात्र ग्रन्थ सत्यार्थप्रकाश” October 27, 2018 / October 27, 2018 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment मनमोहन कुमार आर्य, महाभारत काल के बाद से पूरे विश्व के अध्यात्म एवं सामाजिक जगत में घोर अविद्या फैली हुई है। मनुष्य को अपनी आत्मा सहित ईश्वर के सत्यस्वरूप का ज्ञान नहीं है। उसे अपने परिवार व समाज के प्रति भी अपने कर्तव्यों का ज्ञान नहीं है और न उसे यह पता है किससे क्या […] Read more » ईश्वर ईश्वर का स्वरूप ईश्वर के कार्य ईश्वर के गुण ईश्वरीय ज्ञान उपनिषद कर्म और स्वभाव दर्शन मनुस्मृति वेद
धर्म-अध्यात्म ‘सत्यार्थ-प्रकाश लिखकर ऋषि दयानन्द ने मानव जाति का उपकार किया है’ August 17, 2018 / August 17, 2018 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment मनमोहन कुमार आर्य, महर्षि दयानन्द वेद, इतिहास एवं संस्कृति के मूर्धन्य विद्वान व प्रचारक थे। उन्होंने सहस्रों की संख्या में संस्कृत भाषा के प्राचीन शास्त्रीय व इतर ग्रन्थों का अध्ययन किया था और लगभग तीन सहस्र ग्रन्थों को प्रामाणिक माना था। वेद सहित ऋषि दयानन्द अष्टाध्यायी-महाभाष्य व्याकरण, निरुक्त, ब्राह्मण ग्रन्थ, दर्शन, उपनिषद, रामायण, महाभारत, चरक, […] Read more » Featured अर्थ उपनिषद ऋषि दयानन्द काम व मोक्ष गुरुमन्त्र व्याख्या दर्शन धर्म पठन-पाठन ब्रह्मचर्योपदेश ब्राह्मण मनुस्मृति रामायण सन्ध्या अग्निहोत्र उपदेश
धर्म-अध्यात्म “चलो, स्वाध्याय करें” July 30, 2018 / July 30, 2018 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment मनमोहन कुमार आर्य, हमारा जहां तक ज्ञान है उसके अनुसार संसार में केवल वैदिक मत ही एकमात्र ऐसा धर्म वा मत है जहां प्रत्येक मनुष्य को वेद आदि सद्ग्रन्थों के स्वाध्याय को नित्य कर्तव्य कर्मों से जोड़ा गया है। वैदिक काल में प्रमुख ग्रन्थ ‘चार वेद’ थे और आज भी संसार के साहित्य में चार […] Read more » Featured अनेक वैदिक अपूर्व ग्रन्थों सत्यार्थप्रकाश आर्याभिविनय उपनिषद ऋग्वेदादिभाष्य ऋग्वेदादिभाष्यभूमिका ऋषि दयानन्द चलो दर्शन भाष्यकार मनुस्मृति महाभारत रामायण वेदभाष्य सत्यार्थप्रकाश संस्कारविधि स्वाध्याय करें”
धर्म-अध्यात्म वैदिक धर्म को यदि बचाना है तो अपने मन से सभी प्रकार के भेदभाव को दूर करना होगा May 29, 2018 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment मनमोहन कुमार आर्य, महाभारत काल के बाद से वेद और वैदिक धर्म का निरन्तर पतन देखने को मिल रहा है। ऋषि दयानन्द के जीवन में ऐसा भी समय आया जब वेद लुप्त-प्रायः हो गये थे। महाभारत काल के बाद वेदों के सत्य अर्थों का देश व समाज में प्रचार रहा हो, इसका प्रमाणित विवरण […] Read more » Featured ईश्वर ऋषि दयानन्द ऋषि मुनियों चित्त जातिवाद ज्ञानेन्द्रिय पांच कर्मेन्द्रिय बुद्धि मन मनुस्मृति महाभारत व ब्राह्मण रामायण वैदिक साहित्य
धर्म-अध्यात्म वेद और सत्यार्थप्रकाश के स्वाध्याय को जीवन का अंग बनायें April 13, 2018 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment मनमोहन कुमार आर्य मनुष्य का जीवात्मा अल्पज्ञ होता है। अल्पज्ञ होने के कारण इसे ज्ञान अर्जित करना होता है। ज्ञान माता-पिता व आचार्यों सहित पुस्तकों वा ग्रन्थों से प्राप्त होता है। माता-पिता का ज्ञान तो सीमित होता है अतः उनसे जितना सम्भव हो वह ज्ञान तो लेना ही चाहिये। इसके अतिरिक्त विद्यालय जाकर आचार्यों से […] Read more » Featured ईश्वर उपनिषद उपासना चरक ज्योतिष धर्म व अधर्म बन्धन व मोक्ष मनुस्मृति विद्या व अविद्या सत्य ज्ञान सुश्रुत सृष्टि
धर्म-अध्यात्म ईश्वर सभी जीवों के कर्मों का साक्षी और उन कर्मों का फल प्रदाता है April 2, 2018 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment मनमोहन कुमार आर्य क्या आप ईश्वर व उसके बनाये हुए इस संसार को जानते हैं? इसका उत्तर वह बन्धु जिन्होंने वेद व ऋषियों के शास्त्र पढ़े, जाने व कुछ समझे हैं, हां में देते हैं। कोई भी रचना तभी अस्तित्व में आती है कि जब कोई ज्ञानी मनुष्य उसकी रचना करता है। क्या कोई पेंटिंग […] Read more » feaured ईश्वर ब्रह्माण्ड मनुस्मृति वेद व ऋषियों संसार
राजनीति लेख साहित्य मनु और वत्र्तमान राजनीति की विश्वसनीयता भाग-2 August 24, 2016 by राकेश कुमार आर्य | Leave a Comment राकेश कुमार आर्य महर्षि मनु अपने राजधर्म में राजा की पहली योग्यता बताते हुए कह रहे हैं कि ‘राजा’ ब्राह्मण के समान परम विद्वान होना चाहिए। कारण कि परम विद्वान राजा ही परम विद्वान ब्राह्मण से राजकाज संबंधी कार्यों के संबंध में गूढ़ चर्चा कर सकेगा। यदि ‘राजा’ मूर्ख है या अनपढ़, अशिक्षित या निरक्षर […] Read more » Featured मनु मनुस्मृति