स्वामी रामदेव

“यदि स्वामी दयानन्द और स्वामी श्रद्धानन्द न होते तो स्वामी रामदेव भी न होते : स्वामी रामदेव”

  मनमोहन कुमार आर्य,  तीन दिवसीय गुरुकुल सम्मेलन, गुरुकुल कांगड़ी परिसर में 6 जुलाई, 2018

स्वामी रामदेव जी और आयुर्वेदिक चिकित्सा प्रणाली

बाबा रामदेव जी जैसे लोगों द्वारा भारतीय धर्म और संस्कृति की मचाई गयी धूम के परिणामस्वरूप अब जाकर विश्व की आंखें खुल रही हैं, और उसे धीरे-धीरे पता चल रहा है कि भारत की मान्यताएं ही महान हैं, सत्य हैं और अकाट्य हैं। विश्व ने एलोपैथिक चिकित्सा प्रणाली के माध्यम से अपनी जेब कटवाकर देख लिया और यह समझ लिया कि यह चिकित्सा प्रणाली तो हमें सिवाय मारने के और कुछ कर नहीं रही है और यदि हमने इसका पीछा नहीं छोड़ा तो यह हमारा सर्वनाश कर देगी। यही कारण है कि लोग जीवित और स्वस्थ रहने के लिए अपने सारे जातीय पूर्वाग्रहों और साम्प्रदायिक मान्यताओं को तिलांजलि देकर भारत के आयुर्वेद की शरण में आ रहे हैं।

स्वदेशी से स्वावलंबन तक – सुरभि दूबे

योगऋषि स्वामी रामदेव जी महाराज का देश को स्वावलम्बन तक ले जाने का जो प्रयाश है वह सचमुच सराहनीय है. आज जब पुरा देश विनाश की राह पर चल पडा है तब स्वामी जी ने…