राजनीति

गांधीवाद की परिकल्पना-8

हमारी सरकारों ने गांधीवाद का चोला पहनकर सूचना पाने वाले को उस व्यक्ति का मौलिक अधिकार माना है। यह कैसी घोर विडंबना है कि सूचना पाने का अधिकार देकर भी उसे सही सूचना (इतिहास की सही जानकारी) से वंचित रखा जा रहा है। इस भयंकर और अक्षम्य षडय़ंत्र पर से पर्दा उठना चाहिए कि वे कौन लोग हैं जो हमारे सूचना पाने के मौलिक और संवैधानिक अधिकार में बाधक हैं? ऐसा नाटक अब बंद होना चाहिए, जिससे पर्दे के पीछे से सत्य, अहिंसा और बंधुत्व के कोरे आदर्शों की भी हत्या की जा रही है। किंतु फिर भी देश पर गांधीवाद के आदर्शों को लपेटा जा रहा हो और उसे बलात् थोपा जा रहा हो।

सपा को विपक्ष में बैठकर काम करने का सबक

वस्‍तुत: पिछले कई चुनावों से सभी ने देखा है कि किस तरह यूपी में चुनाव आते ही मुस्‍लिम वोट बैंक की राजनीति शुरू हो जाती थी। लगता था कि सपा-बसपा, कांग्रेस में होड़ मची है यह बताने की कि कौन कितना बड़ा मुस्‍लिमों का पेरोकार है। भाजपा को छोड़कर इस बार भी हर बार की तरह ही यहां मुसलमानों को थोक में पार्टियों ने अपना प्रत्‍याशी बनाया, इस आशा में कि वह कमाल कर देंगे, जीतकर आएंगे और सरकार बनाने में अपना अहम रोल अदा करेंगे।