लेख शख्सियत समाज राष्ट्रीय दृष्टिकोण पर स्वामी विवेकानंद के विचार January 12, 2024 / January 15, 2024 | Leave a Comment आत्माराम यादव पीव रामकृष्ण मिशन के संस्थापक स्वामी विवेकानन्द का जन्म आज ही के दिन 12 जनवरी 1863 को विश्वनाथ दत्त एवं माता ज्ञानेश्वरी देवी के यहाॅ कलकत्ता में हुआ,इनके बचपन का नाम नरेन्द्रनाथ दत्त था। नरेन्द्रनाथ अपनी धार्मिक एवं आध्यात्मिक जिज्ञासा के कारण रामकृष्ण परमहंस के सम्पर्क में आये तब रामकृष्ण परमहंस कलकत्ता में […] Read more » Swami Vivekananda's views on national outlook
लेख कभी वज्र थी किसान की छाती, अब कमजोर क्यों ? January 11, 2024 / January 11, 2024 | Leave a Comment कृषि कल्याण आयोग गठित कर किसान को दी जा सकती है सुरक्षा – आत्माराम यादव पीव भारत के किसान को देश का मेरुदंड माना गया है ओर उसके जीवन के संघर्षों से उबरकर साहसी बनने के कारण ही कभी उसकी छाती व्रज के समान कठोर हुआ करती थी, जो किसान को उसकी […] Read more » The farmer's chest was once a thunderbolt
लेख पतई वाले बाबा संत रामस्वरूप महाराज ने बांद्राभान को बनाया है तपस्थली January 11, 2024 / January 11, 2024 | Leave a Comment भारत संत-महात्मा और सिद्धों का देश है। देश में संत ही है जो मानव जीवन में निराशा के दंश को निकाल फैकते है। संत ही की कृपा है जो हर अशुभ को शुभ और हर अमंगल को मंगल कर सकती है। हमारे जीवन में भी इन संतों का […] Read more » Baba Sant Ramswaroop Maharaj of Patai has made Bandrabhan a place of penance. पतई वाले बाबा संत रामस्वरूप महाराज
लेख शख्सियत समाज नर्मदा क्षेत्र के उदारमना महंत दौलत दास जी ग्वाल January 11, 2024 / January 11, 2024 | Leave a Comment आत्माराम यादव पीव नर्मदापुरम नगर के ग्वालटोली में निवासरत हीरालाल बानिये के घर दौलतराम जी का जन्म सन् 1918 में हुआ। दौलतराम जी की माॅ श्रीमति विनियाबाई एक धार्मिकप्रवृत्ति की महिला थी जो पूरे समय पूजापाठ मे निमग्न रहती। जन्म के बाद बालक दौलतराम अपनी माॅ के […] Read more » Udarmana Mahant Daulat Das Ji Gwal of Narmada region महंत दौलत दास जी ग्वाल
लेख क्या है प्रणाम का मूलतत्व? January 5, 2024 / January 5, 2024 | Leave a Comment मनुष्य अनादि काल से अपना पूरा जीवन आत्मा और परमात्मा के गूढ़ रहस्य को जानने की जिज्ञासा में रेगिस्तान में जल के लिये भटकते एक मृगतृष्णा की भांति समाप्त कर देता है और वह तामसिक प्रवृत्तियों के गहन अंधकार में निमग्न रहकर प्रणाम, प्रार्थना और विसर्जन के मूल तत्व तक से अनभिज्ञ बना रहता है। […] Read more »
प्रवक्ता न्यूज़ लेख प्रसाद का भाव तत्व है, इष्ट की कृपा प्राप्ति January 5, 2024 / January 8, 2024 | Leave a Comment आत्माराम यादव पीव वरिष्ठ पत्रकार ममतामयी माँ वसुंधरा जगत के सभी मनुष्यों, जल-थल के जीव-जंतुओं, प्राणियों-वनस्पतियों सहित सभी के जीवन निर्वहन हेतु सबकी प्रकृति का भोज्य पदार्थ प्रदान कर जगत का पोषण करती आ रही है। माँ वसुंधरा की परम असीम अनुकम्पा के प्रति हमारा आग्रह निवेदित हो जाये […] Read more » इष्ट की कृपा प्राप्ति प्रसाद का भाव तत्व है
