लेखक परिचय

मृत्युंजय दीक्षित

मृत्युंजय दीक्षित

स्वतंत्र लेखक व् टिप्पणीकार लखनऊ,उप्र

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जैन समाज के पयुर्षण पर्व के अवसर पर जब से महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई  व कई अन्य हिस्से में मीट की बिक्री पर प्रतिगबंध लगाया गया गया उसके बाद भाजपा की परम सहयोगी शिवसेना व महाराष्ट्र की मनसे ने जिस प्रकार से  मीट बैन के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद की व जैन समाज तथा उनके साधु संतों का अपमान किया है वह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण व दुखद घटना है। शिवसेना का मीट बैन के खिलाफ उतरना भी एक प्रकार से काफी हैरानी भरा कदम लग रहा है। शिवसेना के पूर्व प्रमुख संस्थापक स्व. बालासाहेब ठाकरे शाकाहरी थे। वे शाकाहरी आंदोलन के समर्थक भी थे। अब उनके जाने के बाद ऐसा लग रहा है कि शिवसेना अब बदल रही है।  शिवसेना ने मीट बैन पर हल्ला मचाकर अपनी लोकप्रियता को बढ़ाने की बजाय देशभर में अपना नुकसान कर लिया है और अब अपने नुकसान की भरपाई के लिए प्रधानमंत्री मोदी को पत्र. लिखकर स्वतंत्रता संग्राम सेनानी वीर सावरकर को भारतरत्न देने की मांग कर रही है। महाराष्ट्र में मीअ बैन के खिलाफ सबसे शर्मनाक आंदोलन व व्यवहार का परिचय तो राज ठाकरे की पार्टी ने दिया जिसने जैन मंदिर तथा सोशल मीडिया में हल्ला मचने के बाद जैन कम्युनिटी सेंटर के बाहर भी मीट की दुकान लगाकर काफी अभद्र तरीके से बैन के खिलाफ प्रदर्शन तो किया ही है साथ ही साथ जन समुदाय की अवमानान व अपमान भी किया है जो बेहद निंदनीय है। यदि कोई मुस्लिम वोटबैंक परस्त पार्टियां  इस प्रकार की घिनेौनी हरकतें करतीं तो बात समझ में आती हैं लेकिन यह तो शिवेसना ही है। जिसेन मीट बैन के खिलाफ आक्रामक जनजागरूकता पैदा करके मांसाहार का भक्षण करने वालों को जागरूक करने का काम किया।

मुश्किल से चार दिन यदि मीट की दुकानें बंद रहतीं और लोग मांसाहार न भी करते तो कोई भूकम्प नहीं आ जाता। पर्युषण अंिहसाव क्षमा देने का पर्व है। शांति का पर्व है। लेकिन इसपर्व का उपयोग अपनी राजनीति को चकाने क लिए किया जा रहा है यह दुखद व अलोकतांत्रिक है। शिवसेना के आचरण से सेकुलर दलों को भी हल्ला मचाने का सुखद अवसर मिल गया । वैसे भी उन्हें तो अवसरों की तलाश रहती है कि कि मोदी जी से जवाब मांगा जाये। मीट बैन के खिलाफ वे ही लोग एक बार फिर सक्रिय हो गये जिन्होनें महाराष्ट्र  विधानसभा से पारित गोवध प्रतिबंध का विरोध किया था ,मीट बैन के खिलाु वे लोग सड़कों रउतर रहे हैं जिन्होनें एफटीआई्रआई्र में गजेंद्र चैहान की नियुक्ति का विरोध किया है,इसमें वे लोग भी शामिल हो गये हैं जिन्होनंे अभी हाल ही में जेल में बंद आतंकी याकूब मेनन को फांसंी देने का विरोध किया था। आज का फिल्म उद्योग तो पूरी तरह से अंधेर नगरी चैपअ राजा बनता जा रहा है । आज की फिलमें भी वैसी ही बन रही हैं जिसमंे हिंसा, सैक्स और धर्म विरोधी बातें ही भरी होती है। फिल्म अभिनेता ऋषि कपूर तथा अभिनेत्री सोनाक्षी सिन्हा ने मीट बैन के खिलाफ जहर उगलने वाले एक के बाद एक टिवट करने शुरू कर दिये । फिर उनके पीछे लगभग सभी हो लिये । इनमें अधिकांश वे सभी लोग शामिल हैं जिन्होनेें याकूब मेनन को फांसी देने व गोवध पर प्रतिबंध लगाने का तीखा विरोध किया था।

