विनय कुमार'विनायक'

बी. एस्सी. (जीव विज्ञान),एम.ए.(हिन्दी), केन्द्रीय अनुवाद ब्युरो से प्रशिक्षित अनुवादक, हिन्दी में व्याख्याता पात्रता प्रमाण पत्र प्राप्त, पत्र-पत्रिकाओं में कविता लेखन, मिथकीय सांस्कृतिक साहित्य में विशेष रुचि।

मैं कौन हूं अथ अहं ब्रह्मास्मि (दो)

---विनय कुमार विनायकमैं कौन हूंमन्वन्तर-दर-मन्वन्तरमनु के बेटों का मनु की व्यवस्था सेपूछा गया सवाल,पूछता है फिर-फिरमनु का बेटा/यह जानकर भीकि...

अंग संस्कृति का अंग भंग कर बना संथाल परगना झारखण्ड

---विनय कुमार विनायकयह अंगभूमि,अंग संस्कृति एवं अंगिका भाषी समाज की विडंबना ही है कि सर्वाधिक प्राचीन भूगोल एवं गौरवशाली इतिहास...

मैं कौन हूं? अथ अहं ब्रह्मास्मि

----विनय कुमार विनायकमैं कौन हूं?मन्वन्तर-दर-मन्वन्तरमनु के बेटों कामनु की व्यवस्था सेपूछा गया सवाल पूछता हैफिर-फिर मनु का बेटा!यह जानकर भीकि...

सिद्धार्थ गौतम भगवान बुद्ध

---विनय कुमार विनायकब्राह्मणवाद और जातिप्रथा के बैरीअवतारवाद के दुश्मन,अहिंसा की मूर्तिबुद्ध तथागत कोतुमने ही दरेरा मारकरघर से निकाला!उनके अहिंसा दर्शन...

मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम

---विनय कुमार विनायकगो ब्राह्मण के रक्षक रामथे महान मर्यादावादी! दीन-दलितों के भगवान,थे घोर परम्परावादी! परम्परा को छोड़ना,ब्राह्मणी विधान को तोड़नाराम...

डाकघर का लौह मुहर देख प्रेमपत्र सिहर उठता

---विनय कुमार विनायकडाकघर;एक पूर्ण सरकारी दफ्तरबाबा आदम युग से पाकरएक प्यारी मुंहबोली संज्ञाआज भी कहलाता डाकघर,यही हकीकत नही माखौल!डाकघर की...

18 queries in 0.420