लेख शरीर है धर्मसंग्रह का प्रमुख साधन December 28, 2023 / December 28, 2023 | Leave a Comment आत्माराम यादव पीव महाकवि कालिदासकृत के द्वारा रचित ’’कुमारसंभव’’ के पॉचवे सर्ग में भगवान शंकर की प्राप्ति के लिये पार्वती जी हिमालय पर तप कर रही है, तब शंकर जी उनके निश्चय की परीक्षा करने के लिये एक ब्रम्हचारी के वेश में आकर कुशल क्षेम पूछने के बाद कहते […] Read more » Body is the main means of gathering religion
व्यंग्य पत्रकार फूहड़मल की कुछ न करने की मैराथन दौड़ December 28, 2023 / December 28, 2023 | Leave a Comment व्यंग्य- आत्माराम यादव पीव वरिष्ठ पत्रका एक युग था जब यहॉ उच्च आदर्श वाले पत्रकारों की ऊचाईया छूना मुश्किल था पर आज के पत्रकार इतने नीचे गिर गए कि वहॉ तक जाने की कोई कल्पना भी नहीं कर सकता है। इन गिरे हुयों से जनता त्रस्त है,पर गिरकर पड़े हुए इन पत्रकारों […] Read more »
लेख शख्सियत समाज श्रीनर्मदा कल्पवल्ली के रचयिता तपोमूति स्वामी ओंकारानन्द जी गिरी December 26, 2023 / December 26, 2023 | Leave a Comment पुण्यसलिला मॉ नर्मदा जी के पावनतट होशंगाबाद में नर्मदा दर्शन कर पुण्य अर्जित करने आने वाले महात्माओं एवं संतों श्री श्रृंखला में तपोमूर्ति ब्रम्हलीन पूज्य स्वामी ओंकारानन्दजी गिरी का नाम नर्मदापरिक्रमा कर रहे सभी भक्तों को स्मरण रहता है जो इनके द्वारा रचित वृहद नर्मदा महात्म्य एवं श्रीनर्मदा कल्पवल्ली के […] Read more » author of Shri Narmada Kalpavalli Tapomuti Swami Omkaranand Ji Giri
कविता समय तू चलता चल December 26, 2023 / December 26, 2023 | Leave a Comment किसने देखा आता है तू, किसने देखा जाता है तू समा सके न इन आँखों में, यूं दबे पांव आता है तू।। उतर रहा सूरज नभ से, समय को अपलक देखें सागर तेरे पांव पखारे, धरती लिखती लेखें ।। तेरी सूरत तेरी मूरत,दुनिया वाले न जान सके जिन आँखों ने देखा नहीं, वे ही तेरी पहचान करें। समय तू चलता […] Read more » समय तू चलता चल
लेख राधाकृष्ण की ललित लीलाओं ने दिया आधुनिक चित्रकारी को जन्म December 20, 2023 / December 20, 2023 | Leave a Comment ग्यारहवीं ईसवी शताब्दी के आसपास के समय पहली बार मंचों से खेला गया रंगमंच या नाट्य के महाअभिनेता के रूप में श्रीकृष्ण और नायिका राधा का अवदान पा जगत उनकी ऋणी हो गया है। आचार्य रामानुजाचार्य ने कृष्ण राधा को लेकर अनेक रूपक लिखे है जिसमें रुक्मिणी स्वयंवर लिखने के बाद कंस वध लिखा […] Read more » राधाकृष्ण की ललित लीला
कविता दाता खुद बना भिखारी है December 15, 2023 / December 15, 2023 | Leave a Comment दाता खुद बना भिखारी है हाथ पसारे आने वाले हाथ पसारे जाते है इस दुनिया में आते ही , सभी भिखारी बन जाते है।गली गली में झोला टांगे , कुछ तो आटा मांग रहे कुछ सम्राटों के घर पैदा हो, खाने को मोहताज रहे ।।आगे बढ़ो माफ़ करो बाबा, कहा जाता है भिखारी को जिनके घर अम्बार लगा हो, उनको पल में मिल जाता है । भिक्षुक बनकर जो हाथ पसारे, वह उतना ही पा जाता है रुखा सुखा भाग्य है जिनका, वह चाह छोटी ही रख पाता है ।। जो आदत छोड़े मांगने की और प्रेम को हृदय मैं उमगायेजरूरत नही फिर उस प्रेमी की, वह सारा साम्राज्य पा जाए ।जीवन से चूके कई मांगने वाले, जो भिखारियों के आगे हाथ पसारे छीने उनसे जिनकी झोली खाली। भरी तिजोरी वालो की करता न्यारे–ब्यारे आनन्द बरसे करुणा उपजे, जहा अस्तित्व सदा से नाच रहा ‘पीव ‘ उस वीतरागी की मुठ्ठी में आने को।। आनन्द स्नेह से है भरा पसारने के इस आनंद को पाने, जिसने भी हाथ पसारा हैब्रह्मांड हथेली में देनेवाला , दाता खुद बने पसारने वाला है।। Read more »