shivsenaयही दबाव का कारण रहा कि मुंबई हाई्रकोर्ट ने  मीट बैन की समय सीमा घटा दी। उधर देश के तथाकथित इल्ेाक्ट्रानिक मीडिया में इस पूरी घटना को पूरे गलत तरीके से पेश किया जा रहा है। इन घटनाओं के तार जोड़कर पीएम मोदी को भी बदनाम करने की सेकुलर साजिशें हो रही हैं। एक ओर जहां मंुबई की सड़कों पर हल्ला बोला गया वहीं दूसरी ओर भाजपा शासित अंधिकांश राज्यों ने मीट बैन पर कुद दिनों के लिए प्रतिबंध लगा ही दिया। जिसमें राजस्थान,गुजरात, हरियाणा  व छत्तीसगढ़ जेैसे प्रांत भी शामिल हैं। आज  जो दल व तथाकथित मीडिया मीट बैन के चिालाफ जहर उगल रहे हैं उन्हें यह नहीं पता कि पूर्व में कांग्रेसी सरकारें भी इस प्रकार के कदम उठाया करतीे थीं और राजनैतिक तुष्टीकरण किया करतीं थीं बस अब परिवर्तन यह हो गया है कि देश में पहली बार  भाजपा नेतृत्व में पूर्ण  बहुमत की सरकार बन गयी है और यह बात सेकुलर मंडली को रास नहीं आ रही है। इन सभी दलों को अभी भी अपनी पराजय स्वीकार नहीं हो पा रही है। इसलिए बेसिरपैर के मुद्दों को उठाकर सबका साथ सबका विकास के नारे को डिरेल करना चाह रहे हैं।

उधर अभी यह प्रकरण चल ही रहा था कि जम्मू- काश्मीर के हाईकोर्ट ने पूरे राज्य में गोमांस की बिक्री  पर पूण्र प्रतिबंधलगाने का एक ऐतिहासिक आदेश जारी किया है। जिसके कारण काश्मीर घाटी के अलगाववादी नेता अपनी आदतों के अनुरूप घाटी में हड़ताल व प्रदर्शन कर रहे हैं। जम्मू -काश्मीर में पीडीपी नेता महबूबा मुफ्ती का बयान आया है कि गोमांस पर हाईकोर्ट का आदेश नहीं लागू किया जाना चाहिए वहीें दूसरी ओर राज्य की भाजपा इकाई व उपमुख्यमंत्री का कहना है कि आदेश का पालन अक्षरशः लागू किया जाना चाहिये। एक प्रकार से जम्मू काश्मीर में भी गोमांस पर जो राजनीति हो रही है वह धर्मआधारित हो रही है। आाजकल उन सभी चीजों का विरोध करना फैशन हो गया है जो कि भारत की आत्मा हैं व सांस्कृतिक रूप से जुड़ी हैं यहीं नहीं भारतीय एकता व अखंडता को भ मजबूत करती हैे। जम्मू काश्मीर हाइ्रकोर्ट का फैसला  बहुत ही ऐतिहासिक फैसला है जहां से इस प्रकार के फैसलों की उम्मीद नहीं की जा सकती। लेकिन सेकुलर लोगों ने इसे भी पीएम मोदी से जोड़कर प्रस्तुत करने का अशोभनीय व झूठा कृत्य करने का प्रयास किया तथा यह भी जताने का असफल प्रयास किया कि  जम्मू काश्मीर मंे इस प्रकरण के कारण राज्य की गठबंधन सरकार गिर जायेगाी।

एक ओर जहां पूरे देशभर में मीट बैन और गोमांस को लेकर विकृत राजनीति हो रही हैं वहीं दूसरी ओर उप्र के बागपत के बड़ौत गांव के मुस्लिमों ने दो दिन पशु वध न करने और मांस न खाने का साहसिक निर्णय करके एक शानदार नजीर प्रस्तुत कर दी है। सोशल मीडिया में बागपत के मुस्लिमों का जोरदार स्वागत हो रहा है। उनका यह कदम सेकुलर दलांे के मुंह पर करारा तमाचा भी है। इस निर्णय की जानकारी बागपत की सबसे बड़ी मस्जिद के इमाम ने जानकारी देते हुए बताया कि जैन समुदाय के लोगों सेबात करने के बाद मुस्लिम समाज ने सामाजिक समरसता लाने के उददेश्य से दो दिन तक मीट की दुकान बंद रखने का निर्णय लिया है। यहां के लोगों का मानना है कि 1857 से ही यहां पर सामाजिक समरसता का वातावरण है तथा सभी धर्मों के लोग एक दूसरे के प्रति आदरभव के साथ रहते हैं और अंग्रेजों के खिलाफ सभी लोगों ने एक साथ मिलकर संघर्ष किया था।  मीट बैन के खिलफ सर्वोच्च न्यायालय की सात जजों की खंडपीठ इस पूरे मामले को सुन चुकी है तथा ऐतिहासिक निर्णय सुना चुकी है। एक और मुस्लिम धर्मगुरू कल्वे सादिक ने गोमांस की खिलाफत की है। अब इसे साफ पताचल रहा है कि गोमांस व मीट को लेकर केवल और केवल सेकुलर दल आंसू बहा रहे हैं तथा धर्म आधरित जनगणना में समाप्ति की ओर बढ़ रहे जैन धर्म जैसे समाज का बाहुबल के चलते तिरस्कार व घृणित अपमान कर रहे है। पयुर्षण पर्व क्षमा का पर्व हैं ऐसे लोगों को जो इनका अपमान कर रहे हैं कैसे क्षमा किया जा सकता है।यह लोग स्वतः ही समाप्ति की ओर बढ़ रहे हैं।

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