लाल आतंक का क्रूर चेहरा

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केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन की इस बात से सौ फीसदी सहमत हुआ जा सकता है कि उनके खिलाफ मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में हुए विरोध प्रदर्शन के पीछे ‘संघ संस्कृति’ है। नि:संदेह यह संघ अर्थात राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की ही संस्कृति है, जो विचारों में घोर असहमति के बावजूद सामने वाले पक्ष को अपना मानती है।

हिंसा क्यों चाहता है इस्लाम

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-सुरेश हिन्दुस्थानी- भारत के समाचार पत्रों में एक समाचार पढ़ने में आया कि कश्मीर को मुक्त कराने आ रहा है जिहादी संगठन अलकायदा। इस आतंककारी संगठन ने भारत के साथ साथ दुनिया के मुसलमानों से अपील की है कि अब हथियार उठाने का समय आ गया है। हथियार उठाने का सीधा सीधा तात्पर्य यह है… Read more »

धर्म, हिंसा और आतंक

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-बीनू भटनागर- मैंने पुणे के एक युवक की पीट-पीट कर हत्या होने पर आक्रोश प्रकट किया, तो मुझे याद दिलाया गया कि कश्मीर से पंडितों के विस्थापित होने पर या हिंदुओं पर मुसलमानों द्वारा हिंसा होने पर मुझे ये आक्रोश क्यों नहीं आया था। यदि पुणे का युवक मोहसिन न होकर मुद्रित होता तो भी… Read more »

अश्लीलता और हिंसा के पक्ष में खड़े ये लोग

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गिरीश पंकज इधर नए किस्म के भारतीय समाज में अश्लीलता और हिंसा के प्रति, एक वर्ग में स्वीकृति का भाव देखता हूँ तो हैरत होती है. हम जितने भी आधुनिक हो मगर अश्लीलता और हिंसा को महिमा मंडित नहीं कर सकते। लेकिन पिछले दिनों गांधी नगर के गुजरात केंद्रीय विश्व विद्यालय में हिंदी उपन्यास और… Read more »

गोलियों के बीच फंसे हैं आदिवासी

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राजगोपाल पीवी  प्राकृतिक संसाधन और आदिवासी संस्कृति से समृद्ध छत्तीसगढ़ को इस रूप में जानने की बजाए उसे नक्सल प्रभावित क्षेत्र के रूप में कहीं अधिक याद किया जाता है। विशेषकर बस्तर और उसके आसपास के क्षेत्रों से आपको नक्सलवाद से जुड़ी खबरों के अतिरिक्त कुछ और सुनने अथवा पढ़ने को नहीं मिलेगा। विकास की… Read more »

नक्सली हिंसा, उभरते प्रश्न ?

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डॉ. मयंक चतुर्वेदी आंध्र, छत्तीसगढ, झारखण्ड, बिहार, पश्चिमबंगाल, महाराष्टन् आदि राज्यों में माओवादी नक्सलियों का हिंसात्मक ताण्डव रूक-रूककर जिस तरह चल रहा है, उसने हमारे लोकतंत्रात्मक देश के सामने अनेक प्रश्न खडे कर दिये हैं। भारत के संविधान में स्पष्ट उल्लेख है कि यह गणराज्य जनता के लिए जनता द्वारा शासित है, जिसमें भारतीय जनता… Read more »

अहिंसा का पाठ पढ़ाने वाली पाठशालाएं हिंसा का पर्याय बनती जा रही हैं

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अखिलेश आर्येन्दु सात महीने पहले कोलकाता के मार्तिनेर स्कूल के एक छात्र रौवनजीत रावला की स्कूल के अध्यापकों द्वारा बेंतों से बेतहाशा पिटाई करने के बाद आत्महत्या कर ली थी। तब पुलिस प्रशासन ने दोषी प्रिंसिपल और अध्यापकों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की थी। लेकिन सामाजिक संगठनों और राश्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने… Read more »

मज़हब नहीं सिखाता आपस में बैर रखना

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-फ़िरदौस ख़ान मज़हब नहीं सिखाता आपस में बैर रखना हिंदी हैं हम वतन है, हिन्दोस्तां हमारा… हिंसा किसी भी सभ्य समाज के लिए सबसे बड़ा कलंक हैं, और जब यह दंगों के रूप में सामने आती है तो इसका रूप और भी भयंकर हो जाता है। दंगे सिर्फ जान और माल का ही नुक़सान नहीं… Read more »

जब कौआ चले हंस की चाल

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-पंकज झा पौराणिक पक्षी हंस के बारे में मान्यता है कि अगर उसके सामने आप दूध मिला पानी रख दें तो वह पानी को अलग कर ‘दूध’ ग्रहण कर लेता है. शास्त्रों में इसे नीर-क्षीर विवेक कहा गया है. ‘साहित्य’ से भी यही अपेक्षा की जा सकती है वह यदि सर्वजन हिताय काम ना कर… Read more »

केरल को लेकर इस्लामी आतंकवादियों का षड्यंत्र

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– डॉ कुलदीप चंद अग्निहोत्री केरल देश का शायद सबसे ज्यादा अनुपात वाला साक्षर राज्य है। केरल ही वह प्रदेश है जहां देश के इतिहास में पहली बार लोकतांत्रिक ढंग से साम्यवादी सरकार को चुना गया था। इसलिए कुछलोग ऐसा भी कहते हैं कि केरल चिंतन और व्यवहार में देश का सबसे प्रगतिशील राज्य है।… Read more »