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जे.एन.यू. और डी.यू. का डी.एन.ए.

जे.एन.यू. के पश्चात अब डी.यू. में जिस प्रकार आजादी के नारे लगाये गये हैं उनसे पता नहीं चलता कि ये छात्र अंतत: किससे आजादी चाहते हैं? क्या जिसका अन्न खाते हैं और हवा पानी प्रयोग करते हैं उसी मातृभूमि से ये अपनी आजादी चाहते हैं? यदि ऐसा है तो यह तो निश्चय ही देश के विरूद्घ युद्घघोष और विश्वासघात है। ऐसे विश्वासघात को और अधिक जारी रखने की अनुमति नहीं दी जा सकती।